You are here

भगवा कानून: योग परीक्षा पास करने पर बलात्कारियों को रिहा कर रही है BJP सरकार

नई  दिल्ली/नागपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो

केन्द्र में बैठी मोदी सरकार देशभर में संघ के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में केन्द्र सरकार के देखा देखी राज्यों की बीजेपी सरकारें क्यों पीछे रहने लगी भला, आखिर उन्हे भी तो नागपुर मुख्यालय की गुड बुक में अपना नाम दर्ज कराना है।

ऐसे हालात में कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल ना होकर राष्ट्रवाद, योग, गाय, मंदिर, धर्म सरकारों की प्राथमिकता में शामिल हैं। जाहिर है सरकारों का रुझान जिस तरफ होगा उनके मातहत अधिकारियों-कर्मचारियों का रुझान भी उसी तरफ होगा।

इसे भी पढ़ें- स्कूली बच्चों के दिमाग में प्रतियोगिता के नाम पर हिन्दुत्व का बीज बोना चाहती है बीजेपी !

मामला भी संघ के मुख्यालय यानि नागपुर का ही है। जहां बलात्कार की सजा काट रहे एक शख्स को सजा पूरी किए बिना ही छोड़ दिया गया। उसके छोड़ने की वजह  ये थी कि उसने योग अच्छे से किया था।

ये पहला मामला नहीं है इससे पहले भी बेहतर योग करने वाले 8 कैदियों को सजा पूरी होने से पहले ही छोड़ दिया गया।

नागपुर की सेंट्रल जेल में शीतल कावले नाम का एक शख्स बंद था। उसे 2012 में अपनी एक रिश्तेदार का बलात्कार करने का दोषी पाया गया था।  सितंबर में यानी 40 दिन बाद उसकी सजा पूरी होने वाली थी लेकिन योग के पेपर में वह फर्स्ट आया और इनाम में उसे बची हुई सजा से छूट मिल गई।

जेल के सीनियर अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि, ‘100 नंबर का टेस्ट हुआ था। शीतल ने 75 प्रतिशत से ज्यादा नंबर पाए। इसलिए उसकी 40 दिन की सजा माफ कर दी गई।’

इसे भी पढ़ें-“गर्व से कहो हम हिन्दू हैं”, मैं RSS से पूछता हूं पिछड़े किस बात पर हिन्दू होने का गर्व करें ?

जेल में योग करवाने का प्रस्ताव जेल प्रशासन ने ही दिया था। प्रशासन ने महाराष्ट्र में मौजूद सभी सात जेलों में योग का टेस्ट करवाया था। यह काम केंद्र सरकार की उस बात को ध्यान में रखकर किया जा रहा है जिसमें राज्य सरकारों को योग को बढ़ावा देने के लिए कहा गया है।

इससे पहले भी छोड़े गए हैं कैदी- 

अबतक 8 ऐसे कैदी हैं जिन्हें योग के टेस्ट में अच्छे नंबर लाने का फायदा मिल चुका है। ऐसे कैदियों को उनकी सजा में 30 से 40 दिन की छूट मिल गई है। इसमें नागपुर और औरंगाबाद जेल के कैदी भी शामिल हैं। जेल के अधिकारियों के मुताबकि, योग से कैदियों में बदलाव आ रहे हैं।

एक अधिकारी ने कहा, ‘योग की वजह से दोषी पहले से फिट और अच्छे लगने लगे हैं। उनमें से कुछ मेडिटेशन भी करते हैं ताकी उनका दिमाग ठंडा रह सके।’

नेशनल जनमत का सवाल- 

केंद्र सरकार योग पर करोड़ों रूपए खर्च कर रही है और खूब जोरों-शोरों से योग का प्रचार किया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या प्रशासन दोषियों को सिर्फ इसलिए सजा पूरी होने से पहले छोड़ देगा क्योंकि वो लोग सरकार की नीतियों के प्रचार प्रसार के साधन बन रहे हैं और योग को बढ़ावा दे रहे हैं।

इसे भी पढ़ें-इलाहाबाद वि.वि. के VC ने PM को लिखा पत्र, मेरे पहले के कुलपतियों ने 250 करोड़ का भ्रष्टाचार किया है

वरिष्ठ पत्रकार महेन्द्र नारायण यादव लिखते हैं कि-

कल के दिन किसी योगगुरु को बलात्कार के आरोप से ही परे मान लिया जाएगा। अदालत कह देगी कि ये तो योगगुरु हैं, इन पर बलात्कार का आरोप लग ही नहीं सकता। कैसे दोहरे मानदंड समाज अपना रहा है।

किसी एक बलात्कार पर पूरे देश में तूफान आ जाता है और वहीं दूसरे मामलों में बलात्कारियों पर लोगों को दया आने लगती है। एक तरफ बलात्कारियों के लिए फांसी की मांग होती है, वहीं दूसरी ओर उन्हें नियत सजा काटने से पहले ही छोड़ दिया जाता है।

याद रहे कि जिस बलात्कारी युवक को छोड़ा गया है, उसने अपनी ही रिश्तेदार के साथ बलात्कार किया था, यानी मामला अधिक संगीन था, और इसीलिए आरोप प्रमाणित होने पर उसे सजा सुनाई गई। मुकदमे के दौरान पीड़िता को तरह-तरह के सवालों का सामना करना पड़ा होगा।

इसे भी पढ़ें-UP जल निगम में भ्रष्टाचार का खुला खेल, 58 अंक वाले सवर्ण बने इंजीनियर, 60 अंक वाले OBC फेल

अब वही अपराधी फिर उसके सामने होगा। है तो रिश्तेदार ही। किसी न किसी अवसर पर टकराएगा ही।

ये बात आप लोगों को सामान्य लगती है तो फिर कहने के लिए कुछ नहीं रह जाता है।

Related posts

Share
Share