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स्टेशन बेचने के बाद आरक्षण खात्मे की ओर ‘प्रभु’ का अगला कदम, खत्म होंगे 10 हजार 900 पद

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

देश से आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म करने की तरफ केन्द्र सरकार बहुत आहिस्ता से कदम बढ़ा रही है. रेलवे स्टेशन के निजीकरण के बाद अब सरकार डी श्रेणी के पदों पर चाबुक चला रही है, क्योंकि डी श्रेणी में ही सबसे ज्यादा ओबीसी-एससी-एसटी के कर्मचारी भर्ती होते हैं. इस बारे में आरडीएसओ के पदाधिकारियों ने सीधे तौर पर केन्द्र सरकार को आरक्षण विरोधी बताते हुए आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है.

देश की अर्थ व्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई और खर्चे में कटौती के नाम पर अब मोदी सरकार मनमानी करने पर तुली है.रेल मंत्रालय से पुख्ता खबर ये है कि अब विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क वाला भारतीय रेलवे 10 हजार 900 पदों को खत्म ही करने जा रहा है. जिसका सबसे ज्यादा सीधे तौर पर गरीबों तबके पर पड़ेगा क्योंकि ये सभी डी कैटेगरी के पद हैं.

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खर्चों पर कटौती करने का बहाना- 

रेल मंत्रालय ने खर्चों पर लगाम लगाने का हवाला देते हुए सभी 17 जोन में 10 हजार 900 पद खत्म करने का फैसला लिया है. केंद्रीय रेल बोर्ड ने जोन महाप्रबंधकों को उनके यहां घटाए जाने वाले पदों की संख्या भेज दी है. 25 मई को जारी केंद्रीय रेल बोर्ड के निदेशक (ई एंड आर) अमित सरन के इस आदेश से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। इसको देखते हुए रेल प्रशासन इसे सामान्य प्रक्रिया बताने में जुटा है। कहना है कि समीक्षा के बाद तय किया गया है कि सैकड़ों अनुपयोगी या कम जरूरी पद हैं, जिनके खत्म होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पहले चरण में 10 हजार पद चिन्हित किए गए हैं। हालांकि संख्या कई गुना ज्यादा है.

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किस जोन में कितने पद घटेंगे-

बोर्ड ने सेंट्रल व ईस्टर्न रेलवे से 1-1 हजार पद, ईस्ट सेंट्रल रेलवे से 300, ईस्ट कोस्ट रेलवे से 700, नॉर्दन रेलवे 1500, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे 150, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे 700, नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे 300, नॉर्थ ईस्टफ्रंटियर रेलवे से 550 पद खत्म करने कहा है। इसी तरह सदर्न रेलवे से 1500, साउथ सेंट्रल रेलवे 800, साउथ ईस्ट सेंट्रल व साउथ ईस्टर्न रेलवे 400-400, साउथ वेस्टर्न रेलवे 200, वेस्टर्न रेलवे 700, वेस्ट सेंट्रल रेलवे से 300 पद सरेंडर करवाए जाएंगे.

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पूरे देश में तकरीबन ढाई पद खाली हैं रेलवे में-

पूरे देश में इस समय भी तकरीबन ढाई लाख पद खाली हैं जिनमें से डेढ़ लाख के करीब पद अकेले रेलवे सुरक्षा से जुड़े हुए हैं. कर्मचारी यूनियन के नेताओं को कहना है कि भर्ती हो नहीं रही है रिटायरमेंट होते जा रहे हैं. ऐसे में पहले से ही कर्मचारियों की कमी सेे जूझ रहे रेलवे को इस फैसले को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ेगा. रेलवे सुरक्षा में तो कमी आएगी ही बेरोजगारी भी बढ़ेगी.

ऑल इंडिया ओबीसी रेलवे इंप्लाइज एसोसिएशन के महामंत्री चंद्रशेखर यादव के अनुसार सरकार आरक्षण खत्म करने के लिए इस तरह के हरकतें कर रही है. इसकी शुरूआत रेलवे स्टेशन के निजीकरण से की गई.  अब ऐसे पद खत्म किए जा रहे हैं जहां ओबीसी-एससी कर्मचारी सबसे ज्यादा भर्ती होते हैं.

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इस तरह घटेंगे पद-

अगर किसी मंडल में ट्रैकमैन के सौ पद स्वीकृत हैं। इनमें 80 नियुक्त और 20 पद खाली हैं तो 20 पदों को खत्म कर दिया जाएगा। अधिकारियों को मौजूदा व्यवस्था में काम चलाने कहा जाएगा।

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