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मोदी सरकार द्वारा प्राइवेट लोगों को IAS बनाने की कोशिश सीधे तौर पर OBC/SC/ST आरक्षण पर हमला है

नई दिल्ली, नीरज भाई पटेल, नेशनल जनमत ब्यूरो।

पिछड़े और दलितों को गाय, गंगा, योग और धर्म में फंसाकर आरक्षण को सीधे तौर पर खत्म ना करने की घोषणा करके मोदी सरकार धीरे-धीरे संघी एजेंडे के तहत निजीकरण और तमाम तरह के नियम लाकर आरक्षण खत्म करती जा रही है।

रेलवे से लेकर हवाई सेवाओं का निजीकरण करके इन क्षेत्रों की हजारों नौकरियां खत्म की जा रही हैं। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से यूपीएससी को एक सुझाव दिया गया जिसके तहत कैडर का निर्धारण फाउंडेशन कोर्स के आधार पर तय करने की बात कही गई।

इसका मतलब हुआ कि आप यूपीएससी में पहली रैंक पाने के बाद भी आईएएस बनेंगे या नहीं इस बात का निर्धारण आपकी योग्यता नहीं बल्कि मसूरी स्थित सिविल सेवा के अधिकारियों के ट्रेनिंग में होने वाला फाउंडेशन कोर्स करेगा।

अब प्रशासनिक सुधार के नाम पर अपनी मानसिकता के लोगों को शासन स्तर में सीधे तौर पर अधिकारी बनाने के लिए मोदी सरकार एक नया तरीका लेकर आई है।

लेकिन दलित-पिछड़े वर्ग के लोग अपने बच्चों के भविष्य को देखने की बजाए इस इंतजार में हैं कि कब अयोध्या में राममंदिर बने और हम अपने बच्चों को साथ ले जाकर वहां धर्म का मजीरा बजाएं।

इस बीच पिछड़ों और दलितों के अधिकारों पर बार-बार कुठाराघात करके संघ ने ये समझ लिया है कि कुछ भी करते रहो धर्म की चासनी में लिपटा ये वर्ग विद्रोह नही करेगा, इसलिए धीरे-धीरे वो अपना एजेंडा सरकार के माध्यम से लागू कराती जा रही है।

प्राइवेट लोगों को अधिकारी बनाएगी मोदी सरकार- 

अब केंद्र सरकार ने देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली सिविल सेवाओं से यूपीएससी की जगह लैटरल एंट्री का नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पत्र के आधार पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है।

सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र के एक्जीक्यूटिव को विभिन्न विभागों में उप सचिव, निदेशक और संयुक्त सचिव रैंक के पदों पर नियुक्त किया जाए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्टाफ के लिए नीति पत्र के जवाब में यह फैसला लिया गया है।

10 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी- 

सरकार ने इस नोटिफिकेशन में 10 अलग-अलग मंत्रालयों में वरिष्ठ पदों के लिए आवेदन जारी किया है। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, मिनिस्ट्री में ज्वाइंट सेक्रटरी के पद पर नियुक्ति होगी।

किसी भी सरकारी, पब्लिक सेक्टर, यूनिवर्सिटी या प्राइवेट कंपनी में 15 साल का अनुभव रखने वालों के लिए मंत्रालय में सीधे एंट्री का रास्ता खुला है.

गाइडलाइंस क्या हैं?

न्यूनतम उम्र सीमा- 40 साल

अधिकतम उम्र सीमा- तय नहीं

पे स्केल- 144,200-218,200 रुपये प्रति महीना

योग्यता- किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन

अनुभव- किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर, यूनिवर्सिटी या प्राइवेट कंपनी में 15 साल का अनुभव

आवेदन की अंतिम तारीख- 30 जुलाई

किसी भी मंत्रालय या विभाग में ज्वाइंट सेक्रटरी का पद काफी अहम होता है. तमाम बड़ी पॉलिसी और नियमों को अंतिम रूप देने में इनका ही योगदान होता है. आवेदकों को बस एक इंटरव्यू देना होगा. ये इंटरव्यू कैबिनेट सेक्रटरी के नेतृत्व में बनने वाली कमेटी लेगी. शुरुआत में कॉन्ट्रेक्ट 3 साल के लिए होगा जिसे प्रदर्शन के आधार पर 5 साल तक के लिए बढ़ाया जा सकेगा.

इन 10 मंत्रालय और विभागों के नाम हैं-

रेवेन्यू

फाइनेंस सर्विस

इकनॉमिक अफेयर्स

कृषि

रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे

शिपिंग

पर्यावरण

रिन्यूएबल एनर्जी

सिविल एविएशन

कॉमर्स

ज्वाइंट सेकेट्री के बराबर ही होगा वेतन – 

कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी समिति ऐसे लोगों का अंतिम रूप से चयन करेगी। जिनका वेतन वर्तमान भारत सरकार में ज्वाइंट सेकेट्री के पद पर काम कर रहे अधिकारी के बराबर ही होगा। यानि पे स्केल- 144,200-218,200 रुपये प्रति महीना।

पहले कहा था… ऐसा कोई विचार नहीं-

पिछले साल ही अगस्त में कार्मिक राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह बताया था कि ऐसी समिति गठित करने की कोई योजना नहीं है, जो सिविल सेवाओं में लैटरल इंट्री की संभावना पर विचार कर सके।

नेशनल जनमत के सवाल-

केन्द्र सरकार अगर अधिकारियो की कमी का रोना रो रही है तो किसकी जिम्मेदारी है पदों को बढ़ाने की केन्द्र सरकार के अधीन ही तो है यूपीएससी क्यों नहीं बढ़ाती आईएएस अधिकारियों के पदो को।

केन्द्र सरकार ये सुनिश्चित करे की प्राइवेट सेक्टर से आने वाले लोगों में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा ओबीसी-एससी को, या चयन समिति में ओबीसी-एससी वर्ग के लोगों को जरूर रखा जाएगा।

अगर ऐसा नहीं होता है तो ये भी जजों के कोलोजियम सिस्टम की तरह सवर्णों की नियुक्ति का साधन बनकर रह जाएगी।

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