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जेल से बाहर आए पत्रकार शरद कटियार, युवाओं ने फूल-मालाओं से लादकर किया क्रांतिकारी की तरह स्वागत

नई दिल्ली/लखनऊ, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में कलम और लाठी के बीच जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है। इस जंग में भूमाफियाओं और गुंडों के खिलाफ  बिगुल फूंककर पत्रकार शरद कटियार युवाओं के बीच संघर्ष का प्रतीक बनकर उभरे हैं।

अपनी धारदार कलम से सफेदपोश डकैतों की असलियत सामने लाने वाले यूथ इंडिया के संपादक शरद कटियार अपने समर्थकों के प्रयासों से आखिरकर 87 दिन जेल में रहने के बाद गुरुवार शाम को जमानत पर जेल से बाहर आए।

इन 87 दिनों में शरद कटियार के समाचार पत्र यूथ इंडिया ने बिना डरे, बिना झुके फर्रुखाबाद के माफियाओं और दलालों के खिलाफ चल रही मुहिम का जारी रखा। इस शेर दिली का परिणाम ये है कि शरद कटियार जब जेल  से बाहर आए तो फर्रुखावाद की आवाम ने उनका स्वागत एक क्रांतिकारी की तरह किया।

सैकड़ों की संख्या में जेल के बाहर पहुंचे युवाओं ने शरद के बाहर आते ही उनको फूल मालाओं से लाद दिया और शरद कटियार जिंदाबाद, अवधेश मिश्रा मुर्दाबाद, उमेश यादव मुर्दाबाद के नारे लगने शुरू हो गए जो शरद के घर पहुंचने तक लगते रहे।

शरद बोले अब जनता देगी मुंहतोड़ जवाब- 

शरद कटियार के समर्थकों ने विरोधियों की साजिश को बेनकाब करने के लिए बुलेट का जवाब वैलेट से देने का फैसला करते हुए शरद की पत्नी रेनू कटियार को चुनाव मैदान में उतारा है। रेनू फर्रुखाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी हैं।

शरद ने बाहर आते ही चुनाव प्रचार की बागडोर संभालते हुए ‘नेशनल जनमत’ से बातचीत में कहा कि कहा कि गुंडे, माफियाओं ने भले ही मुझे झूठे केस में फंसाकर जेल भिजवा दिया लेकिन इनके आतंक से त्रस्त फर्रुखाबाद की जनता पूरी तरह उनके साथ है।

उनको हर वर्ग, कौम के इंसाफ पसंद लोगों का समर्थन मेरे लिए इस बात की प्रेऱणा है कि मैं फर्रुखाबाद के लोगों के लिए आगे भी गुंडे-बदमाशों के खिलाफ अपनी कलम चलाता रहूं।

उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि जेल में 87 दिनों के अनुभव ने मेरी इच्छा शक्ति को और मजबूत कर दिया है ताकि मैं सुबोध यादव जैसे माफिया, झूठे मुकदमे दर्ज कराने के स्पेशलिस्ट वकील अवधेश मिश्रा, भूमाफिया संजीव पारिया और उमेश यादव झपका जैसे लुच्चों से जिले की जनता को निजात दिला सकूं।

शरद कटियार ने कहा कि गुंडे बदमाशों की पोल खोलने के लिए उन्हे जेल में रहने में कोई बुराई नजर नही आती। देश के क्रांतिकारी भी तो जेल में रहे हैं। शरद बोले क्या मैं अपने जिले की जनता को इन लुटेरे और माफियाओं से बचाने के लिए जेल नहीं जा सकता ?

शरद को हाईकोर्ट से जमानत मिली-

स्थानीय अदालत से जमानत खारिज होने के बाद शरद कटियार के समर्थक इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे थे। सभी पहलुओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने शरद कटियार की जमानत मंजूर की।

क्या था मामला-

शरद के करीबियों की माने तो उमेश यादव झपका नाम के शख्स ने सपा नेता सुबोध यादव के कहने पर खुद के ऊपर जानलेवा हमला करवाया और इसके बाद कोतवाली मोहम्मदाबाद पुलिस में मुकदमा शरद कटियार पर लगवाया दिया।

इसी साजिश के तहत 19 अगस्त को पूरी प्लानिंग के शाथ शरद कटियार को गिरफ्तार कर लिया गया। इस बात की जानकारी शरद कटियार के समर्थकों को हुई तो उनमें आक्रोश पनप गया।

उमेश यादव के साथ ही जिला बार एसोसिएशन के महामंत्री संजीव पारिया व वकील अवधेश मिश्रा भी अपने खिलाफ लिखने पर कोर्ट के माध्यम से मानहानि के मुकदमे शरद कटियार पर लगवा चुके थे।

लगे थे शरद कटियार जिंदाबाद के नारे-

गिरफ्तारी के बाद कोतवाली पुलिस जैसे ही शरद कटियार को लेकर कचहरी पहुंची थी कटियार समर्थकों ने जिंदाबाद के नारे लगाना शुरू किया। आक्रोशित लोग शरद कटियार जिंदाबाद, अवधेश मिश्रा मुर्दाबाद, सुबोध यादव मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।

देखें वीडियो-

न्यायालय से लेकर जिला जेल के गेट तक युवाओं से लेकर न्याय पंसद लोगो की भीड़ थी। सभी एक स्वर में एसपी दयानंद मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे।

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