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सहारनपुर जातीय दंगों पर लिखी ये कविता आपके रोंगटे खड़े कर देगी…

सोशल मीडिया। नेशनल जनमत डेस्क 

#धर्मयुद्ध —————–

वो लुटेरों की तरह आए मगर लुटेरे नही थे.

लुटेरों के भी कुछ उसूल होते है

उन्होंने जानवरों की तरह शिकार किया

मगर जानवर नही थे जानवरों के भी कुछ उसूल होते है

मनुष्यता से रहित वो स्वघोषित श्रेष्ठ मनुष्य थे

उन्होंने धर्म को ओढ़ा धर्म को पहना धर्म को बिछाया

और धर्म को ही हथियार बनाया

उन्होंने जो करा वो धर्म था उन्होंने जो कहा वो धर्म था

उन्होंने जो माना वो धर्म था

उनके खिलाफ सोचना अधर्म

उनके खिलाफ बोलना अधर्म

उनके खिलाफ खड़े होना अधर्म

उन्होंने सभी अधर्मियों को घोषित किया राक्षस

और किसी के पेट में किसी की पीठ में उतार दिया खंज़र

लिखा था जिसपर धर्मयुद्ध।

व्हाट्सअप पर अरविंद भारती के नाम से लिखी गई है….

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