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क्रिया प्रतिक्रिया का नियम-जी हां यहां ब्राह्मणवादियों का प्रवेश वर्जित है ! देखिए भीमवादी गेट

नई दिल्ली/ गाजियाबाद। नेशनल जनमत ब्यूरो 

बचपन में स्कूल जाने वाले हर शख्स ने न्यूटन का क्रिया-प्रतिक्रया का नियम तो जरूर पढ़ा होगा. नियम के अनुसार जब किसी दिशा में जितनी ताकत से क्रिया की जाती है उसके विपरीत हुई प्रतिक्रिया उतनी तेजी से वापस आती है.

ये विज्ञान का नियम सामाजिक जीवन में भी लागू होता है. सहारनपुर के द ग्रेट चमार के बाद गाजियाबाद में एक भीमवादी दरवाजा खोजा गया है. दरवाजे की तस्वीर खुद बदलते हुए समाज की तस्वीर बयां कर रही है.

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गाजियाबाद में लगा है ये भीमवादी दरवाजा- 

यूपी के गाजियाबाद जिले में एक दलित परिवार के बाहर की दीवार और उसका दरवाजा देखकर आपको अहसास होगा कि सम्मान और स्वाभिमान छीनने का परिणाम क्या होता है? सबसे पहले तो उस परिवार ने अपने मुख्य दरवाजे के ऊपर बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर और महात्मा बौद्ध की टाइल्स लगवाई है। उसके बाद दरवाजे के दोनों कोनों पर जय भीम-जय भारत लिखा हुआ है।

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इसके नीचे दरवाजे पर लिखा हुआ है- ‘ब्राह्मणवादियों व पूंजीपतियों का प्रवेश वर्जित है’। यह मकान है यूपी के गाजियाबाद जिले के प्राणगढ़ी इलाके का। मकान नंबर 96 के इस परिवार ने मनुवादियों और ब्राह्मणवादियों को आइना दिखाते हुए यह लाइन लिखी है।

देश के कई मंदिरों में दलितों का प्रवेश वर्जित है-

देश के कई मंदिरों में अभी भी दलितों को प्रवेश नहीं दिया जाता। मंदिर के बाहर बकायदा बोर्ड लगाकर उसमें लिखा रहता है कि दलितों का प्रवेश वर्जित है। पिछले महीने ही एक खबर आई थी कि यूपी के बरेली जिले के बुझिया गांव में 50 साल पुराना एक ऐसा मंदिर है जिसमें दलितों को प्रवेश नहीं दिया जाता। इसमें सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि मंदिर एक दलित प्रधान ने अपनी निजी जमीन पर बनवाया था, इसके बाद भी उस मंदिर में दलितों का प्रवेश वर्जित है।

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बिहार के मुख्यमंत्री रहते हुए जीतन राम मांंझी के साथ हुई घटना- 

वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साथ हुई घटना को कौन भूल सकता है। जब जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री थे तब उनके द्वारा मधुबनी में एक मंदिर में प्रवेश किए जाने के बाद मंदिर को धोकर उसका शुद्धिकरण किया गया था, क्यूंकि मांझी महादलित कहे जाने वाले समाज से आते हैं। तब शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा था कि दलितों को मंदिर में प्रवेश की धर्मशास्त्रों में मनाही हैं। यह हिन्दू समाज के घटिया मानसिकता की उपज थी।

गुजरात में 13 मंदिरों में दलित  प्रवेश नहीं कर सकते- 

पिछले साल गुजरात की भाजपा सरकार ने भी विधानसभा में माना था कि गुजरात के 13 बड़े मंदिरों में दलितों के प्रवेश पर मनाही है। सदन में प्रश्नकाल के दौरान शहरकोटडा से विधायक शैलेष परमार के सवाल के जवाब में राज्य के गृहमंत्री ने यह बात स्वीकार की थी। लेकिन यह बदलता दौर है और लोगों ने अब मंदिर जाने के बजाय शिक्षा की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।

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