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आरक्षण-रोजगार पर मोदी सरकार के हमले के विरोध में मधेपुरा में सामाजिक न्याय मार्च कल

नई दिल्ली/पटना। नेशनल जनमत ब्यूरो ।

यूजीसी यानि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग. उच्च शिक्षा में आने वाले स्टूडेंट्स के लिए इस संस्थान के एक-एक फैसले का बहुत महत्व होता है. ऐसे ही यूजीसी के कुछ फैसलों से छात्र-छात्राएं आहत हैं. उनको लग रहा है कि बड़े ही सुनियोजित तरीके से उनको नुकसान पहुंचाने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत यूजीसी फैसले ले रही है.

बड़े ही महीन तरीके से आरक्षित वर्ग के स्टूडेंट्स को उच्च शिक्षा में आने से रोकने का प्रबंध किया जा रहा. दूसरी तरफ निजीकऱण के माध्यम से आरक्षण खत्म किया जा रहा है. इन सब बातों से छात्र-छात्राएं आक्रोशित हैं और अपने आक्रोश को कोई लिखकर तो कोई सड़क पर उतरकर निकाल रहा है.  

फेसबुक  पर सक्रिय काव्या यादव लिखती हैं-

आरक्षण पर मोदी सरकार के हमले के विरुद्ध
“सामाजिक न्याय मार्च”।
‘आरक्षण बचाओ-रोजगार बचाओ’
मधेपुरा, शनिवार दिनांक 17 जून, 2017 समय : 6 बजे संध्या।

मोदी सरकार ख़त्म कर रही है रोजगार और उसके साथ आरक्षण ? कैसे ? जानें।

मोदी सरकार का रोजगार पर हमला :

आरक्षण को निरस्त करने के लिए कांग्रेस सरकार के समय से सरकारी नौकरियां ख़त्म की जा रही हैं। अब सरकारी उच्च शिक्षा पर हमला हो रहा है और सीटें कम करके इनका “निजीकरण” करते हुए कॉरपोरेट को सौंप दिया जाएगा. यह बड़ी साज़िश है। इस साज़िश के तहत केंद्र सरकार की नौकरियों में कमी करते हुए उन्हें निजी क्षेत्र या ठेकेदारी व्यवस्था में धकेला जा रहा है।

आरक्षित वर्ग की नौकरियों मे 90 फीसदी तक गिरावट- 

रोजगार के सन्दर्भ में 74 मंत्रालयों और विभागों ने सरकार को बताया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों की 2013 में 92,928 भर्तियां हुई थीं। 2014 में 72,077 भर्तियां हुईं। मगर 2015 में घटकर 8,436 रह गईं। नब्बे फीसदी गिरावट आई है।

मोदी सरकार का वादा था कि हर साल 2 करोड़ नौकरियां दी जाएंगी. लेकिन 15 लाख की मानव क्षमता रखने वाले रेलवे में अब मानव क्षमता है 11 लाख यानी रेलवे से भी 4 लाख नौकरियों की कटौती कर दी गई है। रेलवे जैसे ही हालात है सैन्य सेवा के। यूपीएससी के पदों में भी कटौती हुई है। 2017 की यूपीएससी की परीक्षा के लिए 980 पद तय हुए हैं। पिछले पाँच साल में यह सबसे कम है।

1. #मंडल_आयोग को लागू किये बगैर मोदी सरकार द्वारा नए पिछड़े वर्ग आयोग का गठन कर पिछड़ों के आरक्षण को हटाने की तैयारी है।

2. उत्तर प्रदेश में #ईवीएम गड़बड़ी कर सत्ता में आई आदित्यनाथ योगी सरकार ने आते ही एक बड़ा फैसला लिया और निजी मेडिकल कॉलेजों के परास्नातक कोर्स में से एससी, एसटी और ओबीसी का कोटा समाप्त कर दिया है। यह आरक्षण पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपनी सरकार के दौरान वर्ष 2006 में लागू किया था।

3. हाल में 120 पिछड़े वर्ग के सिविल सेवा में कंपलीट किये हुए अभ्यर्थियों को मोदी सरकार ने “#क्रीमी_लेयर” की नई परिभाषा लागू कर लिस्ट से हटा दिए और उस जगह को खाली रखा है। परंतु बैकलॉग भरने का कोई इरादा नहीं हैँ।

यह मोदी योगी सरकारों का आरक्षण हटाने के कदम का ट्रेलर है। असल सिनेमा नए पिछड़े वर्ग आयोग के गठन के बाद आएगा।

ओबीसी में नई जातियों को शामिल करने के लिए संसद की इजाजत नहीं लेनी होगी, सिर्फ राष्ट्रपति का अनुमोदन लेना होगा।

पिछड़े वर्ग के नेता सत्ता में शामिल होकर चुप हैं- 

सामाजिक न्याय मुद्दे पर जनता से वोट लेने वाले तमाम राजनैतिक दल चुप हैं। भाजपा में शामिल पिछड़े वर्ग के अधिकांश नेता अपने स्वार्थ में डूबे हुए हैं और समाज के हितों की रक्षा करने में असमर्थ हैं। संघर्ष हमें स्वयं करना होगा। हमें फिर से अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़नी होगी। आपसे अनुरोध है की इस देश के बहुसंख्यक पिछड़े वर्ग के हितों की रक्षा की मुहिम में शामिल हों। mandalsenamadhepura@gmail.com पर संपर्क करें।

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