AIIMS में भ्रष्टाचार: आरटीआई से नाराज मिश्रा जी,राजनारायण यादव पर दो करोड़ का मानहानि केस

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

देश के सबसे प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान यानि एम्स नई दिल्ली में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खोलने और आरक्षण की लड़ाई लड़ने वाले आरटीआई कार्यकर्ता राजनारायण पर दो करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया है. दिल्ली हाईकोर्ट में ये  मुकदमा एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने अपनी सेवानिवृत्ति के तुरंत पहले दर्ज कराया है.

इसको अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए आरटीआई कार्यकर्ता राजनारायण ने  कहा कि भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए मेरी ऊपर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया है. लेकिन मैं एम्स में फैले भ्रष्टाचार का सच लोगों के सामने लाकर रहूंगा. उन्होंने कहा कि डॉ. एमसी मिश्रा को मुझसे दिक्कत होने की वजह सिर्फ आरटीआई नहीं बल्कि उनकी जातिवादी मानसिकता भी थी.

एमसी मिश्रा ने राजनारायण के एम्स में प्रवेश पर लगा दी थी रोक- 

इससे पहले फरवरी महीने में अपने निदेशक रहते हुए डॉ. एमसी मिश्रा ने जनहित अभियान के संयोजक राजनारायण के एम्स परिसर में प्रवेश करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. प्रशासन ने पूरे एम्स परिसर में करीब 50 से ज्यादा जगहों पर यह नोटिस लगाया था.

दलित डॉक्टर को निकालने का किया था विरोध- 

राजनारायण ने एम्स के दलित असि. प्रोफेसर ‎कुलदीप कुमार‬ को निकाले जाने के जातिवादी षड्यंत्र को चुनौती दी थी. वे एम्स की प्रोफेसर नावर को प्रताड़ित किए जाने के खिलाफ भी मुहिम चला रहे थे. इसके लिए वो अनुसूचित जाति आयोग में केस भी जीत चुके थे.

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