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वाराणसी: आरक्षण विरोधी सरकार के खिलाफ आक्रोश, ‘आरक्षण बचाओ पदयात्रा’ में PM मोदी को चेतावनी

नई दिल्ली/ वाराणसी, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

केंद्रीय शिक्षण संस्थानों समेत अन्य सरकारी नौकरियों में मोदी सरकार के आरक्षण विरोधी रवैये से नाराज दलितों-पिछड़ों-अल्पसंख्यकों और आदिवासियों ने संयुक्त रूप से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

एससी-एसटी एक्ट प्रकरण में दलितों के देशव्यापी आंदोलन में पिछड़ों ने समर्थन देकर इस मोर्चे को और मजबूती प्रदान की है। इस मजबूत रिश्ते की बानगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में देखने को मिली।  

‘सामाजिक अन्याय प्रतिकार मोर्चा’ के बैनर तले आरक्षण बचाओ पदयात्रा में सोशल मीडिया के माध्यम से आरक्षण समर्थक बड़ी संख्या में वाराणसी में एकजुट हुए औऱ मोदी सरकार के प्रति गुस्से का इजहार किया।

देश की बहुसंख्यक आबादी का प्रतिनिधित्व कर रही इस पदयात्रा में शामिल आरक्षण समर्थकों ने अपने संसदीय क्षेत्र के सांसद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चेतावनी देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने अपने आरक्षण विरोधी रवैये में तुरंत ही सुधार नही किया तो 2019 में उसे इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।

रोस्टर सिस्टम के बहाने आरक्षण खत्म- 

दरअसल मोदी सरकार यूजीसी के माध्यम से विश्वविद्यालयों में 14 पॉइंट रोस्टर व्यवस्था ले आई है जिससे आरक्षित वर्गो के लिए आरक्षण पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

इसका फायदा उठाते हुए देश के विभिन्न केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में तेजी से नियुक्तियों के विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। जिसमे संविधान द्वारा लागू आरक्षण व्यवस्था को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया है। जिसको लेकर आरक्षित वर्ग गुस्से में है ।

छात्रों का आरोप है कि मोदी सरकार सभी संवैधानिक पदों पर अपने चहेतों को बैठा रही है जिससे आरक्षित वर्ग के लोग अपने प्रतिनिधित्व से वंचित हो जाएं वही दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में जाने की बात कहकर यूजीसी के माध्यम से लोगों को लगातार गुमराह कर रही है ।

सभी जगह एक ही वर्ग का कब्जा-

आंकड़ों पर गौर करें तो न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं व्यवस्थापिका में एक खास वर्ग के लोगों का कब्जा है। सामाजिक अन्याय मोर्चा के रामायण पटेल ने कहा कि यदी प्रधानमंत्री खुद को ओबीसी कहते हैं तो सरकार अध्यादेश लाए और सभी सामाजिक, प्रशासनिक, न्यायिक ,शैक्षणिक संस्थाओं में 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का कानून बनाये।

प्रभात सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार दलितों-पिछड़ो-आदिवासियों की विरोधी है, सरकार नही चाहती कि वंचित वर्ग के लोग भी पढ़ लिख पाएं। आरक्षण बचाओ पदयात्रा लंका स्थित नारिया तिराहे से प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय पहुंची जहां ज्ञापन सौंपा गया।

ये लोग रहे मौजूद- 

इस दौरान प्रमुख रूप से विकास यादव, अरविंद यादव, शिवेंद्र मौर्य, राजीव मौर्य, आनंद बिहारी सिंह, पूनम कुमारी, सर्वेश पटेल, डॉ. आर एस पटेल, विजेंद्र मीना, संदीप यादव, राहुल यादव, सुरेंद्र पाल, कमल पटेल, सत्यप्रकाश सोनकर, अनिल पटेल, कमलेश पाल, सलगू पटेल,

विक्रम प्रताप सिंह, राजबहादुर पटेल, डॉ. निराला प्रजापति, हरिश्चन्द वर्मा, डॉ. भावना पटेल, डॉ. अनिल चौधरी, मिथिलेश बौद्ध, भारत सिंह, सुशील कश्यप, जीवन माली, आशीष राव, विजेंद्र मीणा, कौशलेश पटेल इत्यादि साथियों से भाग लिया।

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