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जानिए टैक्स के बदले सरकार से मिलने वाली किन सुविधाओ पर हम अपनी जेब से पैसा दे रहे हैं

नई दिल्ली । नेशनल जनमत ब्यूरो।

हाल ही में मोदी सरकार ने एक टैक्स नीति यानि जीएसटी लागू कर दी है पर आम लोग मोदी सरकार की टैक्स नीति पर अब सवाल खड़े कर रहे हैं. लोग सवाल कर रहें कि जब सरकार उनके बच्चों को सरकारी शिक्षा नहीं दे पा रही है, अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं दे पा रही है, अच्छी परिवहन व्यवस्था नहीं दे पा रही है, लोगों को रोजगार देने में असमर्थ है तो सरकार को इम टैक्स क्यों दें.

सरकार को सिर्फ सुरक्षा के नाम पर इतना टैक्स देना कहां तक उचित है. सामाजिक चिंतक शशिकांत गोयल ने कल्याणकारी राज्य की नीतियों से भारत सरकार के पलायन पर फेसबुक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखते हैं कि…

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सरकार को हर साल डायरेक्ट और इनडाइरेक्ट टैक्स से लगभग 25 लाख करोड़ का कलेक्शन होता है..
आइए अब जरा एक नजर डालें कि आपके जीवन यापन के खर्चे में उस टैक्स कलेक्शन के बदले सरकारी योगदान क्या है.

1. शिक्षा- आप निजी स्कूलों या कॉलेजो में बच्चों को पढ़ते हैं पूरी तरह खुद खर्च उठाते हैं, सरकारी योगदान शून्य
2. स्वास्थ्य- आप पूरी तरह निजी हॉस्पिटल एवं क्लिनिक पर निर्भर हैं जिसका सारा खर्च खुद उठाते हैं, सरकारी योगदान शून्य.
3. सड़क – जो भी हाईवे बनते हैं बड़े बड़े पुल बनते हैं उन सबका टॉल टैक्स के द्वारा उसका खर्च आप उठाते हैं, सरकार का योगदान बस छोटे छोटे लिंक सड़कों तक सीमित है और उसमें भी वे अपनी भूमिका ढंग से नही निभा रहे

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4.- शहरी मोहल्लों में दी जाने वाली सीवर या अन्य नगर निगम की सुविधाएं –  इसके लिए आप अलग से हाउस टैक्स चुकाते हैं
5. कूड़ा उठाने की सुविधा – इसके लिए हर घर के लोग एक निश्चित राशि अलग से चुकाते  हैं
6. बिजली – लगभग मार्केट रेट पर आप कीमत  चुका रहे हैं
7. पेट्रोलियम – मार्केट रेट पर आप कीमत चुका रहे हैं
8. फ़ूड आइटम – पहले से ही मार्केट रेट पर अपने खर्चे पर खरीद रहे हैं.
9. रेलवे – मार्केट रेट पर टिकट के दाम पे कर रहे हैं. रेलवे की ऐसी 2nd क्लास धीरे धीरे हवाई जहाज के किराए के समकक्ष पहुंच गया है.

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अगर इसको एक लाइन में कहें तो रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य , यात्रा, बिजली ,पानी, सड़क इन तमाम बुनियादी सुविधाओं को आप पूरी तरह अपने खर्चे से पे कर रहे हैं, तो सवाल यह है कि हम सरकार को टैक्स क्यों दे रहे हैं, सरकार हमारे टैक्स का पैसा कहां इस्तेमाल कर रहि है.  सिर्फ पुलिस, ज्यूडिशरी, सेना ये तीन क्षेत्र हैं जिस पर सरकार खर्च कर रही है.

जिसमें पुलिस और ज्यूडिशरी की सेवाएं आम आदमी के पहुंच से पहले ही काफी दूर हो गयी है, और यह बस अब डराने का काम करता है.
सेना एक जरुरी खर्च है मगर उस खर्चे का कितना हिस्सा सही  है, आम सैनिकों के हालात, रक्षा सौदों का गड़बड़ झाला तथा उससे जुड़ी अन्य चीजों की पोल खुलती रहती है.

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कुल मिलाकर हमारा टैक्स का पैसा नागरिक सुविधाओं के रूप में हम तक नही पहुंच रहा. और उससे भी जरूरी बात यह है कि हमें कोई फर्क नहीं पड़ रहा. क्योंकि अभी हम राम रहीम एवं सरकार के द्वारा तमाम बनाए हुए एजेंडे में खोए हैं, मगर एक कसक अंदर ही ही अंदर सब के अंदर है, जो आज ना कल बाहर आनी ही है, बस अब देखना यह है कि आखिर कितना वक्त लगता है.

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