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“PCS सेवा में रहते हुए राकेश पटेल ने ‘नदियां बहती रहेंगी’ के माध्यम से अदम्य साहस का परिचय दिया है”

लखनऊ। नीरज भाई पटेल ( नेशनल जनमत) 

सामाजिक न्याय विचारधारा के युवा कवि, कहानीकार राकेश पटेल ‘कबीर’ के प्रथम कविता संग्रह ‘नदियां बहती रहेंगी’ का विमोचन रविवार को लखनऊ के कैफी आज़मी समागार में हुआ।

इस मौके पर देश भर से बुद्धिजीवी, लेखक, कवि, रचनाकार व सामाजिक चिंतक उपस्थित हुए। राकेश पटेल उत्तर प्रदेश पीसीएस सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में सीतापुर के सिटी मजिस्ट्रेट पद पर तैनात हैं।

प्रख्यात कवि नरेश सक्सेना ने इस मौके पर कहा कि कविता लिखना बहुत खतरनाक काम है। आप कविता लिखते हैं और उसमें सत्तासीन लोगों के बारे में कुछ हुआ तो आप खतरे में भी पड़ सकते हैं। ऐसा युग है कि घर से निकले तो पता नहीं वापस लौटेंगे या नहीं।

युवा कवि राकेश पटेल को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि आप सरकारी सेवा में रहते हुए जनता के हित की बात लिख ले रहे हैं मेरी शुभकामनाएं हैं कि आप ऐसे ही लिखते रहिए क्योंकि सरकार को पसंद ना आने वाले लेखक जेल भी खूब जा रहे हैं।

सुनिए राकेश पटेल के साथ नेशनल जनमत की खास बात- 

जाने माने कवि स्वपनिल श्रीवास्तव ने पुस्तक पर टिप्पणी करते हुये कहा कि राकेश कबीर द्वारा रचित कविताएं गांव के हालात को बयान करने में बहुत ही सहायक हैं। राकेश कबीर अपनी कविताओं में लोकजीवन के बहुत ही नजदीक जाते हैं।

वहीं प्रसिद्ध गजलकार, आलोचक मूलचन्द सोनकर ने ‘लेखन के क्षेत्र से लेकर समाज के हर क्षेत्र में फैले जातिवाद पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राकेश की कविताएं अपना सरोकार फुले, अंबेडकर और मार्क्स की संघर्ष परंपरा से जोड़ती प्रतीत होती हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कथाकार व पूर्व वाणिज्यकर अधिकारी शिवमूर्ति ने कहा कि राकेश के पास साफ सुथरी दृष्टि है और सरोकार है। एक लेखक और कवि में ये दोनों चीजें महत्वपूर्ण हैं। राकेश कबीर में ये दोनों बाते हैं इसलि वो आगे भी साहित्य की सीढ़िया चढ़ते जाएंगे।

इस दौरान प्रमुख साहित्यकार औऱ कवियों में कौशल किशोर, सुभाष राय, आरटीओ एवं लेखक सुभाष चंद्र कुशवाहा, डॉ. रामकठिन सिंह, कौशल कुमार मधुकर, बीआर विप्लवी औऱ विभाष कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे।

नदियां बहती रहेंगी पुस्तक का आवरण चित्र बनाने वाले वरिष्ठ चित्रकार डॉ. लाल रत्नाकर ने किसी भी पुस्तक के कवर और अंदर के पन्नों पर चित्रकारी को एक अपने मन की बात कहने का एक जरूर माध्यम बताया। संचालन गांव के लोग पत्रिका के संपादक रामजी यादव ने किया।

अन्य प्रमुख लोगों में सीडीओ कानपुर देहात केएन सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमरेश पटेल, राहत अधिकारी अदिति उमराव, डीआईओएस भगवत प्रसाद पटेल, जनाधार संगठन के संयोजक वीपी सिंह।

सचिवालय में अंडर सेकेट्री भारत प्रसाद उत्तम, एसडीएम मोहनलालगंज चंदन पटेल, पटेल प्रतिनिधि सभा के सेवा प्रमुख पटेल ज्ञान सिंह, पत्रकार राजेश वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता संजय वर्मा, डॉ. देवेन्द्र पटेल, डॉ. राजेश पटेल, वरिष्ठ पत्रकार शरद कटियार, नेशनल जनमत के संपादक नीरज भाई पटेल आदि मौजूद रहे।

कौन हैं राकेश कबीर- 

डॉ॰ राकेश कबीर (राकेश कुमार पटेल ) युवा कवि और कहानीकार हैं । उनकी कविताएँ , लेख और कहानियाँ हिन्दी और अंग्रेज़ी की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित और चर्चित होती रही हैं। उनकी कविताओं में सामाजिक अन्याय , रूढ़िवाद और पाखंडों का जहां तीव्र विरोध मिलता है ,वहीं श्रमजीवी समाजों के संघर्षों के प्रति गहरा राग और विश्वास पाया जाता है।

उनका जन्म महाराजगंज जिले के लक्ष्मीपुर एकडंगा गाँव के एक संघर्षशील किसान के घर हुआ। गोरखपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद वे जवाहरलाल नेहरु विश्विद्यालय चले गए, जहाँ से उन्होंने ‘भारतीय सिनेमा में प्रवासी भारतीयों का चित्रण’ विषय पर एम. फिल और ‘ग्रामीण सामाजिक संरचना में निरंतरता एवं परिवर्तन’ विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

सिनेमा, इतिहास, समाज और संस्कृति के विभिन्न आयामों पर गहरी दिलचस्पी रखनेवाले राकेश कबीर की प्रकाशित कृतियों में ‘नदियां बहती रहेंगी’ (कविता) और ‘खानाबदोश सफ़र’ (कहानी) हैं ।

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