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1962 युद्ध के दौरान छपे संपादकीय का हवाला देकर भारत को धमका रहा है ड्रेगन चीन, PM खामोश

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

कहां तो विपक्ष में रहकर पीएम मोदी चीन को धमकाने, डराने और देख लेने की बातें किया करते थे और अब सत्ता में आकर चीन की लगातार धमकियों पर भी उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे को लेकर लोग गुस्से में हैं। फेसबुक यूजर लिखते हैं कि बात-बात पर ट्वीट करने वाले पीएम मोदी चीन द्वारा दी जा रही धमकियों पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं ?

भारत के इसी रुख से चीन की धमकियां बढ़ती जा रही हैं। अब चीन की कम्यूनिस्ट सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत को धमकी देते हुए लिखा है कि अगर भारत-चीन के बीच युद्ध हुआ तो भारत के ही ज्यादा सैनिक मारे जाएंगे। इसके अलावा चीन के अखबार ने भारत को 62 की हार से सबक लेने की भी नसीहत दी है।

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सिक्किम स्थित भारत-चीन सीमा पर जारी गतिरोध के बीच चीनी मीडिया की बयानबाजियां तेज होती जा रहीं  है। चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी  ऑफ चीन (सीपीसी) के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने 1962 में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध के पहले प्रकाशित संपादकीय का हवाला देते हुए भारत को साफ तौर पर धमकी दी है। चीनी अखबार ने भारत को ‘चीन की सीमा’ में अतिक्रमण के प्रति आगाह किया है। चीन में मीडिया पर पूरी तरह सरकार का नियंत्रण है। कम्युनिस्ट पार्टी चीन की एकमात्र राजनीतिक पार्टी है जिसका सत्ता पर कब्जा है।

1962 में छपे संपादकीय में “इफ दिस कैन बी टॉलरेटेड, व्हाट कान्ट?” (अगर ये बरदाश्त हो सकता है तो क्या नहीं हो सकता?) शीर्षक के तहत 21 सिंतबर 1962 को भारतीय सैनिकों द्वारा बगैर किसी उकसावे के गोलीबारी का आरोप लगाया गया था। उस संपादकीय में ये भी कहा गया था कि भारतीय सैनिक चीनी सीमा में घुसपैठ कर रहे थे। 55 साल पुराने इस संपादकीय में कहा गया था कि अगर गतिरोध बढ़ा तो ज्यादा भारतीय सैनिकों के जानें जाएंगी। चीनी अखबार के संपादकीय ने दोनों देशों की सीमा (मैकमोहन रेखा) को गैर-कानूनी बताया गया है।

डोकलाम चौराहा है विवाद की जड़- 

चीन औऱ भारत के बीच विवाद की कोई सीधी वजह नहीं है। दरअसल चीन डोकलाम चौराहे पर सड़क का निर्माण कर रहा है। लेकिन डोकलाम चौराहे पर भूटान भी अपना दावा कर रहा है और चीन के सड़क निर्माण को अवैध बता रहा है। भूटान इस मामले में भारत से सहयोग मांग रहा है। भूटान का रक्षा सहयोगी होने के नाते भारत ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। बस इसी वजह से चीन भारत से बौखला गया है। कई दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है कि विवाद एक महीने लंबा खिंच गया है, ऐसे में दोनों देशों के बीच जंग की आशंका एक बार‌ फिर सर उठाने लगी हैं।

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चीनी विचार समूह के एक विश्लेषक ने रविवार (9 जुलाई) को कहा कि जिस तरह भूटान की ओर से सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में सड़क निर्माण से चीनी सेना को भारतीय सेना ने रोका, उसी तर्क का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के आग्रह पर कश्मीर में ‘तीसरे देश’ की सेना घुस सकती है।

चाइना वेस्ट नॉर्मल यूनिवर्सिटी में भारतीय अध्ययन केंद्र के निदेशक लांग जिंगचुन ने ‘ग्लोबल टाइम्स’ में लिखे अपने आलेख में कहा है, ‘अगर भारत से भूटान के क्षेत्र को बचाने का आग्रह किया भी जाता है तो यह उसके स्थापित क्षेत्र तक हो सकता है, विवादित क्षेत्र के लिए नहीं।’ आलेख में कहा गया है, ‘वरना, भारत के तर्क के हिसाब से अगर पाकिस्तान सरकार अनुरोध करे तो तीसरे देश की सेना भारत नियंत्रित कश्मीर सहित भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र में घुस सकती है।’

छह जून को चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसकर बंकर नष्ट कर दिए थे। वहीं भारत ने भूटान के डोकलाम इलाके में चीन द्वारा सड़क बनाने का विरोध किया। चीन इस इलाके को अपना बताता रहा है। चीन इसे डोंगलांग कहता है। चीन जो सड़क बना रहा है वो भारी टैंक और सैन्य वाहनों की आवाजाही के लायक है।  सिक्किम स्थित इस इलाके में भारत की सीमा तिब्बत और भूटान से लगती है। भारतीय सुर7ा की दृष्टि से ये इलाका काफी संवेदनशील है।

 

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