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रायबरेली में मारे गए हमलावरों को अपराधी कहते ही ब्राह्मण संगठन बने स्वामी प्रसाद मौर्य के दुश्मन

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

बीते दिनों यूपी के रायबरेली जिले के इटौरा गांव के प्रधानपति रामश्री यादव की हत्या के इरादे से आए पांच बदमाशों की भागते समय बिजली के खम्भे से गाड़ी टकराने से जलकर मौत हो गई। इस हमले में मारे गए 5 ब्राह्मणों को अपराधी कहना योगी सरकार कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या को भारी पड़ गया। इस समय सर्व ब्राह्मण महासभा, सनातन ब्राह्मण महासभा और हिन्दूू के नाम से बने तमाम ब्राह्मण संगठन स्वामी प्रसाद मौर्या के इस्तीफे की मांग करते हुए जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं।

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क्या कहा था स्वामी प्रसाद मौर्या ने- 

योगी सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा था कि गांव में घुसे पांचो हमलावर अपराधी किस्म के थे और ग्राम प्रधान की हत्या करने आऐ थे। जब इन हमलावरों ने ग्राम प्रधान के घर पर गोलीबारी शुरू की तो गोली चलने की आवाज सुनकर गांव वाले इकट्ठे हो गए और हमलावरों को दौड़ा लिया। भागते वक्त इन बदमाशों की गाड़ी बिजली के खम्भे से टकरा गई , जिससे जलकर पांचों बदमाशों की मौत हो गई। इस मामले में निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है।

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सवाल तो ये है कि सहारनपुर की घटना के समय हिन्दू संगठन कहां थे ?

स्वामी प्रसाद मौर्या ने इटौरा की घटना को लेकर वही बयान दिया जो पूरा गांव दे रहा है। लेकिन रायबरेली और आस-पास के विभिन्न ब्राह्मण संगठनों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। ब्राह्मण महासभा, परशुराम सेना, सर्व ब्राह्मण महासभा, परशुराम सेवादल और तमाम  हिन्दू के नाम से बने ब्राह्मण संगठन स्वामी प्रसाद मौर्य के विरोध में उतर आए पुतला फूंका।

बड़ा सवाल ये है कि खुद को हिन्दू का हिमायती कहने वाले संगठन दलितों या पिछड़ोंं के साथ होने वाली घटना पर कहां चले जाते हैं। ब्राह्मण समाज के साथ घटना घट गई तो रामजन्मभूमि न्यास के पूर्व अध्यक्ष रामविलास वेदांती हिन्दु का चोलकर ब्राह्मण बनकर मरने वालों के गांव तक गए। ऐसे तमाम संगठन जो हिन्दू बने रहते हैं ब्राह्मण समाज की बात आते ही तुरंत जातीयता ओढ़ लेते हैं।

ब्राह्मण संगठन आए तो यादव सेना आना स्वाभाविक है- 

यादव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार यादव ने सत्य के पक्ष में खड़े होने के लिए दिया स्वामी प्रसाद मौर्या का आभार प्रकट किया और योगी सरकार के पुलिस प्रशासन पर इटौरा की घटना में निर्दोष यादव जाति के लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। शिवकुमार यादव ने इस मामले में यादव, ब्राह्मण व अन्य जाति के पांच बुद्धजीवियों का एक संयुक्त जांच दल बनाने की मांग की ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस प्रशासन और अधिकारियों की जांच पर कोई भरोसा नहीं है।

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पूरा प्रशासन ब्राह्मण जाति के प्रभावशाली लोगों के दबाव में काम कर रहा है। यादव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार यादव ने इस मामले में सपा विधायक मनोज पांडे और कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी पर जातीय दंगा भड़काने की साजिश का आरोप भी लगाया। इसके अलावा प्रशासन यादवों को  इटौरा के आस-पास किसी भी तरह की कोई जनसभा करने की भी इजाजत नहीं दे रहा है। कुल मिलाकर आस-पास के ब्राह्मण नेताओं की शह पर यादवों के खिलाफ जातीय युद्ध छेड़ने की पूरी तैयारी चल रही है।

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