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लखनऊ में ‘सरदारवादियों’ ने भरी हुंकार, 31 दिसंबर को इलाहाबाद में होगा सरदार वंशजों का महाजुटान

नई दिल्ली/ लखनऊ, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत)  

किसानों-कमेरों को वोट बैंक समझने वाली सरकारों के खिलाफ सरदार वशंजों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। लखनऊ में राजनीति के केन्द्र समझे जाने वाले दारुल सफा के ए ब्लॉक के कॉमन हॉल में सरदारवादियों ने बैठक कर किसानों-कमेरों की आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया।

तमाम सारी चर्चा-परिचर्चा के बीच सरदारवादियों ने तय किया कि सरदार वशंजों की ताकत जगाने के लिए 31 दिसंबर को सरदार वल्लभ पटेल महापरिनिर्वाण के उपलक्ष्य में इलाहाबाद में महाजुटान होगा। जिसमें देश-भर से सरदार के अनुयायियों को आमंत्रित किया जाएगा।

राजनीति से परे होगा मंच- 

सरदारवादी डॉ. आर. एस. सिंह पटेल ने कहा कि ये महाजुटान किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा के तहत ना होकर सिर्फ सरदार पटेल की विचारधारा यानि किसानवादी विचारधारा के बैनर तले होगा। महाजुटान में पूरे देश भर से किसान पुत्रों और सरदार के वंशजों को आमंत्रित किया गया है।

देखिए सरदारवादियों की ललकार- 

सरदार के नाम पर बहुत हुई राजनीति- 

दारुल सफा में सरदारवादियों ने कहा कि किसानों के सच्चे सरदार, वल्लभ भाई पटेल के नाम पर इस देश में सियासत तो खूब हो रही है। कांग्रेस-बीजेपी जैसी पार्टियों के बाद समाजवादी पार्टी भी सरदार पटेल का नाम ले रही है। लेकिन सरदार के वंशजों को हिस्सेदारी की बात सामने आते ही पार्टियां अपने असली चरित्र पर आ ही जाती हैं।

लोकसभा चुनाव से पहले पूरे देश भर में किसानों की सहानुभूति हासिल करने के लिए सरदार की लौह प्रतिमा के नाम पर लोहा इकट्ठा किया गया, जो अब कबाड़ में पड़ा जंग खा रहा है। सरदारवादियों ने प्रण लिया है कि सरदार पटेल का इस्तेमाल सिर्फ राजनीति के लिए नहीं होने देंगे बल्कि ऐसे राजनीतिक दलों को बेनकाब करेंगे।

देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने, किसानों की दशा-दिशा और जागरूकता के लिए सरदारवादियों ने एक गैर राजनीतिक संगठन कीं नीव रखने पर जोर देते हुए प्रण किया कि सरदारश्री के विचारो को जन जन तक पंहुचाकर सरदारवादी विचारधारा रूपी क्रांति का दिया बुझने नहीं दिया जाएगा।

देश भर में फैले सरदारवादी विचारधारा के अनुयायियो का महाजुटान 31 दिसम्बर को इलाहाबाद में सरदार पटेल संस्थान मैदान अलोपीबाग में होने जा रहा है। इस दिन सरदारवादी विचारधारा के लोग क्रांति का आगाज कर सरदार पटेल के सपनो का भारत बनाने हेतु आन्दोलन का बिगुल फूंकेंगे।

समाज का मर्ज और उसकी दवा ढूंढने का प्रयास- 

डॉ. आरएस सिंह पटेल कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में पटेल समाज के लोगों की अच्छी खासी संख्या होने के बाद भी विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा समाज की उपेक्षा से आहत ‘सरदारवादी’ लोगों को एकजुट करना करने का प्रयास हो रहा है।

1- विभिन्न दलों ने पटेल समाज का वोट लिया लेकिन आज तक प्रदेश में कुर्मी समाज का कोई मुख्यमंत्री नहीं हुआ।

2- भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा सरकार में 27 विधायक होने के बाद भी सिर्फ एक कैबिनेट मंत्री देकर उपेक्षा की गई।

3- अलग-अलग दलों में बंटे समाज के लोगों को सरदारवादी विचारधारा के रूप में अखंड स्वरूप प्रदान करना।

4- तमाम राजनैतिक व सामाजिक संगठनों के ऊपर उठकर सामाजिक आंदोलन करना।

5- आरक्षण के नाम पर वर्तमान सरकारें समाज को दिखा रही हैं ठेंगा इस विषय पर मंथन।

क्या है सरदारवादी विचारधारा- 

1- किसान के हितों के बारे में सोचने वाली विचारधारा

2- समाज की एकता-अखंडता के लिए प्रयास करना

3- शक्ति के अभाव में विश्वास किसी काम का नहीं, इसलिए समाज में शक्ति व विश्वास पैदा करें

4- सरदार पटेल जन्मदिवस, परिनिर्वाण दिवस व किसान दिवस भव्य रूप में मनाना

5- सरदार वादी विचारधारी को गांव-गांव में जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरदार प्रतिमा की स्थापना

6- प्रत्येक जिले में सरदार शोध संस्थान व सरदार लाइब्रेरी की स्थापना

बैठक की अध्यक्षता डॉ. आरएस सिंह पटेल ने और सरदारवादी विचारधारा को आगे ले जाने के लिए सभा में प्रस्ताव नेशनल जनमत के संपादक नीरज भाई पटेल ने प्रस्तुत किया। जिसका विचार विमर्श के बाद सभी ने समर्थन किया।

इस दौरान रामअचल पटेल, विक्रम वर्मा, सामाजिक चिंतक अनूप पटेल, जगदीश्वर पटेल, नंदकिशोर पटेल, संजय वर्मा, बृजकिशोर पटेल, सनी पटेल, इंद्रजीत पटेल, सुशील पटेल, गोविंद पटेल, राजकुमार कुशवाहा, देवानंद पटेल, डॉ. अरविंद पटेल, मुकेश पटेल, न्यूज अटैक के अभिषेक चौधरी, एमआर पटेल, रामजी लाल यादव, अश्वनी गुर्जर, अरुण प्रकाश वर्मा आदि मौजूद रहे।

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