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संघी एजेंडा: OBC/SC/ST के खिलाफ साजिश,आरक्षण खात्मे से सरकारी नौकरी खत्म, नोटबंदी से प्राइवेट नौकरी खत्म

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

8 नवंबर 2016 का दिन भारत के इतिहास में सबसे पीड़ादायक दिनों में से एक है। इस दिन केंद्र सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले से लाखों लोग बेरोजगार हो गए। नोटबंदी की मार झेल रहे तमाम लोगों को आज भी दो जून की रोटी मिलना मुश्किल है।

वहीं नोटबंदी के दौरान 150 से अधिक लोगों की जान गई थी। केंद्र सरकार ने नोटबंदी से कई फायदे गिनाए थे। पिछले करीब 4 महीने से नोटबंदी से हुए लाभ पर सरकार का कोई बयान नहीं आया है।

नोटबंदी से देश में बढ़ रही बेरोजगारी पर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष ने चिंता जताई है वह लिखते हैं-

नोटबंदी की नाकामी रोज नए तथ्यों के साथ आ रही है। लेकिन नोटबंदी के हथियार के जरिए आरएसएस-भाजपा और उनकी सरकार को जो हासिल करना था, वह उन्होंने कर लिया.. !

पिछले तीन दशक के दौरान जो और समाज के जिस तबके के लोग किसी तरह अपनी आर्थिक रीढ़ सीधी कर सके थे, वे गुलामी की मानसिकता से भी बाहर आ रहे थे! उनकी कमर तोड़ना ही इस सरकार का मकसद है! नोटबंदी के जरिए वही कोशिश की गई !

कई लाख लोगों के बेरोजगार होने और नौकरी से निकाल दिए जाने की खबरें तो आंकड़ों में आ चुकी हैं। इसके अलावा न जाने कितने लोगों की त्रासदी दस्तावेजों में दर्ज तक नहीं हो सकी होगी !

यानी सिर्फ आरक्षण की व्यवस्था को सुचिंतित रूप से खत्म करने के लिए एक ओर सरकारी नौकरियों में करीब नब्बे प्रतिशत तक की कटौती कर दी गई, दूसरी ओर प्राइवेट सेक्टर में ये हालत कर दी गई कि लाखों लोगों को नोटबंदी की वजह से नौकरियों से निकाला गया और वह अभी जारी है।

पहले ही लाचारी की जिंदगी काटते ज्यादातर लोग सस्ते या फिर मुफ्त के मजदूर बन जाएंगे, दिहाड़ी पर काम की तलाश में मारे-मारे फिरते रहेंगे ! फिर आएगा बेगारी या पेट पर काम कराने का ‘स्वर्ण-युग’..!

आर्थिक रूप से लाचार कर दिए जाने के बाद दलित-पिछड़ी जातियों के लोग और तमाम जातियों की महिलाएं फिर से जाति और जेंडर की गुलामी की आग में झोंक दिए जाने के लिए सबसे उपयुक्त होंगीं !

समाज को ब्राह्मण-सिद्धांत पर आधारित जातियों की गुलामी का समाज बनाने के मकसद में लगी कोई भी तानाशाही मिजाज वाली पार्टी कभी भी कमजोर तबकों को अपनी कमर को सीधा करने का मौका नहीं दे सकती..!

नोटबंदी से लेकर जीएसटी जैसे शिगूफों से वैसे ही हाशिये के लोगों की तकदीर तय की जा रही है !

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आखिर अपने स्टूडेंट की ही थीसिस चुराने वाले शिक्षक की याद में कौन मनाता है शिक्षक दिवस ?

BJP-RSS को धर्म से नहीं जाति से पकड़िए, RSS को हिन्दुवादी कहने से उसका जातिवादी चरित्र छुप जाता है

 

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