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दलित आक्रोश से घबराया संघ जुटा वोट मैनेजमैंट में, गुजरात चुनाव से पहले निकालेगा ‘दलित रथयात्रा’

नई दिल्ली/ गांधी नगर। नेशनल जनमत ब्यूरो।

पूरे देश में ऊना कांड, रोहित बेमुला सांस्थानिक हत्याकांड और सहारनपुर जातीय संघर्ष से उपजे दलित आक्रोश को मैनेज करने के लिए संघ आगे आया है. खबर है कि गुजरात चुनाव तुरंत पहले भाजपा ने दलित वोटों को रिझाने के लिए ‘दलित रथयात्रा’ का कार्ड खेला है, ताकि दलित वोटों को बीजेपी के पक्ष में लामबंद किया जा सके।

ऊना आंदोलन के बाद जिग्नेश मेवाणी दलितों की आवाज बन गए . जिग्नेश मेवाणी के आंदोलन  लीड करने से गुजरात में दलितों में बीजेपी को लेकर आक्रोश जबरदस्त गुस्सा पनप गया. इतना ही नहीं ऊना आंदोलन के दौरान ऊंची जाति के लोगों ने दलितों पर हमला भी किया था जिससे दलितों के बीच दलित विरोधी पार्टी की छवि बन गई.

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ऊना आंदोलन में दलितों ने फेंके थे मृत जानवर कलेक्टर ऑफिस के सामने- 

ऊना आंदोलन की शुरूआत की वजह मृत पशुओं की खाल उतारने वाले दलितों पर ऊंची जाति के कहे जाने वाले लोगों की बेरहमी से पिटाई थी। इसके बाद दलितों ने मृत जानवरों की खाल उतारने से इंकार करते हुए मृत जानवरों को डीएम समेत अन्य सरकारी कार्यालयों पर डालना शुरु किया. ऐसा माना जा रहा था कि इस पूरे आंदोलन से बीजेपी को गुजरात चुनाव में जबरदस्त नुकसान होने वाला है।

आरएसएस से जुड़ा दलित संगठन करेगा रथयात्रा का आयोजन- 

गुजरात चुनाव से पहले दलितों की नाराजगी को भांपते हुए भाजपा ने आरएसएस के दलित संगठन भारतीय बौद्ध संघ को दलित रथयात्रा का आयोजन करने के काम पर लगाया है, ताकि दलितों को भाजपा के पक्ष में लामबंद किया जा सके।

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मुख्यमंत्री विजय रुपाणी करेंगे 30 जून को यात्रा का शुभारंभ- 

भारतीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष भंते संघप्रिय राहुल ने कहा कि वो चाहते हैं कि समुदायों के बीच की दूरियां खत्म हों और यह सोच खत्म हो जाए कि आरएसएस और बीजेपी दलितों के खिलाफ हैं। उन्होंने आगे कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी 30 जून को दलित रथ यात्रा का आयोजन करेंगे।

यूपी चुनाव में भी संघ से जुड़े भारतीय बौद्ध संघ ने इसी तरह का अभियान चलाया था- 

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले भी इसी तरह का अभियान चलाने वाले संघप्रिय राहुल ने कहा, “कई ऐसे लोग हैं जो भारतीय जनता पार्टी की नीतियों को पसंद नहीं करते और लोगों के बीच आरएसएस व बीजेपी की छवि खराब करने के लिए दलित-विरोधी होने का आरोप लगाते हैं। ऊना जैसी घटनाओं से भी समाज को काफी नुकसान पहुंचा है। आरएसएस और बीजेपी से बड़ा दलितों का समर्थक और कोई नहीं है।  राहुल ने बताया कि यह रथ यात्रा अक्टूबर माह में सोमनाथ में समाप्त होगी। इसके समापन पर पीएम नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी मौजूद होंगे।

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भंते संघप्रिय राहुल रथयात्रा में सवर्णों को शामिल होने का देंगे न्योता-

राहुल ने आगे बताया कि वो समुदाय के ऐसे लोगों से भी मिलेंगे जिन्हें अछूत समझा जाता है। राहुल ने बतााया “हमने कुछ गांवों की सूची तैयार की है जहां दलित और ऊंची जाति वालों के बीच दरार साफ दिखाई देती है। गांधीनगर जिले में चौधरी वासना नाम का ऐसा ही गांव है। हम अपर कास्ट के नेताओं को रथ यात्रा में शामिल होने का न्यौता देंगे ताकि लोगों के बीच भेदभाव खत्म होने में मदद मिले।”

राहुल ने दावा किया कि यह रथ यात्रा कोई राजनीतिक कदम नहीं है। हम इस तरह की रैलियां कई राज्यों में करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य दलितों को ईसाइयों और मुस्लिमों के झांसे में आने से बचाना है। उन्होंने कहा कि बुद्ध और हिन्दू दो ऐसे धर्म हैं जिनका जन्म भारत में हुआ और दलित इनमें से किसी भी एक का पालन कर सकते हैं।

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