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ये कैसा रामराज्य ! सिपाही भर्ती में भी भेदभाव, अभ्यर्थियों के सीने पर प्रशासन ने लिख दी उनकी जाति

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

भारतीय जनता पार्टी के नेता विभिन्न प्रदेशों की भाजपा सरकारों को रामराज्य बताते नहीं थकते लेकिन तथाकथित रामराज्यों में सवर्णवाद के साथ ही दलित व पिछड़ा उत्पीड़न किसी से छुपा नहीं है।

हालिया मामला मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार का है। मध्य प्रदेश में चल रही सिपाही भर्ती के दौरान धार जिले में जाति भेद का एक शर्मनाक मामला सामने आया है।

सिपाहियों यानि कांस्टेबल के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान आरक्षित वर्ग के चयनित उम्मीदवारों के सीने पर ही उनकी जाति का नाम दर्ज कर दिया गया।

सिपाही भर्ती के लिए अभ्यर्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण चल रहा है। बता दें कि सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये 168 सेमी. और एससी-एसटी के लिये 165 सेमी. लंबाई तय है।

यहां आए उम्मीदवारों की पहचान के लिए जिला अस्पताल ने एक अनोखा तरीका अपनाया है. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के सीने पर ही उनका वर्ग दर्ज कर दिया गया है।

इस मामले में सीएमओ डॉ. आरसी पनिका ने कहा ये मुझे मालूम नहीं है इन दिनों मेडिकल चल रहा है ज़िला अस्पताल में लेकिन किसी भी कैंडिडेट के शरीर पर एससी-एसटी लिखा है तो ये गंभीर है. दोषी के खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी.

पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि नव आरक्षकों का स्वास्थ्य परीक्षण चल रहा है, पिछली बार किसी तरह की चूक हो गई थी, इसके चलते अस्पताल प्रबंधन ने ऐसा किया होगा. उसके बावजूद ऐसा क्यों किया गया, इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

इसके साथ ही उन्होंने सीने पर एससी-एसटी लिखे जाने की पुष्टि की है.

राज्य में यह इस तरह की पहली घटना नहीं है. पिछले साल राखी के वक्त भोपाल सेंट्रल जेल में बंद अपने पिता से मिलने गए दो बच्चों के चेहरे पर जेल अधिकारियों ने मुहर लगा दी थी, इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए जेल महानिदेशक से जवाब मांगा था.

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