संघियों की करतूत से चमड़ा उद्योग से जुड़े लाखों लोग हो जाएंगे बर्बाद

नई दिल्ली। नेशनल जनमत  ब्यूरो

पशुधन को बचाने के नाम पर भगवा गमछाधारी गुंडो की गुंडई के कारण अब चमड़ा उद्योग से जुड़े लाखों लोगों का रोजगार खतरें में है.

पशु बाजार से बूचड़खानों के लिए पशुओं की खरीद पर लेदर इंडस्ट्री ने खतरे की घंटी बजा दी है. इंटरनेशनल फैशन हाउस पर इनकी मार पड़नी शुरू भी हो गई है.  ये कंपनियां बड़ी तादाद में भारत से लेदर का सामान खरीदती और बनवाती हैं.

जारा, मार्क्स एंड स्पेंसर, प्राडा, ह्यूगो बॉस, अरमानी और उनके एजेंटों ने भारतीय सप्लायरों से संपर्क कर यह पूछना शुरू किया है कि बूचड़खानों में पशुओं की सप्लाई घट गई है. ऐसे में वे उनका कांट्रेक्ट कैसे पूरा करेंगे. जूते-चप्पलों, हैंड बैग, जैकेट, बेल्ट और अन्य प्रोडक्ट की वक्त पर सप्लाई का उन्होंने जो वादा किया है क्या इसे पूरा कर पाएंगे.

चमड़ा इंडस्ट्री को हो सकता है भारी नुकसान-

बूचड़खानों में पशुओं की सप्लाई की कमी पड़ी तो इससे 13 अरब डॉलर  की लेदर इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगेगा. लगभग 13 अरब डॉलर की इस इंडस्ट्री का छह अरब डॉलर एक्सपोर्ट से आता है और 7 अरब डॉलर घरेलू मार्केट से. इतना ही नहीं, 2020 तक इस इंडस्ट्री के बढ़ कर 27 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है.

अगर लेदर की सप्लाई रुकी तो इसकी चोट इसकी रफ्तार पर भी पड़ेगी। सबसे बड़ी चिंता रोजगार को लेकर है. इस इंडस्ट्री से सीधे तौर पर 25 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। चमड़े की सप्लाई पर असर पड़ा तो इतने लोगों के पेट पर सीधे लात पड़ेगी.

अगर भारत में माल नहीं मिला तो बांग्लादेश का रुख कर लेंगी विदेशी कम्पनियां-

भारत में लेदर इंडस्ट्री की सप्लाई पर असर पड़ेगा तो यहां से माल खरीदने वाली विदेशी कंपनियां इंतजार नहीं करेंगी. कंपनियां पड़ोसी देश बांग्लादेश से माल खरीदेंगी. भारतीय निर्यातकों का कहना है कि बांग्लादेश से तैयार प्रोडक्ट की खेप इन विदेशी फैशन हाउसों में जा सकती है.

बांग्लादेश में लेदर भी अच्छी क्वालिटी की होती है. इसलिए भारतीय कांट्रेक्टर ऑर्डर पूरा करने की स्थिति में नहीं होंगे तो धंधा बांग्लादेश के सप्लायरों को मिल सकता है.  अदीबा लेदर के डायरेक्टर मोहम्मद इबरार ने बताया कि कच्चे चमड़े की सप्लाई पर असर पड़ा तो हमारी चिंता बेहद बढ़ जाएगी.

अदीबा लेदर जेरी वेबर जैसे इंटरनेशनल ब्रांड के लिए बैग की सप्लाई करती है. इबरार कहते हैं, मुझे पूरी आशंका है कि अगले कुछ दिनों में वेबर से फोन आएगा। वे मुझे पूछेंगे कि हम तय वक्त पर माल की डिलीवरी दे पाएंगे या नहीं. पता नहीं आगे क्या होगा.

ममता ने लगाई केन्द्र सरकार से गुहार-

भारत में कोलकाता लेदर के सामानों का एक बड़ा एक्सपोर्ट हब है. यहां के लेदर और लेदर प्रोडक्ट कारोबारी इसे लेकर चिंतित है. उन्होंने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और वित्त मंत्री अमित मित्रा से गुहार लगाई है. कुल मिलाकर, बूचड़खानों के लिए पशुओं की सप्लाई घटाने वाले फरमान से लेदर इंडस्ट्री में खलबली है. आने वाले दिनों में यह संकट और गहराएगा.

2 Comments

  • देवेन्द्र कुमार , 1 June, 2017 @ 1:51 pm

    मनुवादित चालों का चीरहरण करना जरूरी हो गयाहै।

  • GVK Biosciences , 14 July, 2017 @ 7:38 pm

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