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जातिवादी ‘असभ्य समाज’ का घिनौना सच, सीवर सफाई के दौरान एक साल में हुई 22,327 लोगों की मौत

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

देश से जातिवाद मिटने की बात करने वालों देख लो इस देश का जातिवादी चरित्र आज भी देश की तरक्की में बाधक बना हुआ है। तुम सब्जबाग दिखाने वाले जादूगरों के करिश्मे में बंधकर देश को तरक्की की राह पर जाने का सपना देख सकते हो लेकिन इस सामाजिक हकीकत से कैसे छुटकारा पाओगे ?

सीवर की सफाई के दौरान एक साल में ही 22327 भारतीय नागरिक के मारे जाने की खबर भारतीय समाज के लिए बदनुमा दाग है। वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक चिंतक दिलीप मंडल लिखते हैं कि-

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सीवर में हर साल बीस हजार से ज्यादा मौत वाला विश्वगुरु?

आप को क्या लगता है कि दुनिया को पता नहीं होगा कि भारत में यह सब होता है? मतलब कि हम कहेंगे कि हम विश्वगुरु हैं, और वे मान लेंगे?यह सब विदेश में छपता है. नोएडा में नौकरानियों का विद्रोह न्यूयॉर्क टाइम्स में विस्तार से छपा. जितना भारतीय मीडिया में आया, उससे कहीं ज्यादा. ऐसी घटनाओं की वजह से पूुरी दुनिया में भारत का मजाक उड़ाया जाता है, या फिर लोग दया की दृष्टि से देखते हैं. हमारे सारे अच्छे-बुरे कर्मों की जानकारी दुनिया को है.

कश्मीर से ज्यादा खतरा देश के अपने सीवर में है- 

कश्मीर में हमारी लगभग एक तिहाई सेना तैनात है. सरकारी आंकड़ा है कि 2016 में वहां 60 सुरक्षाकर्मी देश की रक्षा करते हुए मारे गए, जो हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंकड़ा है. कश्मीर एक खतरनाक जगह है. लेकिन इसी भारत में एक जगह कश्मीर से भी खतरनाक है.

वह जगह है सीवर. इनकी सफाई करते हुए एक साल में 22,327 भारतीय नागरिक मारे गए .(स्रोत- एस. आनंद का आलेख, द हिंदू)

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कश्मीर पोस्टिंग की तुलना में सीवर में जाने में जान का जोखिम कई गुना ज्यादा है. सीवर से आप जिंदा लौटकर न आएं, इसकी आशंका बहुत ज्यादा है. लेकिन अगर दिल्ली जैसे किसी शहर में सीवर साफ न हों, तो हफ्ते भर में हैजा और तमाम बीमारियों से हजारों लोग मर जाएंगे,
इस मायने में यह काम किसी भी अन्य काम से ज्यादा नहीं तो कम महत्वपूर्ण भी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही कि सीवर में इंसान ना भेजा जाए- 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी भी हालत में किसी व्यक्ति को सीवर में न भेजा जाए. इसके लिए भारतीय संसद ने मैनुअल स्कैंवेंजर एंड रिहैबिलिटेशन एक्ट 2013 भी पास किया है. सुप्रीम कोर्ट ने सीवर साफ करने के दौरान हुई मौत का मुआवजा 10 लाख फिक्स किया है.
लेकिन हालात बदले नहीं है.

दुनिया में भारत की बदनामी की एक बड़ी वजह सीवर में होने वाली मौत है. इसे दुनिया कितनी गंभीरता से लेती है, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि इस दिशा में काम करने वाले मित्र बेजवाड़ा विल्सन को मैगसेसे अवार्ड मिला है.

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इसके लिए कुछ उपाय किए जाने चाहिए.

1. सीवर साफ करने की न्यूनतम मजदूरी 50,000 रुपए प्रतिमाह तय हो.

2. सीवर में मरने वाले हर मजदूर को राष्ट्रीय शहीद का दर्जा मिले और परिवार को शहीदों के परिवारों वाली सुविधाएं मिले.

3. इस काम का तत्काल मशीनीकरण हो. अर्बन रिन्यूअल मिशन का बाकी सारा काम रोककर सारा पैसा सीवर सफाई के मशीनीकरण पर लगाया जाए. पूरी पश्चिमी दुनिया में यह हो चुका है.

और क्या किया जा सकता है, कृपया बताइए.
इस मामले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की सख्त जरूरत है.

 

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