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फर्रुखाबाद में कलम और लाठी की जंग, संपादक शरद कटियार की गिरफ्तारी के विरोध में सड़क पर उतरे लोग

नई दिल्ली/लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो 

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में कलम और लाठी के बीच जंग छिड़ी हुई है। अपनी धारदार कलम से सफेदपोश डकैतों की असलियत सामने लाने यूथ इंडिया के संपादक शरद कटियार को साजिश के तहत दो साल पुराने मामले में 19 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया।

शरद कटियार की गिरफ्तारी की खबर सुनते ही उनके समर्थन में न्यायपसंद लोग सड़को पर उतर आए और शरद कटियार जिंदाबाद, अवधेश मिश्रा, उमेश यादव मुर्दाबाद के नारे लगाए।

जानकारी के अनुसार उमेश यादव झपका नाम के शख्स ने सपा नेता सुबोध यादव के कहने पर कोतवाली मोहम्मदाबाद पुलिस में खुद के ऊपर जानलेवा हमला करने का मुकदमा शरद कटियार पर लगवाया था।

इसी साजिश के तहत 19 अगस्त को पूरी प्लानिंग के तहत शरद कटियार को गिरफ्तार कर लिया गया। इस बात की जानकारी शरद कटियार के समर्थकों को हुई तो उनमें आक्रोश पनप गया।

रविवार को कोतवाली मोहम्मदाबाद पुलिस शरद कटियार को न्यायालय में पेश करने पहुंची तो सुबह से ही उनके समर्थकों का न्यायालय की छुट्टी होने के बावजूद भी पहुंचना शुरू हो गया। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठे हो गए।

लगे शरद कटियार जिंदाबाद के नारे- 

शरद कटियार के न्यायालय में पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने समर्थकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कचहरी को छावनी में तब्दील कर दिया। इस काम की जिम्मेदारी कप्तान दयानन्द ने अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन सिंह को सौंपी। उन्होंने कोतवाली मोहम्दाबाद पुलिस के अलावा फतेहगढ़ कोतवाल दधिबल तिवारी, प्रभारी निरीक्षक थाना मऊदरवाजा भुवनेश कुमार के अलावा कई थानों की पुलिस और पीएसी बल तैनात कर दिया।

कोतवाल मोहम्दाबाद राजेश पाठक जैसे ही शरद कटियार को लेकर कचहरी पहुंचे तो कटियार समर्थकों ने जिंदाबाद के नारे लगाना शुरू किया। आक्रोशित लोग शरद कटियार जिंदाबाद, अवधेश मिश्रा मुर्दाबाद, सुबोध यादव मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे। न्यायालय से लेकर जिला जेल के गेट तक युवाओं से लेकर न्याय पंसद लोगो की भीड़ थी। सभी एक स्वर में एसपी दयानंद मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे।

शरद कटियार बोले जनता को इन गुंडों से निजात दिलाकर रहूंगा- 

सम्पादक शरद कटियार ने दो टूक लहजे में कहा कि उन्होंने सुबोध यादव जैसे माफिया, झूठे मुकदमे दर्ज कराने के स्पेशलिस्ट वकील अवधेश मिश्रा, भूमाफिया संजीव पारिया और उमेश यादव झपका जैसे लुच्चों से जिले की जनता को निजात दिलाने का बीड़ा उठाया है। मुझे इन गुंडों के खिलाफ लिखने पर ही झूठे केस में फंसाया जा रहा है।

शरद कटियार ने कहा कि गुंडे बदमाशों की पोल खोलने के लिए उन्हे जेल जाने में कोई बुराई नजर नहीं आती। देश के क्रांतिकारी भी तो जेल में रहे हैं। शरद बोले क्या हम अपने जिले की भोलीभाली जनता को इन लुटेरे और माफियाओं से बचाने के लिए जेल नहीं जा सकते ?

उनकी यह जंग आखिरी सांस तक नहीं बंद होगी और इतिहास इस बात का गवाह है कि जुल्म करने वालों ने हमेशा ही नीचा देखा है और इस जंग में भी उन्हें नीचा देखना ही होगा। जयहिन्द।

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