You are here

आरक्षण का लाभ लेने वाले पिछड़े, क्षत्रिय बनकर, मनुवादियों के खिलाफ संघर्ष को कमजोर कर रहे हैं

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।  

पिछड़े तबके के साथ एक सबसे बड़ी समस्या उसका पहचान का संकट है। थोड़ा बहुत पैसा कमाकर ही ओबीसी का कोई व्यक्ति खुद को अपनी मूल पहचान से अलग करने की कोशिश करता है। हालांकि वह ये भी चाहता है कि उसके बेटे को ओबीसी होने का लाभ मिले लेकिन खुद ओबीसी की अपनी पहचान को क्षत्रित्व के भ्रमजाल में समेटने की कोशिश करता है।

इसके पीछे कुर्मी, यादव, कुशवाहा, पाल जैसी ओबीसी की बड़ी संख्या वाली जातियों के लोगों का तर्क होता है कि इतिहास उठाकर देख लीजिए राजा तो हमारे पिछड़े वर्ग के ही ज्यादा हुए हैं। उदाहरण के लिए शिवाजी महाराज से लेकर सम्नाट अशोक तक का नाम लेते हैं।

लेकिन ये नहीं सोचते कि छत्रपति शाहूजी महाराज, शिवाजी महाराज समेत तमाम राजाओं को अपनी जाति के कारण ब्राह्मणों के किस कुचक्र का सामना करना पड़ा। खैर वर्तमान में कुर्मी क्षत्रिय, अहीर क्षत्रिय, पाल क्षत्रिय, कुशवाहा क्षत्रिय जैसे ना जाने कितने पिछड़े क्षत्रित्व का लवादा ओढ़कर वंचित संघर्ष को कमजोर कर रहे हैं। उनके इस दोहरेपन से जन्मजात श्रेष्ठता के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ती है।

इस बारे में शोधकर्ता और समाज विज्ञानी संजय श्रमण जोठे लिखते हैं कि-

एक ओबीसी सज्जन मिले, उनके सुपुत्र ओबीसी के सर्टिफिकेट के साथ कुछ सुविधाओं का लाभ ले चुके हैं जो मुझे कभी उन्ही ने बताया था. पुश्तैनी धंधा दूध का ही रहा है उनका. आज वे पेट्रोल की कीमत में हो रहे “विकास” से परेशान थे. बात निकली कि दलितों शूद्रों आदिवासियों और गरीबों के लिए इस सरकार में कोई फ़िक्र नहीं है.

मैंने पूछा कि दलित आन्दोलन के बारे में कुछ जानते हैं? जय भीम सुना है कभी? वे बोले हाँ सुना है लेकिन हमें क्या मतलब उससे?
मैंने कहा “आप शूद्र होकर भी बहुजन और दलित आन्दोलन से अनभिज्ञ हैं तो ये गलत बात है ये आन्दोलन आपके और आपके जैसे करोड़ों लोगों के लिए है”

वे बोले कि हम शूद्र नहीं क्षत्रिय हैं, हमारा वंश लव कुश से शुरू हुआ था… मैंने पूछा अच्छा तो राजपूतों में कितनी शादियाँ हुईं हैं आपके परिवार से ? वे बोले एक भी नहीं

मैंने फिर पूछा कि ठाकुरों या बनियों में कितनी शादियाँ हुई हैं आपके परिवार या रिश्तेदारों से? वे फिर बोले एक भी नहीं

मैंने पूछा तो फिर आप किस तरह के क्षत्रिय हैं? क्षत्रियों की क्षत्रियों में शादी होनी चाहिए. वे नाराज होकर बोले, ये क्या बात हुई? शादियाँ सब अपनी बिरादरी में करते हैं इसका हमारे क्षत्रिय होने से क्या लेना देना?

मैंने कहा कि ठीक है, इसे छोड़िए आप ये बताएं कि आपके दादाजी का नाम क्या था? उन्होने दादाजी का नाम बताया. मैने फिर पूछा कि दादाजी के पिताजी का नाम बताइए,

वे बोले अब कौन याद रखता है इतनी पुरानी बातें? मैंने कहा कि आपको सौ साल पहले हुए दादाजी के पिताजी का नाम पता नहीं है लेकिन आपको तीन हजार या पांच हजार साल पुरानी इस बात का पता है कि आपका वंश लव कुश से चला है … ये कैसे संभव है?
वे बिगड़कर चले गये, कुछ समझने को राजी न हुए.

…. लेकिन दोस्तों क्या आप कुछ समझ रहे हैं? …

इधर वसूली में लगा CM योगी का एंटी रोमियो दस्ता, उधर छेड़छाड़ के चलते कानपुर की छात्रा ने छोड़ा स्कूल

ब्रिटेन में बोले नोबेल प्राप्त वैज्ञानिक, मांस की राजनीति छोड़ विज्ञान-तकनीक पर ध्यान दे मोदी सरकार

रामराज: अपहरण करके 5 दिन तक पटेल युवती से गैंगरेप,आरोपी ठाकुरों पर केस दर्ज नहीं कर रही UP पुलिस

पूर्व DGP का सनसनीखेज खुलासा, चारा घोटाले में लालू यादव को साजिशन फंसाया गया !

पटेल-दलित वोट खिसकने की आहट से डरी बीजेपी, OBC सम्मेलनों में फिर से बोलेगी ‘PM मोदी OBC हैं’

आप लिपटे रहिए धर्म की चासनी में, यहां देश में पहली बार जाति के नाम पर बन गया ‘ब्राह्मण आयोग’

संयुक्त राष्ट्र संघ ने गाय के नाम पर हिंसा और पत्रकारों की हत्या पर पीएम मोदी की आलोचना की

 

Related posts

Share
Share