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अगर सरकार की नियत ठीक है, तो 30 रुपये तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल, समझिए कैसे ?

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

पेट्रोल की बढ़ती बेतहाशा कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। जिसके चलते आम आदमी परेशान है। महंगाई से निजात दिलाने के लिए पीएम मोदी ने देश की जनता से वादा किया था लेकिन मोदी सरकार हर मोर्चे पर फेल हो रही है। लगातार बढ़ती पेट्रोल की कीमतों के चलते केंद्र सरकार अब जनता के निशाने पर आ गई है।

पेट्रोल और डीजल में बढ़ाए गए दामों के चलते केंद्र सरकार की चारों तरफ आलोचना हो रही है। ऐसे में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत तभी तार्किक हो सकती है जब उन्हें जीएसटी के दायरे में लाया जाए।

बताते चलें केंद्र सरकार ने एक जुलाई को सभी अप्रत्यक्ष करों की जगह जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर लागू कर दिया था। वहीं पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया।

पिछले एक महीने में अगर देखा जाए तो पेट्रोल की कीमत में सात रूपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। मोदी सरकार ने 16 जून से पेट्रोल की कीमतों की दैनिक समीक्षा नीति लागू की है। उससे पहले तक पेट्रोल की कीमतों की पाक्षिक समीक्षा होती थी।

14 सितंबर को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 70.39 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 73.13 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 79.5 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 72.97 लीटर रही। पेट्रोल की ये कीमत अगस्त 2014 के बाद सबसे ज्यादा है।

जब अगस्त 2014 में पेट्रोल की कीमत 70 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा थी तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 103.86 डॉलर (करीब 6300 रुपये) प्रति बैरल थी। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 54.16 डॉलर (3470 रुपये) प्रति बैरल है।

मोदी सरकार नवंबर 2014 से अब तक पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 126 प्रतिशत और डीजल के उत्पाद शुल्क में 374 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर चुकी है।

अब समझिए खेल की सरकार चाहे तो कैसे सस्ता होगा तेल- 

अगर बात पेट्रोल की करें तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का जो मौजूदा भाव से उसके हिसाब से भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल करीब 21 रुपये का पड़ रहा है।

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने और बाकी खर्च करीब 10 रुपये प्रति लीटर आता है। यानी अगर सरकार कोई टैक्स न ले तो करीब 31 रुपये प्रति लीटर बिक सकता है।

मौजूदा टैक्स व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के उत्पाद शुल्क के अलाव राज्य सरकार अलग-अलग दर से पेट्रोल-डीजल पर वैट लगाती हैं। मसलन, दिल्ली में 27 प्रतिशत वैट लगता है जबकि मुंबई में 47.64 प्रतिशत। इसीलिए पेट्रोल का दाम भिन्न-भिन्न राज्यों में अलग-अलग है।

अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाएगा तो उस पर अधिकतम टैक्स 28 प्रतिशत ही लगेगा क्योंकि जीएसटी के तहत सभी उत्पादों पर पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत दर से टैक्स लिया जाता है। अगर सरकार पेट्रोल पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाती है तो आम जनता को करीब 38 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल मिल सकता है।

अगर केंद्र सरकार पेट्रोल पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाती है तो आम जनता को 40.05 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। अगर पेट्रोल पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है तो इसकी कीमत 43.44 रुपये प्रति लीटर होगी।

अगर केंद्र सरकार पेट्रोल पर जीएसटी के अलावा अतिरिक्त कर (सेस) लगा दे तो इसकी कीमत इन अनुमानित कीमतों से दो-चार रुपये अधिक हो सकती है लेकिन उस स्थिति में भी पेट्रोल वर्तमान दर से करीब 20 रुपये कम बिकेगा।

सवाल ये है कि सरकार की मंशा वाकई तेल की कीमत करने की है या भी या नहीं ?

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