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राजस्थान उपचुनाव: बदलाव की आहट, अपने ही गढ़ में बुरी तरह हारी BJP, तीनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

बीजेपी शासित राजस्थान की तीनों सीटों पर बीजेपी की हार पार्टी आलाकमान के लिए खतरे की घंटी है। दूसरी तरफ परिणामों से कांग्रेस उत्साहित है और इसे 2019 की झलक बता रही है।

राजस्‍थान उपचुनाव में बाजी कांग्रेस के हाथ लगी है। अलवर सीट से कांग्रेस उम्‍मीदवार करण सिंह यादव ने भाजपा के जसवंत सिंह यादव को 1,56,319 वोट से हरा दिया है।

अजमेर में भी कांग्रेस के रघु शर्मा ने जीत दर्ज की है।इसके अलावा मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक धाकड़ ने भाजपा के शक्ति सिंह को 12,976 मतों से हरा दिया है।

हालांकि पूर्व में अजमेर लोकसभा क्षेत्र से में कांग्रेस के रघु शर्मा को भाजपा के राम स्वरूप लांबा से चुनौती मिल रही थी, लेकिन बाद भाजपा उम्मीदवार पिछड़ गया। राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

कांग्रेस पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उपचुनाव के ये नतीजे 2019 लोकसभा चुनाव की झलक हैं। गहलोत ने संवाददाताओं से कहा, “यह उपचुनाव भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ हैं।” वहीं उप चुनाव नतीजें आने के बाद भाजपा ने अपनी हार स्वीकार कर ली है।

सूबे की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्विटर पर उन्होंने लिखा है, ‘जनता की सेवा का जो प्रण चार साल पहले लिया था, उसे पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में जो फैसला जनता दिया है वह सिर आंखों पर।’

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की जीत- 

दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने नोआपारा विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर ली। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा नंबर दो की पार्टी बनकर उभरी है और कांग्रेस बुरी तरह से पिछड़कर चौथे स्थान पर है।

नोआपारा में कांग्रेस विधायक मधुसूदन घोष के निधन के कारण उपचुनाव हुआ। यहां तृणमूल के सुनील सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के संदीप बनर्जी को 63,000 से ज्यादा मतों से मात दी। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की उम्मीदवार गार्गी चटर्जी तीसरे स्थान पर रहीं।

कांग्रेस चौथे स्थान पर रही और उसकी जमानत जब्त हो गई। उलुबेरिया लोकसभा सीट पर तृणमूल की सजदा अहमद ने ने भाजपा के अनुपम मलिक से 4,07,270 मतों से हरा दिया। यह सीट सजदा के पति सुल्‍तान अहमद के निधन के बाद खाली हुई थी।

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