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BJP में 48 विधायकों का आंकड़ा लगाते रहे ‘पटेल’, अमित शाह ने कर दिया फैसला CM बनेंगे विजय रूपाणी

अहमदाबाद/नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

गुजरात विधानसभा के चुनाव परिणाम आते ही सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल होना शुरू हुआ कि गुजरात में 88 पाटीदार विधायक विधानसभा पहुंचे हैं। इनमें 44 विधायक बीजेपी से और 40 विधायक कांग्रेस पार्टी से हैं।

इस मैसेज के साथ ये उम्मीद भी लगाई गई थी कि अब भारतीय जनता पार्टी को 48 पाटीदार विधायकों की वजह से मजबूरी में किसी पटेल को ही मुख्यमंत्री बनाना होगा।

इस उम्मीद का दूसरा कारण हार्दिक पटेल की बढ़ती ताकत और 2019 के चुनावों में फिर से एक बार पटेलों को समर्थन लेने की मजबूरी माना जा रहा था। लेकिन जीतने के बाद बीजेपी ने फिर से अमित शाह की पसंद और स्वजातीय विजय रुपानी के सर पर शहरा सजा दिया।

पार्टी आलाकमान ने तमाम दावों को दरकिनार करते हुए घोषित किया कि विजय रुपानी ही गुजरात के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। जबकि, नितिन पटेल राज्य के उप-मुख्यमंत्री रहेंगे।

कहने को फैसला भाजपा की विधायक दल की बैठक में लिया गया, लेकिन इस लोकतांत्रिक ढ़ाचे का सच ये भी है कि रूपाणी का नाम आलाकमान ने तय करके विधायकों पर थोप दिया है।

हार्दिक पटेल अब और मजबूत होंगे- 

गुजरात में हार्दिक पटेल का मुद्दा अब और मजबूती पकड़ेगा। हार्दिक पटेल का आंदोलन ही पटेलों की हिस्सेदारी और स्वाभिमान की पृष्ठभूमि में बड़ा हुआ। इसलिए ऐसा माना जा रहा था कि हार्दिक का कद छोटा करने के लिए बीजेपी किसी पाटीदार को मुख्यमंत्री बना देगी।

बीजेपी के अंदरुनी लोग दबी जुबान ये स्वीकार कर रहे हैं कि अमित शाह ने अपने स्वजातीय को पाटीदारों की भारी संख्या के आगे तरजीह दी है। ऐसे में हार्दिक इस मुद्दे को पाटीदारों के सम्मान से जोड़ने में सफल रहे तो 2019 में बीजपी के लिए लड़ाई आसान नहीं होगी।

म्यांमार में हुआ है जन्म- 

विजय रूपाणी का जन्म म्यांमार के रंगून (फिलहाल यंगून) में साल 1956 में एक जैन परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम रमणीक लाल है। वह राजकोट में बड़े हुए। यहां उन्होंने स्कूली दिनों में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जॉइन कर लिया था।

उन्होंने बीए और बाद में एलएलबी की डिग्री हासिल की। वह एक समर्पित आरएसएस कार्यकर्ता रहे हैं। अगस्त 2016 में आनंदीबेन के जाने के बाद वह सीएम बने थे। वह बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के नजदीकी माने जाते हैं।

जैन समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रुपानी को शीर्ष पद देकर बीजेपी आलाकमान ने अल्पसंख्यकों में भी संदेश देने की कोशिश की है ।रुपानी का सौराष्ट्र के इलाके में प्रभाव माना जाता है। राजनीतिक तौर पर यह इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है।

इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कांग्रेस से इसी इलाके में कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा था। रुपानी ने इस बाबत शुक्रवार को एक ट्वीट किया। लिखा, “यह लोगों के कल्याण के लिए काम करने और राज्य के समस्त विकास में योगदान देने के लिए जीवन काल का इनाम है। सम्मानित महसूस कर रहा हूं।”

राज्य बीजेपी अध्यक्ष रहे विजय रुपानी- 

रुपानी साल 2006 से 2012 के बीच राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। वह जल संसाधन, खाद्य जैसे विभिन्न संसदीय कमेटियों का हिस्सा रहे हैं। वह 2013 में गुजरात म्यूनिसिपल फाइनेंस बोर्ड के चेयरमैन बने थे। अक्टूबर 2014 में वह राजकोट पश्चिमी सीट पर हुए उप-चुनाव में बड़े अंतर से जीते थे। तत्कालीन विधायक वजूभाई रुपाला के गवर्नर बनने से सीट खाली हो गई थी।

फरवरी 2016 में रूपाणी राज्य बीजेपी अध्यक्ष बने। रूपाणी आनंदीबेन सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। राजनीति में उनकी एंट्री कॉलेज के दिनों में हुई। यहां वह एबीवीपी में शामिल हुए और 70 के दशक में नवनिर्माण आंदोलन का हिस्सा बने।

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