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सीखो इनसे: कांग्रेस के तिवारी, SP के पांडेय और BJP के पाठक, तीनों नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर हमलावर

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में पांच ब्राह्मण हमलावरों को अपराधी कहते ही कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ब्राह्मण महासभा समेत ब्राह्मण नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। समाजवादी पार्टी के स्थानीय विधायक मनोज पांडेय, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और अब बीजेपी के कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक तीनों ब्राह्मण नेताओं के निशाने पर इस समय कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य का कसूर बस इतना है कि रायबरेली में मारे गए हमलावरों को इन्होंने अपराधी बता दिया था। जिस बात की पुष्टि प्रतापगढ़ के थानों से मिली रिपोर्ट भी करती है। रिपोर्ट के अनुसार घटना में मारा गया प्रमोद तिवारी का करीबी रोहित शुक्ला अपराधी था उस पर प्रतापगढ़ के अलग-अलग थानों में 8 मुकदमे दर्ज हैं।

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ब्राह्मण नेता इसे ब्राह्मण बनाम यादव बनाने पर तुले हैं-

गौरतलब है कि मारे गए लोगों को ब्राह्मण नेता, ब्राह्मण समाज के सभ्य लोग बताकर मामले को ब्राह्मण बनाम यादव बना रहे हैं। इस मामले में स्वामी प्रसाद मौर्य और कांग्रेस के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह के बयानों के बाद यूपी की सियासत गरमाने लगी है। इस मामले में अब सत्ता पक्ष के ही दो बड़े मंत्री आमने-सामने हैं. योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य जहां आज भी पांचों मृतकों को हमलावर और अपराधी बता रहे हैं, वहीं कानून मंत्री बृजेश पाठक ने इशारों-इशारों में कैबिनेट मंत्री मौर्य पर ही कार्रवाई की बात कह दी.

क्या कहा था स्वामी प्रसाद मौर्य ने- 

योगी सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा था ‘अगर कोई मारने आएगा तो उसकी आरती नहीं उतारी जा सकती.’ । गांव में घुसे पांचो हमलावर अपराधी किस्म के थे और ग्राम प्रधान की हत्या करने आऐ थे। जब इन हमलावरों ने ग्राम प्रधान के घर पर गोलीबारी शुरू की तो गोली चलने की आवाज सुनकर गांव वाले इकट्ठे हो गए और हमलावरों को दौड़ा लिया। भागते वक्त इन बदमाशों की गाड़ी बिजली के खम्भे से टकरा गई , जिससे जलकर पांचों बदमाशों की मौत हो गई। इस मामले में निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है।

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मौर्य के इस बयान पर बिफ़रते हुए बृजेश पाठक ने कहा कि साजिश के तहत आरोपियों को बचाने का प्रयास हो रहा है और हत्यारों को बचाने में शामिल लोगों पर भी कार्रवाई होगी. इन बयानों से साफ है कि योगी सरकार के दोनों कैबिनेट मंत्री इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं.

पूरे में मामले में सपा, कांग्रेस और बीजेपी के ब्राह्मण नेता एक- 

अब पूरे मामले में कांग्रेस से राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी, सपा विधायक मनोज पांडेय और अब बीजेपी के कानून मंत्री बृजेश पाठक स्वामी प्रसाद मौर्य को विलेन साबित करने पर तुले हैं। इस मामले में इन नेताओं के द्वारा मामले को पीछे से तूल देकर ब्राह्मण बनाम यादव बनाने की बात सामने आ रही है।

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8 मुकदमों में नामित रोहित शुक्ला को प्रमोद तिवारी बता रहें हैं शरीफ- 

सवाल यहां से उठता है कि प्रमोद तिवारी रोहित शुक्ला के ऊपर कई थानों में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी उसे शरीफ आदमी क्यों बता रहे हैं? इसकी जांच-पड़ताल करने पर पता चलता है कि रोहित शुक्ला प्रमोद तिवारी के लिए काम करता था। वह प्रमोद तिवारी का गुर्गा था। लोगों को पकड़कर लाना और उसको प्रमोद तिवारी के पक्ष में काम करने के लिए मजबूर करने का काम रोहित शुक्ला करवाता था। यही वजह है कि प्रमोद तिवारी रोहित शुक्ला के साथ खड़े हैं। आप खुद देखिए मारे गए रोहित शुक्ला के ऊपर 8 मामले दर्ज हैं-

मारे गए बदमाश रोहित शुक्ला का आपराधिक रिकार्ड

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रोहित और अन्य लोग इटौरा गांव में रात को क्या कर रहा था-

यदि रोहित शुक्ला अपराधी प्रवृत्ति का नहीं था, तो वह भारी मात्रा में कारतूस लेकर  इटौरा गांव क्यों गया। उसने जो फायरिंग की है, उसके निशान राजा यादव के घर की दीवारों पर आज भी मौजूद हैं। पुलिस यदि इस मामले को गंभीरता से ले, तो कई और राज खुल सकते हैं। देर रात दूसरे जिले से यदि लोग आकर किसी गांव में फायरिंग करेंगे तो वह बदमाश नहीं तो क्या थे। स्थानीय लोग यह भी बताते हैं जब गाड़ी में आग लगी थी, तो कारतूस काफी देर तक जलता रहा।

विधायक मनोज पांडेय की संदिग्ध भूमिका- 

गांव वाले बताते हैं कि घटना की सूचना स्थानीय विधायक मनोज पांडे को जैसे ही लगी। ब्राह्मण होने के नाते उन्होने इस संबंध मे अपने परिचित इंस्पेक्टर (नाम नहीं छाप रहा हूँ) से बात करके सारे केस को अपने पक्ष मे मोड़ लिया। नेशनल जनमत ने पूछा कि ऐसा उन्होने क्यों किया ? वे तो सपा के विधायक हैं, अभियुक्त यादव समाज के लोग हैं। जो सपा के वोटर समझे जाते हैं।

इस बात पर गांव के लोगों ने कहा कि क्षेत्रीय विधायक मनोज पांडे की उपेक्षा और गांव के मसले में अनावश्यक हस्तक्षेप करने के कारण इस गांव के लोग बेहद नाराज थे, इसलिए उन्होने भाजपा के पक्ष मे मतदान किया था। दूसरा जिनसे विवाद था प्रधान का वो सभी ब्राह्मण थे तो विधायक जी अपनी जाति का धर्म निभा रहे हैं। इसी कारण उन्होने थाने पर दवाब बनवा कर ग्राम प्रधान के पति और उनके बेटों को गिरफ्तार करवा दिया।

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कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह कह चुके हैं मारे गए लोगों को अपराधी- 

कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के अलावा रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह ने भी कहा था कि कि मारे गए लोग आपराधिक प्रवृत्ति के थे औऱ निर्दौष यादवों को फंसाया जा रहा है। लेकिन योगी सरकार ने ब्राह्मण महासभा के दबाव में फिलहाल इटौरा गांव के ग्राम प्रधान समेत कई यादव जाति के लोगों को संगीन धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पहले मीडिया ने भी सही रिपोोर्टिंग की थी बाद में जातिवाद के एंगल से मामले को देखने लगे- 

मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या और कांग्रेस नेता ठाकुर अखिलेश सिंह के अलावा शुरूआत में कई अखबारों ने घटना के अगले दिन इसी तरह की रिपोर्टिंग भी की थी, लेकिन दबंगों का दवाब बढ़ने पर पत्रकारिता को रौंद दिया गया। अब इसी घटना को यादव बनाम ब्राह्मण बनाकर पेश किया जा रहा है।

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