You are here

मत भूलिए काल्पनिक सत्ता के सामने सर झुकाकर आप इन धूर्तों और गुंडों को असीम ताकत दे रहे हैं !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

देश में बन रहे छद्म माहौल ने सदियों से चली आ रही मानसिक गुलामी को और ताकत प्रदान कर दी है। इस माहौल में वास्तविकता कल्पना से परे होती जा रही है और कल्पना को वास्तविकता का जामा पहना दिया गया है।

अंधविश्वास को घटाने की बजाए भगवा सरकारें उनको बढ़ाने पर जोर दे रही हैं ताकि आम आदमी अपनी जरूरतों की मांग ना करके पाकिस्तान और चीन जैसे मुद्दों में उलझा रहे।

इस बारे में अन्तर्राष्ट्रीय शोधकर्ता और सामाजिक चिंतक संजय श्रमण जोठे लगातार अपने लेखों के माध्यम से लोगों का सामाजिक तौर पर ब्रेनवॉश करके उन्हे मानववादी बनाने की ओर अग्रसर है।

भारत की पुराण बुद्धि और उसके गर्भ से निकली प्रतिक्रान्ति कैसे काम करती है? ये अभी आपकी आंखों के सामने आप देख सकते हैं. इतिहास में सभ्यता, नैतिकता, समाज, और राष्ट्र के निर्माण में जिनका धेले भर का कोई योगदान नहीं रहा वे अब इतिहास की पुनर्रचना करेंगे.

ये बड़े मजे की बात है इस बेशर्मी का एक लंबा सिलसिला आप देख सकते हैं इस मुल्क के इतिहास में. ये लोग ऐसा कैसे कर पाते हैं? क्या आपके मन में सवाल नहीं उठता ?

ये लोग ऐसा इसलिए कर पाते हैं क्योंकि समाज के मनोविज्ञान की चाबी इनके पास है. भारत का गरीब, दलित, आदिवासी, शूद्र और स्त्री जब असुरक्षित और भयभीत होते हैं तब एक अदृश्य सत्ता और उसकी शक्ति में आश्वासन खोजते हैं. उस अदृश्य का ठेका इन धर्म-धूर्तों के पास है. और आप इस अदृश्य के गुलाम हैं.

आप जिस धर्म को मानते हैं, जिस देवी देवता या मिथक को मानते हैं उसके निर्माण का और उसकी व्याख्या का अधिकार इनके पास है. यही इनकी एकमात्र लेकिन सबसे बड़ी ताकत है.

अगर आपका समाज इनके अंधविश्वासी धर्म के जाल में फंसा हुआ है तो ये एक बार नहीं हजार बार इतिहास का मुंह काला करेंगे. इन्हें इतनी ताकत आप ही देते हैंं.

आप जब जब किसी काल्पनिक ईश्वर, दैवीय सत्ता, शास्त्र, मिथकीय कथा या गुरुओं-बाबाओं के सामने सर झुकाते हैं तब तब आप इन धूर्तों और गुंडों को मजबूत करते हैं.

ये सबसे गहरी और जरूरी बात है जिसे बहुजन समाज को, भारत के वंचित तबकों को और विशेष रूप से स्त्रियों को समझना जरुरी है.

 

Related posts

Share
Share