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मृतक सुमित पटेल को इंसाफ और मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर उतरा कुर्मी स्वाभिमान महासंघ

नई दिल्ली/लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो

प्रदेश में सीएम योगी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद दलितो ं, पिछड़ोंं और अल्पसंख्यकों पर होने वाले अपराधों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती चली जा रही है। अपराध पर लगाम कसने में नाकाम यूपी पुलिस अपराध हो जाने के बाद भी मामले को जाति के चश्मे से देखकर कार्रवाई कर रही है। रायबरेली की ही दो घटनाएं इसकी उदाहरण हैं-

सुमित पटेल और उसके चाचा को गोली मारने के मामले में आरोपी ठाकुर जाति के ससुर और दामाद को प्रशासन ने पहले आत्मरक्षा की बात कहकर बचाने का प्रयास किया फिर  मृतक के छोटे भाई समेत परिजनों को थाने उठा लाई। काफी दिनों तक सुमित के परिजनों को पुलिस परेशान करती रही। बाद में सुमित पक्ष के ही कई लोगों को जेल भेज दिया।

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रायबरेली के ही दूसरे मामले में ग्राम प्रधान रामश्री यादव के घर पर हमला करने आए लोगों के जलकर मरने की घटना में पांचों हमलावरों को ब्राह्मण समाज का प्रतीक पुरुष बनाकर पेश किया गया। इस मामले में ग्राम प्रधान रामश्री यादव के पति और बेटों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस तरह के मामलों से कुर्मी-यादव समेत पूरे ओबीसी समाज में आक्रोश व्याप्त है। फर्क इतना है कि कोई सोशल मीडिया पर लिखकर तो कई सड़क पर उतरकर अपने आक्रोश को व्यक्त कर रहा है।

कुर्मी स्वाभिमान महासंघ का प्रदर्शन- 

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कुर्मी स्वाभिमान महासंघ के बैनर तले शुक्रवार को रायबरेली जिले के महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के हलोर गांव के सुमित पटेल के परिजनों को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर डीएम रायबरेली को ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान कुर्मी महासंघ की प्रदेश संयोजिका कुर्मी साधना सिंह के नेतृत्व में जिला युवा संयोजक अभिषेक चौधरी व जिला संयोजक शिवधारी पटेल व अन्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये व घायल चाचा के इलाज के लिए 10 लाख रुपये आर्थिक मदद दिलाने की मांग की।

सुमित के पिता के पास सिर्फ दो बीघा जमीन-  

कुर्मी साधना सिंह ने बताया कि मृतक सुमित एक किसान का बेटा था और बीएससी का होनहार छात्र था । सुमित के पिता के पास मात्र 2 बीघा जमीन है। उन्होंने कहा कि सुमित की मौत के बाद पूरा परिवार भुखमरी की कगार पर आ गया है। इसलिए महासंघ की मांग है कि सरकार मृतक के परिजनों को आर्थिक मदद के साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नोकरी की भी व्यवस्था करे। इसके अलावा घर में एक बहन है जिस के पैर में दिक्कत है उसके विवाह के लिए भी सरकार आर्थिक मदद दे।

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क्या था मामला- 

महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के हलोर निवासी 18 वर्षीय सुमित पटेल उर्फ शुभम चौधरी पुत्र जगत नारायण पटेल बीएससी का छात्र था. सुमित अपनी बहन शालिनी को गुरुकुल महाविद्यालय छोड़ने बाइक से जा रहा था. पीछे से लालगंज कोतवाली क्षेत्र के सेमरपहा गांव निवासी संजीव कुमार सिंह एक अन्य व्यक्ति के साथ कार से आया और पीछे से सुमित की बाइक में टक्कर मार दी जिससे उसकी बहन गिरकर घायल हो गई. सुमित के विरोध जताने पर संजीव सिंह ने उसके साथ गालीगलौच करते हुए मारपीट कर दी. इतना ही नहीं सुमित पटेल को पकड़कर संजीव सिंह अपने ससुर दान बहादुर सिंह के घर पहुंच गया.

सुमित के घर के लोगों को पता लगने पर सुमित के चाचा और भाई दान बहादुर के घर पहुंचे. यहां फिर जातीय ठसक दिखाते हुए सुमित के चाचा और भाई के साथ संजीव सिंह, दानबहादुर सिंह और जगत बहादुर सिंंह ने गाली गलौच और मारपीट की  और लोहे की रॉड सुमित पटेल से सर पर मार दी. गुस्से में सुमित के परिवार के लोगों ने भी हाथापाई करने की कोशिश की तो दानबहादुर बोला गोली मार दो सालों को. जातीय मद में चूर संजीव सिंह घर के भीतर गया और रिवाल्वर लाकर फायरिंग कर दी. जिसमें सुमित पटेल की गोली लगने से मौत हो गई और सुमित के चाचा श्रीनिवास पटेल बुरी तरह घायल हो गए।

पढ़ें पूरी खबर- सुमित पटेल को गोली मारने वाले सिंहों के बचाव में उतरी योगी पुलिस, सुमित पटेल के परिजनों को जेल में ठूंसा

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