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मिशनरी एडवोकेट यादव-कुरैशी के जज्बे को सोशल मीडिया पर सलामी

नईदिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

सहारनपुर में दलितों के खिलाफ जातीय हिंसा के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत पीआईएल दाखिल करने वाले गौरव यादव और मुनव्वर अली कुरैशी की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है. न्याय के पक्ष में खड़ा होने के लिए सोशल मीडिया पर कई लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं.

आपको बता दें कि गौरव यादव और मुनव्वर अली कुरैशी ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल करके सहारनपुर दंगों की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है औऱ पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की है .

सामाजिक चिंतक चन्द्रभूषण सिंह यादव अपनी फेसबुक वॉल पर गौरव यादव के लिए लिखते हैं कि

सहारनपुर जातिगत हिंसा-
सुप्रीम कोर्ट के मिशनरी एडवोकेट साथी श्री गौरव यादव जी के जज्बे को सलाम….

सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे यूपी के आजमगढ़ के मूल निवासी गौरव यादव (एडवोकेट) के मिशनरी सोच पर उन्हें कोटिशः धन्यवाद कि उन्होंने स्वयं के संसाधनों से सहारनपुर जातीय संघर्ष में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने हेतु,सरकारी मशीनरी के फेल होने या उसके भगवाकरण के विरुद्ध संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत पीआईएल दाखिल कर विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने का अनुरोध किया।  यह जनहित याचिका श्री एल नागेश्वर राव जी एवं श्री नवनीत सिन्हा जी के बेंच में दाखिल हुई।

सहारनपुर जातीय संघर्ष में झुलस रहा है और जंगल राज की दुहाई देकर सत्ता में आए लोग मंगल राज का मजा ले रहे हैं। दलित,निर्बल,गरीब लोग मर रहे हैं,प्रशासन पंगु है। जातीय श्रेष्ठता और निम्नता का रंग उतरने का नाम नही ले रहा है।प्रदेश असुरक्षा के भंवर जाल में गोते लगा रहा है तो वहीं भजन-कीर्तन तथा पिछली सरकार के सर ठीकरा फोड़ने का प्रयत्न जारी है।

ऐसे दुरूह वक्त में जब सरकार असहाय या आरोपानुसार अपराधियो की सहायक हो, विपक्ष बेहोश एवं किंकर्तव्यविमूढ़ हो तो गौरव यादव और उनके साथी अधिवक्ता मुनव्वर अली कुरैशी  जैसे लोगो का छोटा सा प्रयत्न हमे गौरव प्रदान करता है। जो काम सियासतदानों का है वह कोई गौरव यादव एडवोकेट,उनके साथी अधिवक्ता मुनव्वर अली कुरैशी या चन्द्रशेखर रावण एडवोकेट करें तो निश्चय ही किसी कवि की यह लाईन पेशेवर राजनीतिज्ञों पर सत्य प्रतीत होती है कि-

“काटिये-सींचिये, काटिये-सींचिये,आदमी बरसीम है”, हम गौरव यादव जी के इस सकारात्मक पहल पर उन्हें साधुवाद देते हैं कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में स्वयं के संसाधनों से,स्वयं संज्ञान लेकर जनहित याचिका दाखिल कर पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने का प्रयास तो किया।
गौरव यादव जी!आप जैसे साथी निश्चित तौर पर बहुत सारे लोगो के समक्ष आईना की तरह हैं और उन्हें स्वयं का चेहरा देखने को बाध्य कर रहे हैं। साधुवाद अपने इस मिशनरी एडवोकेट साथी को….

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