You are here

गेहूं से विश्व का सबसे बड़ा सिक्का बनाने वाले किसान शैलेन्द्र उत्तम योगी सरकार की उपेक्षा से दुखी

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

मर जवान, मर किसान का नारा देकर कांग्रेस को धिक्कारने वाली बीजेपी सरकार के शासन काल में किसानों की बदहाली किसी से छुपी नहीं है। ऐसे ही झांसे में आकर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के एक किसान ने सोच लिया कि वो अगर अपना हुनर दिखाएगा तो सरकार उसे प्रोत्साहित करेगी।

किसान शैलेन्द्र कुमार उत्तम इसी खुशफहमी में गेहूं से बना 211 किलो वजन का सिक्का लेकर अपने भाड़े से फतेहपुर से लखनऊ महोत्सव तक पहुंच गए। हालांकि सिक्के ने आम जनमानस में खूब सुर्खियां बटोरी लेकिन सत्ताशीन लोगों के पास इस किसान के लिए 1 मिनट का टाइम भी नहीं निकल पाया।

वैसे तो गेहूं के दाने से बना विश्व का सबसे बड़ा सिक्का इस समय लखनऊ महोत्सव में धूम मचा रहा है। महोत्सव में रोजाना इस सिक्के को देखने के लिए हजारों लोग पहुंच रहे हैं और प्रशंसा कर रहे हैं। लेकिन शैलेन्द्र को मलाल है कि तीन बार खुद सीएम आदित्यनाथ लखनऊ महोत्सव आए, तमाम सत्ताधारी नेता, मंत्री पहुंचे लेकिन किसान के हुनर को देखने का टाइम किसी ने नहीं निकाला।

क्या है खासियत- 

1 रुपये का ये सिक्का 211 किलो बजन का है। सिक्के का व्यास पांच फिट और मोटाई 12 सेमी. है। इसे बनाने में तकरीबन 45 दिन का समय लगा। विश्व का सबसे बड़ा 1 रुपये का सिक्का होने के कारण इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।

जहानाबाद इलाके के सरांय धरमपुर गांव के रहने वाले शैलेन्द्र उत्तम खेती किसानी करते हैं। करीब एक साल पहले से शैलेन्द्र ने गेहूं के दानों से सिक्का बनाने के लिए प्लान किया था। 45 दिन की कड़ी मेहनत के बाद शैलेन्द्र ने जब सिक्का तैयार कर लिया तो देखने वालों की आंखें फटी की फटी रह गईं।

जब यह सिक्का मीडिया के सामने आया तो जनपद के अलावा आसपास जनपद के लोग इस सिक्के को देखने गांव पहुंचने लगे थे। सिक्के ने इतनी सुर्खियां बटोर लीं कि राजधानी लखनऊ में लगे महोत्सव में यह सिक्का पहुंच गया और वहां भी लोग शैलेन्द्र के इस हुनर को देख प्रशंसा करते नहीं थक रहे।

क्या है उद्देश्य- 

किसान शैलेन्द्र उत्तम कहते हैं कि 1 रुपये का गेंहू का सिक्का बनाकर वो लोगों का ध्यान इस बात की तरफ दिलाना चाहते है कि देश की अर्थव्यवस्था में किसान का योगदान कितना महत्वपूर्ण होता है।

दूसरा संदेश इस सिक्के के माध्यम से देना चाहता हूं कि किसान एक-एक रुपये कमाने के लिए कितनी कड़ी मेहनत करते हैं और सर्दी व धूप में लगातार काम करके लोगों का पेट भरते हैं।

शेलैन्द्र उत्तम ने नेशनल जनमत से बातचीत में अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी उम्मीद से अपना पैसा खर्च करके लखनऊ आया था लेकिन अब इतना समझ आ गया कि किसी भी सरकार को किसान और उसके हुनर की कोई फिक्र नहीं। किसान शब्द सरकारों के लिए सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है।

राजस्थान उपचुनाव: बदलाव की आहट, अपने ही गढ़ में बुरी तरह हारी BJP, तीनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा

बोधि वृक्ष रोपकर 27 सालों से बुद्ध की करुणा का प्रसार कर रहे हैं डॉ. धर्मेन्द्र पटेल, पर्यावरण प्रेम बन गई है पहचान

जानिए, उरई रोडवेज डिपो में हर साल क्यों मनाया जाता है महेन्द्र सिंह निरंजन का निर्वाण दिवस !

आरक्षण पर सुनियोजित हमले के खिलाफ प्रदेश भर के बुद्धिजीवियों को एकजुट कर रहा है ‘जनाधार संगठन’

PMO को बताना होगा कि प्रधानमंत्री के साथ विदेशी दौरों पर प्राइवेट कंपनियों से कौन-कौन जाता है ?

Related posts

Share
Share