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शरद यादव ने ठोकी ताल: साझा विरासत सम्मेलन में जुटेंगी विपक्ष की कई बड़ी हस्तियां

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

जनता दल (युनाइटेड) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने राज्यसभा में पार्टी के नेता पद से हटाए जाने के बाद बुधवार को कहा कि लोग ‘भय के माहौल में जी रहे हैं’ और वह भारत की साझा संस्कृति को बचाने के लिए संघर्ष करेंगे. यादव ने घोषणा की कि विपक्ष देशभर में ‘साझा विरासत बचाओ’ सम्मेलन आयोजित करेगा, जिसकी शुरुआत गुरुवार को दिल्ली से होगी.

इस आयोजन का समन्वयन शरद यादव वह खुद करेंगे. उन्होंने कहा, ‘विपक्षी पार्टियों के नेताओं के अतिरिक्त देशभर से बुद्धिजीवी, किसान, बेरोजगार युवा, दलित और जनजातीय लोग भी इसमें हिस्सा लेंगे.’

उन्होंने कहा कि हालांकि संविधान की प्रस्तावना सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के बारे में बात करती है, ‘लेकिन आज भारत में जो कुछ भी हो रहा है, वह बिल्कुल उल्टा है’ और ‘लोग भय के माहौल में जी रहे हैं.’ यह पूछे जाने पर कि क्या बिहार के मुख्यमंत्री और जद (यू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे? यादव ने कहा कि उन्होंने इसके लिए सभी को आमंत्रित किया है.

उल्लेखनीय है कि जद (यू) के नीतीश धड़े ने यादव को राज्यसभा में पार्टी के नेता पद से पिछले सप्ताह हटा दिया था. उनके खिलाफ यह कदम बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ पार्टी के गठजोड़ से सरकार बनाने का उनके द्वारा विरोध किए जाने के कारण उठाया गया है.

बागी तेवर अपनाए शरद यादव गुरुवार को एक सम्मेलन आयोजित करेंगे. इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए किसानों, अल्पसंख्यकों और खंडों के लोग को आमंत्रित किया गया है. उन्होंने ने कहा, ‘हमारी संस्कृति को बचाने के लिए एक ‘साझा विरासत बचाओ सम्मेलन’ आयोजित करेगें.’

राजनीतिक विकास पर कोई टिप्पणी नहीं-

उन्होंने कहा कि सभी को आमंत्रित किया गया है. सभी विपक्षी नेता आएंगे. इसमें देशभर के विपक्षी दलों के नेता, बुद्धिजीवियों, किसानो, दलितों और आदिवासियों द्वारा भाग लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसमें हाल के राजनीतिक विकास पर टिप्पणी नहीं करेंगे.

17 अगस्त को मेरा सम्मेलन किसी के खिलाफ नहीं है. लेकिन देश की समग्र संस्कृति को बचाने के लिए है. साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल दिल्ली में आयोजित किए जाएंगे, लेकिन नागपुर, इंदौर और पटना में भी आयोजित किए जाएंगे.

विश्वास और धर्म के नाम पर हिंसा स्वीकार्य नहीं-

प्रधान मंत्री ने लाल किला से कहा कि कोई भी हिंसा विश्वास और धर्म के नाम पर स्वीकार्य नहीं है. मैं उनसे आग्रह करता हूं कि उसे अपनी राज्य सरकारों को भी बता देना चाहिए. हम सब एक ही कारण के लिए लड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में किसानों की आत्महत्याएं, रोहित वेमुल्ला जैसे मुद्दों को प्रमोट किया जाएगा. हाल के राजनीतिक घटनाओं के साथ इसका कोई लेना-देना नहीं है.

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