You are here

योगीराज: नियम जूते पर रख दलित शिक्षक की नियुक्ति ही नहीं कर रहे प्रबंधक ठाकुर संतबक्स सिंह

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो। 

दलित होने की सजा कब तक? जी हां लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध छात्र विनोद कुमार सरोज आजकल समाज, शासन और प्रशासन से यही सवाल पूछ रहे हैं. दरअसल माध्यमिक सेवा चयन बोर्ड से चयनित होने के बाद भी कॉलेज के प्रबंधक ठाकुर संतबक्स सिंह अपने एक चहेते शिक्षक के कारण विनोद कुमार की नियुक्ति ही नहीं होने दे रहे हैं.

यहां ये जानना जरूरी है कि ठाकुर संतबक्स सिंह के लिए सारे नियम ठेंगे पर इसलिए हैं क्योंकि वो स्वयं और शिक्षक विवेक सिंह बीजेपी के स्थानीय नेता हैं. अब किसमें हिम्मत है कि इस दलित को न्याय दिला सके. जब सरकार ही ठाकुर साहब की है तो फिर डर काहे का.

इसे भी पढ़ें-क्या बलात्कार को बढ़ावा दे रही है अमेजन इंडिया, आक्रोशित महिलाओं ने कहा माफी मांगनी होगी

है किसी में दम जो ठाकुर संतबक्स से इस दलित को न्याय दिला सके- 

विनोद कुमार सरोज के मित्र हैं  शिरीष कुमार मौर्य जो लखनऊ वि.वि. से  पीएचडी कर रहे हैं. उन्होंने नेशनत जनमत से पूरी कहानी सांझा की  आप भी पढ़िए- 

विनोद कुमार सरोज का चयन उ.प्र. माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड,इलाहाबाद द्वारा सुभाष इण्टर कालेज पलिया ,सुलतानपुर में प्रवक्ता (हिन्दी) पद पर हुआ है. लेकिन दबंग विद्यालय प्रबंधक संतबक्स सिंह ने उन्हे दलित होने के कारण नियुक्ति देने से मना कर दिया है. साथ ही अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दे डाली. नियुक्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारी से लेकर शिक्षामंत्री (उपमुख्यमंत्री) तक से गुहार लगाई लेकिन दबंग प्रबंधक के सत्ता के रौब में सभी लाचार नजर आए.

इसे भी पढ़ें- उच्च शिक्षा में ओबीसी को रोकने की साजिश, यूजीसी ने एमफिल-पीएचडी के लिए नेट अनिवार्य किया

मजदूरी करके पढ़ें हैं विनोद- 

शिरीष कुमार बताते हैं कि विनोद बेहद गरीब दलित परिवार से आते हैं. लेकिन मेहनती, लगनशील और धुन के पक्के हैं. यही कारण है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षार्जन में लगे रहे. यहां तक कि इलाहाबाद में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान खर्च के लिए दिहाड़ी मजदूरी भी की. इनके मेहनत और लगन का परिणाम है कि आज ये लखनऊ वि.वि. से शोधकार्य (Ph.D) कर रहे हैं.उम्र के तीसरे दशक के अंतिम पड़ाव पर जब रोजगार और सेवा का अवसर आया तो उसपर वर्णव्यवस्था के कुप्रभाव की छाया दिखाई पड़ रही है.

हम मित्रों के बीच सबसे अधिक जिंदादिल और सहयोगी स्वभाव के लिए जाने जाने वाले विनोद आज हताश और नाउम्मीद नजर आते हैं.ऐसे हंसते चेहरे को मुरझाया देखकर दिल बैठ जाता है, इसे शब्दो में नही कहा जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- सीएम योगी और डीप्टी सीएम शर्मा के जाति वालो को बांटे जा रहे हैं मलाईदार पद, मौर्या किनारे

रामबक्स अकेले नहीं है इससे पहले भी किया है संघर्ष- 

विनोद कुमार को भेदभाव का सामना जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) सुलतानपुर से भी करना पड़ा. अन्य चयनित साथियों को नियुक्ति आदेशपत्र हफ्ते भर में ही निर्गत कर दिया गया. वहीं विनोद जी को महीनों टरकाया गया. बहुत दौड़ धूप ,अनुनय विनय के बाद DIOS ने आदेश पत्र निर्गत कर दिया लेकिन अभी नियुक्ति विद्यालय प्रबंधक के हाथ में थी.

प्रबंधक का रिश्तेदार है शिक्षक जो बीजेपी का नेता है- 

विद्यालय के प्रधानाचार्य से संपर्क करने पर पता चला कि इसी पद पर प्रबंधक का रिश्तेदार विवेक सिंह तदर्थ पर पढ़ा रहा है और प्रबंधक उसे पूर्णकालिक शिक्षक रखना चाहता है. प्रबंधक से मिलने पर उन्होनें भी यही बात कही. जबकि यह सरासर गलत है क्योकि विद्यालय से रिक्त पद होने की जानकारी चयन बोर्ड को भेजी गयई तभी तो यहां सरोज कुमार का चयन किया गया.लेकिन दबंगई के आगे सारे नियम ध्वस्त है.

आपको यह भी बता दें कि वर्तमान तदर्थ शिक्षक प्रबंधक का रिश्तेदार तो है हि भाजपा का जिला स्तरीय पदाधिकारी भी है. इस तरह असत्य और अन्याय के पक्ष में सारी शक्तियां हैं तो दूसरी ओर पूरी प्रक्रिया से चयनित कमजोर दलित विनोद जो दर-दर की ठोकर खाने को विवश है.

न्याय और सत्य की जीत चाहने वालों से मेरा आह्वान है कि विनोद जी को उनका हक दिलाएं।कुछ प्रश्न सरकार से भी-

इसे भी पढ़ें- यूरिया की बोरी का वजन घटाकर देशभर के किसानों को मूर्ख बनाएगी मोदी सरकार

RSSयाBJPका कार्यकर्ता नियम कानून से ऊपर है?

सबका साथ सबका विकास और सुशासन का दंभ भरने वाली योगी सरकार के शिक्षामंत्री (उपमुख्यमंत्री) दबंग मैनेजर के आगे लाचार क्यों हैं?

यदि ऐसा नही है तो चयन बोर्ड से चयनित योग्य अभ्यर्थी चयन से वंचित क्यों है?पूरे प्रकरण से यही लगता है कि विनोद जी व्यवस्था के कम वर्णव्यवस्था के अधिक शिकार हैं.

Related posts

Share
Share