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सपा 31 अक्टूबर को आयोजित करेगी सरदार पटेल जयंती समारोह, कुर्मी समाज के दिग्गजों का होगा जमावड़ा

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

कहते हैं कि किसी भी महापुरुष के विचार उनके अनुयायियों के माध्यम से ही समाज तक पहुंचते हैं। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के अनुयायियों ने ये बात साबित कर दी है कि अगर उनका दिल जीतना है तो बाबा साहेब को नमन करना ही होगा।

विरासत हथियाने की राजनीति के बीच दलितों को खुश करने के लिए बाबा साहेब के विचारों की एबीसीडी ना जानने वाले लोग आज बाबा साहेब जयंती पर बड़े-बड़े आयोजन करते हैं। प्रधानमंत्री और बीजेपी मंचों से बाबा साहेब को अपना आदर्श होने की बात करते हैं।

बीजेपी की महापुरुष हस्तांतरण राजनीति के बीच समाजवादी पार्टी ने भी इस बार 31 अक्टूबर को लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय पर भव्य जयंती मनाने का निर्णय लिया है। जिसमें पटेल समाज के दिग्गज सपा नेताओं जमावड़ा होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मुख्य अतिथि होंगे और अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल करेंगे।

कुर्मी समाज के दिग्गज नेताओं का होगा जमावड़ा- 

कार्यक्रम में कुर्मी समाज के दिग्गज सपा नेताओं का जमावड़ा होगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद बेनी प्रसाद वर्मा, पूर्व मंत्री विधायक नरेन्द्र सिंह वर्मा, सांसद रविप्रकाश वर्मा मौजूद रहेंगे।

मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामपूजन पटेल, पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार, पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल, पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल, पूर्व सांसद राकेश सचान, एमएलसी रमा आरपी निरंजन, पूर्व सांसद धर्मराज पटेल, रिटायर्ड आइएएस राधेश्याम सिंह समाज की दशा और दिशा पर विचार मंथन करेंगे।

कार्यक्रम के संयोजक एवं आयोजक पूर्व मंत्री वरिष्ठ सपा नेता राममूर्ति वर्मा हैं।

16 को बैठक बुलाई है नरेश उत्तम ने- 

नेशनल जनमत’ से बातचीत में सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल का कहना है कि जयंती समारोह बहुत भव्य होगा इसके लिए तैयारियां जोरों पर हैं। पूरे प्रदेश के पार्टी कार्यकर्ताओं को जयंती समारोह को सफल बनाने के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

हालांकि इस आमंत्रण पत्र पर उन्होंने कहा कि 16 अक्टूबर सोमवार को जयंती को लेकर एक जरूरी बैठक बुलाई गई है। उसमें सारे जरूरी लोग मौजूद रहेंगे। इसी बैठक में आमंत्रण पत्र और अतिथियों के नाम फाइनल किए जाएंगे।

बीजेपी ने शुरू की थी विरासत हथियाने की राजनीति- 

एक छोटे से तालुके वारडोली के किसान आंदोलन से निकलकर देश के पहले गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री बनने वाले सरदार पटेल के सिद्धांतों को याद करते हुए इस बार भी उनके अनुयायी देश भर के विभिन्न हिस्सों में जयंती का आयोजन कर रहे हैं।

लेकिन मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव के पूर्व सरदार पटेल की विरासत को कांग्रेस से हथियाने के लिए कुर्मी (पटेल) बाहुल्य इलाकों में आयोजित जनसभाओं में सरदार पटेल की लौह प्रतिमा के नाम पर कुर्मी समाज से लोहा लेना शुरू कर दिया।

सरदार के इन्ही अनुयायियों जिनमें कुर्मी, गुर्जर, जाट जैसी किसान जातियां शामिल हैं, को अपने पाले में लाने के लिए सरदार श्री के नाम और चेहरे को आगे रखने का प्रयास किया जा रहा है।

खैर वजह कुछ भी हो इस बहाने सरदार पटेल की शख्सियत और विचार लोगों के सामने तो आ ही रहे हैं। इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन समाजवादी पार्टी करे या बीजेपी जागरूक लोगों को महापुरुष के नाम पर वोट बैंक के रूप में प्रयोग होने से बचना चाहिए।

समाज के लोगों को देखना होगा कि कौन सी पार्टी राजनीति, सरकारी नौकरी और व्यापार में उनके समाज को पर्याप्त हिस्सेदारी दे रही है और समाज की बेहतरी के लिए जरूरी योजनाएं लागू कर रही है।

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