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योगीराज में सरकारी वकीलों की नियुक्ति में भी ठोक के चला जातिवाद, 311 वकीलों में 216 ब्राह्मण-ठाकुर, 0BC-SC गायब

लखनऊ/नई दिल्ली। नेशनल  जनमत ब्यूरो 

जातिवाद के खात्मे के नाम पर उत्तर प्रदेश में ठाकुर अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी बीजेपी सरकार में ठोक के जातिवाद का नंगनाच चल रहा है। मानो सरकार की तरफ से ओबीसी-एससी के नेताओं और लोगों को खुली चुनौती दी जा रह हो कि हिम्मत है तो रोक लो। अब तो यूपी में यही होगा।

ट्रांसफर-पोस्टिंग में जमकर चले जातिवादी खेल के बाद अब यूपी की योगी सरकार ने सरकारी वकीलों की नियुक्ति में जमकर सवर्णवाद का खेल खेला है। अब ओबीसी के नाम पर बीजेपी को वोट देने वाले लोग एक दूसरे के मुंह ताक रहे है, उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि ये आखिर हुआ क्या है?

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15 फीसदी सवर्णों के हिस्से में 90 फीसदी से ज्यादा सीट- 

311 वकीलों को सरकारी काम काज के लिए हाईकोर्ट में सरकारी वकील के रूप में तैनाती देने में योगी सरकार ने जो लिस्ट जारी की है वह चौकाने वाली है। वैसे तो सरकार का दावा है कि पीएम मोदी की मंशा सबका साथ सबका विकास के अनुसार काम कर ही है, लेकिन 311 वकीलों की तैनाती में जो आंकड़ा है वह इसके बिलकुल उलट है और सरकार की झूठी मंशा को साबित  कर रहा है।

देखिए जातिवाद का खेल-  

4 मुख्य स्थाई अधिवक्ता-   ब्राह्मण- 3 ओबीसी- 1

25 अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता-  ब्राह्मण – 12 ठाकुर- 7

103 स्थाई अधिवक्ता –  60 ब्राह्मण- 17 ठाकुर

65 ब्रीफ होल्डर  सिविल-  ब्राह्मण- 8 ठाकुर

114 ब्रीफ होल्डर क्रिमिनल-  ब्राह्मण, 33 ठाकुर

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311  में से अकेले 70 फीसदी ठाकुर-ब्राह्मण- 

इस लिस्ट में स्थायी अधिवक्ता (उच्च न्यायालय), मुख्य स्थाई अधिवक्ता, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता और ब्रीफ होल्डर (क्रिमिनल) और ब्रीफ होल्डर सिविल के पद हैं। इसमें  311 में से अकेले 216 पद ब्राह्मण 65 पद ठाकुरों के पास हैं। यानि कि अकेले 70 फीसदी पद ठाकुर-ब्राह्मणों के पास हैं। अन्य वर्ग में 20 ओबीसी, 2 एससी और 4 मुसलमानों को इस लिस्ट में जगह दी गई है।

अधिकारियों की नियुक्ति में भी जमकर हो रहा है खेल- 

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार के समय यादववाद का रोना रोने वाले भाजपाईयों ने उत्तर प्रदेश में ठाकुर अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनते ही जमकर सवर्णवाद और ठाकुरवाद करना शुरू कर दिया है। जिन ठाकुर अधिकारियों ने अखिलेश सरकार के समय खूब मलाई काटी आज वही ठाकुर अधिकारी सपाई से संघी बन गए।

ना सिर्फ ऐसे अधिकारी ठाकुर जैक के सहारे मलाईदार पदों पर जमे हैं बल्कि उनको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से 1 साल तक पद पर बने रहकर लूट खसोट करने की अघोषित आजादी भी दे दी गई है।

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सिर्फ कमाऊ और भक्त टाइप के अफसरों का है बोलबाला-

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सत्ता कोई भी मुख्यमंत्री कोई भी रहे अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में सिर्फ तीन चीजें देखी जाती हैं।

1- एक तो उसकी जाति

2- वो कितना कमाकर मंत्री जी को खुश रख सकता है.

3- सरकार के रंग के हिसाब से वो कैसे अपनी मानसिकता बदलता है।

सीनियर पीसीएस स्तर के एक अन्य अधिकारी ने सहमति जताते हुए कहा कि काम और आपकी काबिलियत कोई मायने नहीं रखती जो इन तीनों फन में माहिर वही सरकार का चहेता है। बाकि अच्छा प्रशासन, ईमानदार अधिकारी की बातें सब चोचले बाजी हैं।

पिछड़े वर्ग में ंघोर निराशा- 

इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ता और अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी नरसिंह पटेल अज्ञानी लिखते हैं की

माननीय मुख्यमंत्री जी आप इस प्रदेश और देश की धरोहर हैं कृपया आप अपनी नजरों को समाज के हर तबके तक दौड़ाएं और प्रतिभा का सम्मान करें ना कि किसी जाति विशेष किसी वर्ग विशेष को ही मात्र महत्व दें जो भी विकसित देश हैं वहां प्रतिभाओं का सम्मान होता है अभी-अभी नई सूची जो आपने सरकारी अधिवक्ताओं का निकाला है उसमें जाति विशेष और वर्ग विशेष का ही शत-प्रतिशत प्रतिनिधित्व है।

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इस प्रदेश में और भी समाज निवास करता है जिसने आप को चुनाव में पूर्ण समर्थन के साथ सरकार बनवाया है वह इस आशा और विश्वास के साथ बनाया है कि उसका भी विकास होगा उसके साथ न्याय होगा उसे भी समुचित भागीदारी मिलेगी मगर ऐसा नहीं हो रहा है। कृपया आप नजरिया बदलिए अपने दृष्टिकोण को विराटता का स्वरूप दीजिए जो भी विकसित देश है वहां प्रतिभा का सम्मान होता है न कि किसी जाति और वर्ग विशेष का।

तभी वह देश विकास की श्रृंखला में सर्वोपरि उठ रहा है और आज यहां टके सेर मूली टके सेर खाजा की जो नीति चल रही है हमारे नीति-नियंता लोगों का नजरिया द्विपक्षीय है उनकी नियत साफ नहीं है। इस नाते इस प्रदेश की दुर्दशा हो रही है इस देश की दुर्दशा हो रही है आप लोग गंभीरता से ध्यान दें और प्रदेश देश के विकास में सब की समुचित भागीदारी प्रतिभा को सम्मान करते हुए सुनिश्चित करें ।

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