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बाबा साहेब के विचारों को समझे बगैर उनको पूजने लगना ब्राह्मणवाद की पुनर्स्थापना करना है

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की सोशल मीडिया फेसबुक पर एक ऐसी तस्वीर पोस्ट की गई है जिसमें कुछ लोग उनकी पूजा-अर्चना कर रहे है। यह फोटो सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रही है।

जाने-माने अंतर्राष्ट्रीय शोधार्थी और सामाजिक कार्यकर्ता संजय श्रमन जोठे ने इस तस्वीर पर ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि इसी पोंगापंथी के ख़िलाफ बाबा साहब पूरे जीवन लड़ते रहे, बाबा साहब को पूजने का मतलब दलित बहुजन भी ब्राह्मणवादी खेल में फंसते जा रहे हैं।

उन्होंने लिखा-

दलितों बहुजनों को पता होना चाहिए कि धर्म-धूर्तों की पाखंडी बुद्धि और उससे निकला भक्तिभाव अच्छे से अच्छे विचार को भी मिट्टी में मिला सकता है. डॉ. अंबेडकर को इस तरह से चित्रित करने और पूजने का मतलब है कि आप ब्राह्मणवादी खेल के दलदल में फंस चुके हैं और अंबेडकर को भी फंसा रहे हैं. ये सर्वथा निंदनीय है.

डॉ. अंबेडकर सब तरह की भक्ति और नायक पूजा के खिलाफ रहे हैं, वे भविष्य के लिए हैं, उन्हें अतीत में खींचकर नहीं ले जाया जा सकता, नहीं ले जाया जाना चाहिए.

अगर ऐसी भूल दलितों की तरफ से की जायेगी तो दलित बहुजन अपनी मर्जी से बार बार गड्ढे में गिरेंगे. इसका दोष फिर किसी और को नहीं दिया जा सकता.

अतीत का या वर्तमान का कोई भी धर्म दलितों के लिए या शेष मनुष्यता के लिए अंतिम आश्वासन नहीं बन सकता है. सिर्फ लोकतान्त्रिक चेतना, तर्कबुद्धि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही एकमात्र उपाय है. शेष सभी उपाय आज नहीं कल भ्रष्ट हो जाते हैं. इतिहास गवाह है इस बात का.

(***अगर ये फोटो फोटोशोप या एडिटिंग का खेल है तो बात भिन्न है… लेकिन अगर ये सच में ही हो रहा है (जो कि संभव है) तो इसकी निंदा की जानी चाहिए …)

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