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बेटी राजकुमारी कुशवाहा के लिए खुशी के पल, मेजर ध्यानचंद को जल्द मिलेगा भारत रत्न !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

मेजर ध्यान चंद की बेटी राजकुमारी कुशवाहा और उनके बेटे ओलंपियन अशोक ध्यानचंद समय समय पर पिता मेजर ध्यान चंद को सरकार द्वारा भारत रत्न न दिए जाने पर नाराजगी जताते रहे हैं . हाल ही में देश के जाने माने बाँसुरी वादक और पद्म विभूषण हरिप्रसाद चौरसिया ने हाल ही में सचिन को भारत रत्न दिए जाने पर सवाल खड़ा करते हुए मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग की थी. लगता है सरकार ने अब लोगों की मांग को देखते हुए इस मांग को पूरा करने का मन बना लिया है.

खेल मंत्री ने पीएम को लिखा है पत्र-

“केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर भारतीय हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी रहे मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग की है। खेल मंत्री ने कहा कि इस मगोयल ने कहा कि ध्यान चंद को भारत रत्न दिए जाने से न सिर्फ भारतीय हॉकी बल्कि अन्य खेलों को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। महान खिलाड़ी को यह सम्मान दिया जाना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। गोयल ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री को ही आखिरी फैसला लेना है।”

कांग्रेस के समय में भी उठी थी मांग तब सचिन को मिला था-

हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब खेल मंत्रालय ने ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग की है. इससे पहले 2013 में यूपीए सरकार के दौरान भी खेल मंत्रालय ने यह मांग की थी. हालांकि उस साल क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को उनके अंतररराष्ट्रीय करियर से संन्यास लेने वाले दिन ही भारत रत्न देने की घोषणा की गई थी. खैर इस बात उम्मीद ज्यादा है और प्रधानमंत्री इस फैसले से चुकेंगे नहीं.

कई हॉकी खिलाड़ी धरना दे चुके हैं- 

गौरतलब है कि ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार और अन्य अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी वर्षों से हॉकी के हीरो को भारत रत्न देने की मांग कर रहे हैं। पिछले साल इस मांग को लेकर पूर्व भारतीय कप्तान अशोक कुमार, अजीत पाल सिंह, जफर इकबाल, दिलीप तिर्की के अलावा सौ से अधिक खिलाड़ी धरने पर भी बैठे थे। 2011 में भी 82 सांसदों ने ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग की थी। भारतीय हॉकी को अलग पहचान दिलाने वाले ध्यानचंद को जन्म 29 अगस्त को हुआ था और इस दिन को खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। (एजेंसी)

हरिप्रसाद चौरसिया ने क्या कहा था- 

जयपुर में  संगीत संध्या में बोलते हुए हरिप्रसाद चौरसिया ने कहा कि खेल से जुड़े एक बच्चे को भारत रत्न देने से इसका महत्व कम हुआ है. भारत रत्न केवल उन लोगों को दिया जाना चाहिए जिन्होंने जीवन भर कला की साधना की हो. और अगर सरकार को खेलों में ही किसी को भारत रत्न देना था तो मेजर ध्यान चंद को दिया जाना चाहिये था।.

झाँसी सांसद उमा भारती ने किया था वादा–

गौरतलब है कि बुंदेलखंड के झांसी निवासी मेजर ध्यान चंद ने सन् 1928, 1932 और 1936 के ओलम्पिक खेलों में भारत को हॉकी का स्वर्ण पदक जिताने में प्रमुख भूमिका अदा की थी. झाँसी में रह रहे उनके पुत्र उमेश कुमार सिंह जो रेलवे से सेवानिवृत्त हैं .नेशनल जनमत से बातचीत में कहते हैं की सांसद का चुनाव लड़ने के दौरान केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने घोषणा की थी की सरकार बनते ही मेजर ध्यानचंद कॊ भारतरत्न दिलायेंगे. अब तो उनकी सरकार भी हैं देखते हैं क्या होता है ? कई लोग आए और वायदे किये लेकिन दद्दा कॊ उनका सम्मान अभी तक किसी ने नहीँ दिलाया. अब देखते हैं कब तक घोषणा होती है.

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