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AU छात्र संघ: समाजवादी छात्रसभा की जीत सामाजिक न्याय की जीत है, 1 यादव, 1 पटेल, 1 दलित, 1 ठाकुर

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

सामाजिक न्याय की विचारधारा कहती है कि समाज के हर तबके को उसकी संख्या के हिसाब से देश में उपलब्ध जरूरी संसाधनों पर हिस्सेदारी दी जाए। इस लिहाज से देखें तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजे सामाजिक न्याय के योद्धाओं के लिए अच्छे संकेत लेकर आए हैं।

इस बार छात्रसंघ चुनाव में समाजवादी छात्र सभा के प्रत्याशी जय भीम, जय मंडल का नारा एक साथ लेकर चले जिसका परिणाम ये है कि पांच पदों में से चार पदों पर छात्रसभा के प्रत्याशी जीते वो भी अलग-अलग समुदायों से दो ओबीसी, 1 दलित, 1 सवर्ण।

नेशनल जनमत से बातचीत में इलाहाबाद वि.वि. छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष व सपा नेता निर्भय सिंह पटेल कहते हैं कि पूरे देश के विश्वविद्यालयो में छात्रों और नौजवानो ने कैम्पस के भगवाकरण करने की राजनीति को नकार दिया है। रोजगार को लेकर प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं से जो झूठ बोला है। छात्रों ने ठान लिया है कि इस झूठ का जवाब देकर रहेंगे।

श्री पटेल ने कहा कि छात्रों-नौजवानों के अंदर से निकली आग के परिणाम आगे आने वाले आम चुनावों में भी लोगो को दिखाई देंगे। ये सामाजिक न्याय और दलित-पिछड़ों की एकता के संघर्ष की विजय है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लॉ डिपार्टमेंट के शोध छात्र राम करन निर्मल लिखते हैं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में आखिर समाजवादी छात्र सभा को क्यो वोट किया ?

वो निम्नलिखित हैं:-

1. सामाजिक न्याय की बात ज़ोर शोर से मंच से उठाया जाना।

2. दलित और पिछड़े की एकता पर बात करना।

3. दलितों को मंच और पैनल में जगह देना

4. मंच से जय भीम, जय मंडल और जय समाजवाद का नारा बुलंद किया जाना।

5. दलित पिछड़े समाज के रिक्त पड़े प्रोफेसर के पद को न भरें जाने का मु्द्दे को उठाया जाना।

6. ABVP पैनल से किसी भी पद पर दलित को न उतारा जाना।

7. रोहित वेमुला और परमात्मा यादव की आत्महत्या के पीछे हुए जातीय उत्पीड़न को उजागर किया जाना

8. यूथ आइकॉन अखिलेश यादव का छात्रों के प्रति सहज और सरल व्यवहार।

छात्र संघ चुनाव के दौरान जब छात्रों को विरोधी खेमे में अन्धविश्वास, मनुवाद, जातिवाद और ब्राह्मणवाद के प्रतीक का भगवा झंडा लहराता दिखता तो उसे दलितों पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और छात्रों पर हुए भगवा अत्याचार याद आता।

जबकि समाजवादी छात्रसभा के प्रत्याशी दलित क्रांति के प्रतीक नीले रंग और समाजवादी हरे लाल रंग को अपने गले में पहनकर चलते रहे। दलित और पिछड़ो की यही एकता समाजवादी छात्र सभा के जीत में सहयोगी सिद्ध हुए।

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