You are here

”सचिन नहीँ मेजर ध्यानचंद कुशवाहा हैं भारत रत्न के हकदार”

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

देश के जाने माने बाँसुरी वादक और पद्म विभूषण हरिप्रसाद चौरसिया ने सचिन को भारत रत्न दिए जाने पर सवाल क्या खड़े किये सोशल मीडिया में ये मुद्दा तेजी से वायरल हो गया।
दरअसल जयपुर में आयोजित एक संगीत संध्या में बोलते हुए हरिप्रसाद चौरसिया ने कहा कि खेल से जुड़े एक बच्चे को भारत रत्न देने से इसका महत्व कम हुआ है. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत रत्न केवल उन लोगों को दिया जाना चाहिए जिन्होंने जीवन भर कला की साधना की हो. और अगर सरकार को खेलों में ही किसी को भारत रत्न देना था तो मेजर ध्यान चंद को दिया जाना चाहिये था।

झाँसी सांसद उमा भारती ने किया था वादा–

गौरतलब है कि बुंदेलखंड के झांसी निवासी मेजर ध्यान चंद कुशवाहा ने सन् 1928, 1932 और 1936 के ओलम्पिक खेलों में भारत को हॉकी का स्वर्ण पदक जिताने में प्रमुख भूमिका अदा की थी. मेजर ध्यान चंद की बेटी राजकुमारी कुशवाहा और उनके बेटे ओलंपियन अशोक ध्यानचंद भी समय समय पर पिता मेजर ध्यान चंद को सरकार द्वारा भारत रत्न न दिए जाने पर नाराजगी जताते रहे हैं. झाँसी में रह रहे उनके पुत्र उमेश कुमार सिंह जो रेलवे से सेवानिवृत्त हैं नेशनल जनमत से बातचीत में कहते हैं की सांसद का चुनाव लड़ने के दौरान केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने घोषणा की थी की सरकार बनते ही मेजर ध्यानचंद कॊ भारतरत्न दिलायेंगे। अब तो उनकी सरकार भी हैं देखते हैं क्या होता है ? कई लोग आए और वायदे किये लेकिन दद्दा कॊ उनका सम्मान अभी तक किसी ने नहीँ दिलाया।।

Related posts

Share
Share