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शहादत पर सियासत के बीच, 18 साल से अनावरण के इंतजार में है कारगिल शहीद राकेश यादव की प्रतिमा

नई दिल्ली/लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो 

कारगिल युद्ध के सैनिकों की शहादत पर सरकारों ने खूब राजनीति की। सर्जिकल स्ट्राइक के नाम पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने घूम-घूमकर अपने सम्मान समारोह भी आयोजित करवाए. लेकिन शहीदों के परिवार की वास्तविक परेशानियों की सुध लेने की जहमत किसी भी सरकार ने नहीं उठाई।

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हैरत की बात ये है कि वर्तमान सरकार की बात को छोड़ दें तो सप सरकार के समय में आश्वासन देने और यादववाद के आरोप झेलने के बाद भी अखिलेश यादव ने शहीद राकेश यादव के गांव जाना जरूरी नहीं समझा।

18 साल से इंतजार में हैं शहीद की बूढ़ी मां- 

देश की हिफाजत के लिए कारगिल में शहीद हुए लांसनायक राकेश सिंह यादव की प्रतिमा पिछले 18 सालों से अनावरण के लिए तरस रही है। शहीद की बूढ़ी मां पथराई आंखों से अपने बेटे की प्रतिमा के अनावरण के इंतजार में है। शहीद के बेटे को आश्वासन देने के बाद भी अखिलेश यादव शहीद की प्रतिमा का अनावरण करने मोहम्मदाबाद नहीं पहुंचे।

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फर्रुखाबाद जिले का मामला- 

मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला जब्ब के रहने वाले राकेश सिंह यादव 1984 में आगरा से सेना के ग्रेनेडियर कोर में भर्ती हुए थे।  1999 में कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए श्रीनगर से उनकी कंपनी को कारगिल भेजा गया। देश रक्षा में राकेश सिंह पाकिस्तानियों से लड़ते हुए शहीद हो गए, 2001 में उनकी पत्नी कमलेश कुमारी को सरकार की तरफ से पेट्रोल पंप भी दे दिया गया।

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आर्मी से रिटायर हुए शहीद के छोटे भाई शिवकेश यादव का कहना है कि प्रतिमा अनावरण के लिए काफी प्रयास किए गए पर सपा सरकार में किसी ने उनकी नहीं सुनी। अब वह फिर शासन स्तर पर पहल करेंगे और अपने शहीद भाई की प्रतिमा का जल्द अनावरण कराने का प्रयास करेंगे।

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मुलायम सिंह यादव ने दिया था आश्वासन- 

शहीद की पत्नी कमलेश कुमारी, बेटा राजन (20), बेटी प्रियंका (17), चंदन (15) मौजूदा समय में फतेहगढ़ की सैनिक कॉलोनी में रह रहे हैं। मां यशोदा अपने पैतृक गांव नगला जब्ब में रह रही हैं। मां कहना है कि उनके स्वर्गीय पति ने शहीद बेटे की प्रतिमा का अनावरण कराने का संकल्प समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव से लिया था। मुलायम सिंह यादव उस दौरान कई बार मोहम्मदाबाद आए, लेकिन वह प्रतिमा का अनावरण करने नहीं पहुंचे।

आज भी पॉलीथिन में कैद है शहीद की प्रतिमा- 

पति की मौत हो जाने के बाद प्रतिमा का अनावरण करवाने की पुरजोर पहल बच्चे नहीं कर सके। शहीद की प्रतिमा आज भी पॉलीथिन से पैक उसके पैतृक गांव नगला जब्ब में खड़ी है। आर्मी से रिटायर हुए शहीद के छोटे भाई शिवकेश यादव का कहना है कि प्रतिमा अनावरण के लिए काफी प्रयास किए गए पर सपा सरकार में किसी ने उनकी नहीं सुनी।

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अब वह फिर शासन स्तर पर पहल करेंगे और अपने शहीद भाई की प्रतिमा का जल्द अनावरण कराने का प्रयास करेंगे। कारगिल युद्व के दौरान फर्रुखाबाद के दो जवान शहीद हुए थे। इनमें थाना मेरापुर के गांव तिलियानी के रहने वाले सेवानिवृत्त हवलदार अहिबरन सिंह का बेटा अशोक कुमार भी शामिल है। वह 4 सितंबर 1999 को कारगिल में शहीद हो गया था। शहीद अशोक कुमार की पत्नी हेमलता को 11 लाख रुपये मिले थे।

 

 

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