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भाषा विज्ञानी व बौद्ध परंपरा के विद्वान डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह को मिला साहित्य सम्मान

नई दिल्ली/पटना। नेशनल जनमत ब्यूरो 

मगही और हिंदी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मगही और भोजपुरी के साहित्यकार, बौद्ध दार्शनिक, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भाषा वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह और राजकुमार प्रेमी को सोमवार को पटना में डॉ. राम प्रसाद सिंह साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया।

पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस में मगही साहित्य अकादमी गया की ओर से आयोजित समारोह में बिहार सरकार के स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने दोनों साहित्यकारों को सम्मानित किया। उन्हें सम्मान स्वरूप 7500 रुपए नकद, प्रशस्ति पत्र, अंग-वस्त्रम और बुद्ध की प्रतिमा भेंट की गई।

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इस मौके पर मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि मगही भाषा और साहित्य के विकास और प्रचार प्रसार में डॉ. राम प्रसाद सिंह का अमूल्य योगदान रहा है। मगही अकादमी के सचिव प्रो. उपेंद्र नाथ वर्मा ने कहा कि अकादमी प्रत्येक वर्ष भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले साहित्यकारों को सम्मानित करती है।

इस अवसर पर मगही भाषा की दो पुस्तकों राम रतन प्रसाद सिंह की विविधा और रिंकी कुमारी अज्ञानी के कविता संग्रह नियति का विमोचन भी किया गया। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल सुलभ ने अगले वर्ष से डॉ. राम प्रसाद सिंह के नाम पर हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से एक पुरस्कार देने की घोषणा की। इस अवसर पर कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्राचार्य प्रो. बबन सिंह, प्रो. शिवजतन ठाकुर, डॉ. भूपेंद्र नाथ वर्मा आदि मौजूद थे।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह का साहित्य सफर- 

अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त भाषावैज्ञानिक, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पी-एच.डी.। वर्तमान में वी के एस विश्वविद्यालय के अन्तर्गत सासाराम स्थित एसपी जैन पीजी कॉलेज में हिन्दी विभाग में प्रोफेसर हैं।

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प्रकाशित कृतियाँ:

भाषा का समाजशास्त्र, भारत में नाग परिवार की भाषाएँ, भोजपुरी के भाषाशास्त्र, भोजपुरी व्याकरण, शब्दकोश आ अनुवाद के समस्या, हिन्दी साहित्य का सबाल्टर्न इतिहास, हिन्दी साहित्य प्रसंगवश। सम्पादित पुस्तकें: कहानी के सौ साल: चुनी हुई कहानियाँ, काव्यतारा, काव्य रसनिधि, दलित साहित्य का इतिहास-भूगोल, भोजपुरी-हिन्दी-इंग्लिश लोक शब्दकोश, पिचानवे भाषाओं का समेकित पर्याय शब्दकोश, साहित्य में लोकतंत्र की आवाज।

अंग्रेजी में अनूदित पुस्तकें: दि रि-राइटिंग प्रॉब्लम्स ऑव भोजपुरी ग्रामर, डिक्शनरी एंड ट्रांसलेशन, लैंग्वेजेज ऑव नाग फैमिली इन इंडिया।

इग्नू की पाठ्य पुस्तकें: भोजपुरी भाषा और लिपि, भोजपुरी व्याकरण, भोजपुरी अनुवाद।

मॉरीशस सरकार के विशेष अतिथि एवं वहाँ सात दिवसीय व्याख्यान, बी.बी.सी. लन्दन तथा एम.बी.सी., पोर्ट लुई सहित देश के कई आकाशवाणी केन्द्रों से साक्षात्कार एवं वार्ताएँ प्रसारित।

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कई राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों एवं कार्य-शालाओं में सहभागिता तथा व्याख्यान।

भाषा विज्ञान के क्षेत्र में बेहतर काम के लिए बिहार सरकार द्वारा भाषा वैज्ञानिक के रूप में डॉ. ग्रियर्सन पुरस्कार मिला। 

 

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