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सहारनपुर- घर जलाने से आक्रोशित दलितों का ऐलान, छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं

सहारनपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो

कहते हैं किसी डर के साथ जीने की एक सीमा होती है। दलित उत्पीड़न भी इसी डर से उपजा एक शब्द है। एक समय में दलित उत्पीड़न की घटनाओ में दलित प्रतिरोध का स्वर सुनाई नहीं देता था. अब बदले परिदृश्य में देश का शोषित और पीड़ित वर्ग आत्मसम्मान से जीने को बेताब है. ताजा उदाहरण सहारनपुर के शब्बीपुर गांव का है। महाराणा प्रताप जयंती पर ठाकुर बिरादरी और दलितों के बीच हुए संघर्ष में दलितों के तकरीबन 25 घर फूंक दिए गए। इस बार दलित पीड़ित तो है लेकिन आक्रोशित हो गए और सहारनपुर में जमकर बवाल शुरू हो गया। फिलवक्त पुलिस प्रशासन के इस आक्रोश को संभालने में हाथ पैर फूल रहे हैं।

विवाद की जड़ में दलित का 10 साल से ग्राम प्रधान होना भी है-

नेशनल जनमत को मिली जानकारी के अनुसार विवाद की जड़ महाराणा प्रताप जयंती में बजने वाला डीजे नही बल्कि उसके बीज पहले ही पड़ चुके थे। पहली बजह थी संत रविदास मंदिर परिसर में लगने वाली डॉ. अंबेडकर प्रतिमा। जो ठाकुरों के विरोध के बाद नही लग सकी। दूसरी बड़ी बजह थी ठाकुर प्रभाव वाले शब्बीपुर गांव में 10 साल से ग्राम प्रधान दलित समाज का बनना। ठाकुरों को ऐसा लग रहा था कि प्रधान बनने के बाद दलितों में राजनीति कुछ ज्यादा ही हावी हो गई है।

पुलिस-प्रशासन के तरीके से दलितों में आक्रोश-

सहारनपुर हिंसा को भड़काने में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली आग घी का काम कर रही है.

हिंसा रोकने के नाम पर पुलिस ने ठाकुर बिरदारी के उपद्रवियों को तांडव करने का मौका दिया। पुलिस की मौजूदगी में दलितों की बस्तियां फुंकने से उनका गुस्सा फूट पड़ा. धीरे-धीरे मामला इतना बिगड़ गया है कि आक्रोशित दलितों ने दो पुलिस चौकियां फूंक दी. एसपी सिटी को भी भागकर अपनी जान बचानी पड़ी.

भीम आर्मी की सभा रोककर हिरासत में लिए गए युवक-

पांच मई को गांव शब्बीरपुर में जलाए घरों से नाराज भीम आर्मी ने गांधी पार्क में सभा बुलाई। जिसके बाद भीम आर्मी से जुड़े युवक बड़ी संख्या में गांधी पार्क में एकजुट होना शुरू हो गए। पुलिस गांधी पार्क की सभा को रुकवाने पहुंच गई और बल प्रयोग करके सभा रुकवा दी। भीम आर्मी का आरोप है कि सभा में शामिल होने आए युवकों को हिरासत में ले लिया गया और उनके वाहन जब्त कर लिए गए।

पुलिस कार्रवाई की सूचना मिलने पर दलितों में उबाल

वाहन जब्त करने और युवकों को हिरासत में लेने की जानकारी जब अन्य गांवों तक पहुंची तो दलितों में उबाल आ गया और कई गांवों के लेग सभा स्थल की ओर कूच करने लगे।

कई गांवों के दलित गांव से बाहर निकल आए पुलिस ने इन ग्रामीणों को गांव के बाहर ही रोक लिया। जिसके विरोधस्वरुप दलितों ने पुलिस फोर्स पर पथराव कर दिया।

वार्ता करने आए आला अधिकारी बैरंग वापस लौटे –

पुलिस प्रशासन के अधिकारी अपर जिलाधिकारी एसके दुबे, नगर मजिस्ट्रेट हरिशंकर, एसपी सिटी संजय सिंह उपद्रवियों से वार्ता करने उनके बीच गए। अभी वार्ता शुरु ही हुई थी कि किसी ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। व्यक्ति को वीडियो बनाते देख दलित फिर से भड़क गए हालात इतने नाजुक हो गए कि पुलिस अधिकारियों और फोर्स को वापस भागना पड़ा।

मौजूदा स्थिति में जब तक दोनों पक्षों को एक नजर से देखते हुए प्रशासन न्यायोचित कार्रवाई नहीं करता तब तक ये आक्रोश थामना पुलिस प्रशासन के बस की बात नहीं।

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