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‘नेशनल जनमत’ की खबर का असर, केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले ने की क्रिकेट में आरक्षण की मांग

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने क्रिकेट में नेशनल जनमत की खबर का संज्ञान लेते हुए क्रिकेट में आरक्षण देने की मांग की है. आपको बता दें कि पिछले दिनों जब पाकिस्तान ने चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत को बुरी तरह हराया तो फिर नई दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से क्रिकेट में दलितों – पिछड़ों को आरक्षण देने की मांग उठी थी.

छात्रों का कहना था कि क्रिकेट मेहनत का खेल है औऱ मेहनत करना भारत की सवर्ण जातियों का वश का नहीं है. खबर लगाने के एक महीने के भीतर ही केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने क्रिकेट में दलितों एवं आदिवासियों को 25 फीसदी रिजर्वेशन देने की मांग की है.

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आपको बता दें कि भारत में सभी क्षेत्रों में आबादी के हिसाब से सभी वर्गों की भागीदारी की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो रहे हैं. क्रिकेट भी इससे अछूता नहीं है. कई सामाजिक चिंतक क्रिकेट में आरक्षण दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को आबादी के हिसाब से भागीदारी देने की मांग पहले भी कर चुके हैं.

अठावले ने कहा,क्रिकेट में आरक्षण लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने क्रिकेट के साथ अन्य खेलों में भी आरक्षण लागू करने की बात पहले भी कही थी क्योंकि इससे दलित समुदाय की प्रतिभाओं को भी खेलने का अवसर मिलेगा।

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आपको बता दें कि खेलों में आरक्षण दक्षिण अफ्रीका में लागू है। क्रिकेट में आरक्षण की नीति में साल 2016 के सितंबर माह में इसे अंतिम रूप दिया गया। दक्षिण अफ्रीकी बोर्ड ने भविष्य में होने वाली सीरीज में टीम में कम से कम छह काले खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि राष्ट्रीय टीम में गोरे खिलाड़ियों का वर्चस्व न हो। इससे 11 सदस्यों की नेशनल टीम में औसतन अधिकतम पांच गोरे खिलाड़ी और कम से कम छह काले खिलाड़ी होते हैं।

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