You are here

शिक्षा मित्रों को लेकर नकारात्मक सोच वाली योगी सरकार से आक्रोशित शिक्षामित्र के 19 सवाल

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

सुप्रीम कोर्ट ने आदित्यनाथ सरकार द्वारा उचित पैरवी के अभाव में शिक्षा मित्रों का संयोजन रद्द करने का आदेश दे दिया । इस निर्णय से शिक्षा मित्र और उनपर आश्रित लाखों लोग ठगा और असहाय महसूस कर रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग शिक्षामित्रों के प्रदर्शन के साथ सहानुभूति रख रहे हैं वही कुछ लोग योग्यता की बात करके उनके समायोजन को रद्द करना ठीक मान रहे हैं।

इसे भी पढ़ें-बिहार में लोगों ने BJP की तानाशाही के खिलाफ वोट दिया था, महागठबंधन टूटना गलत है- शरद यादव

इस स्थिति के बीच एक जिम्मेदार शिक्षा मित्र ने नकारात्मक बात करने वालों के नाम एक खुला खत लिखा है। आप भी पढ़िए और शिक्षा मित्रों और उनके परिवार की तकलीफ को महसूस कीजिए-

लगातार कई काबिल लोग शिक्षामित्रों के नकारात्मक बातें कर रहे हैं। मैं उनकी काबिलियत पर शक न करते हुए वास्तविकता के धरातल पर ले जाना चाहता हूं…. 

1-  सन 2000 से पहले शिक्षक बनने हेतु योग्यता इंटरमीडिएट ही थी, उसी आधार पर इनको शिक्षा विभाग में लेकर, ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत पर सबसे योग्य अभ्यर्थी को मेरिट द्वारा चयनित करके शिक्षा विभाग को संजीवनी देने का काम इन शिक्षामित्रों द्वारा किया गया।

2. उस समय की नियम शर्तों के हिसाब से वे योग्य थे, मानदेय केवल 2250 रुपये था।

3. 1998 से पहले जो शिक्षक नियुक्त हुये थे वो हाईस्कूल पास ही थे।

इसे भी पढ़ें-आरक्षण को BJP सरकार उस स्तर पर पहुंचा देगी जहां उसका होना ना होना बराबर होगा: सुब्रह्मण्यम स्वामी

4. आज जिस B. Ed. की डिग्री का राग अलाप कर शिक्षामित्रों को अयोग्य बताया जा रहा है, वह हायर एजुकेशन के लिए एवं TGT की परीक्षा       में शामिल होने के लिए थी।

5. शिक्षामित्रों को लगाने के बाद भी जब शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षा विभाग जूझा तो B. Ed. योग्यताधारी अभ्यर्थियों को विशिष्ट बीटीसी के माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग में समायोजित किया गया। यदि शिक्षामित्र गलत तो बेसिक में B.Ed. भी गलत।

6. आज शिक्षामित्र यदि समायोजित किये गए तो उनको RTE के तहत ज़रूरी BTC प्रशिक्षण ग्रेजुएशन कराने के बाद ही ऐसा किया गया।

7. यदि इनको TET ज़रूरी है तो इस पर तत्कालीन सरकारी मशीनरी को ठोस नियमावली बनानी चाहिए थी।

8. तय करिये दोष सरकार का है या शिक्षामित्रों का।

इसे भी पढ़ें-जातिवाद: UP के नौकरशाहों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की जिम्मेदारी सिर्फ ब्राह्मण ऑफीसर्स के हवाले !

9. यदि इनकी नियुक्ति की तिथि को आधार नही बनाया गया है तो, TET को 2013 से लागू न करके सन 2000 के बाद जो भी शिक्षा विभाग की नियुक्तियां हैं। सब पर लागू किया जाना चाहि।सबकी काबिलियत का अंदाज़ा लग जायेगा।

10. इनकी नियुक्तियों से पहले हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट का रिजल्ट 20% रहता था, जबकि आज 100% के आसपास। ऐसे में उस समय अपने गांव या न्याय पंचायत के सबसे काबिल अभ्यर्थी की योग्यता पर शक करना गलतहै।

11. शिक्षामित्रों ने कभी ये नहीं कहा कि B. Ed. को विभाग में मत लो, जबकि ये डिग्री higher education के लिए है….लेकिन बी.एड. वाले शिक्षामित्रों को अपना शत्रु मानते हैं।

12. आपके हिसाब से तो केवल बी.एड. ही बेसिक में लगने चाहिए तो डी.एल.एड. और बी.एल.एड. के courses का भी विरोध दर्ज कराइये।

13. 2011 TET की मार्कशीट एक एक लाख रुपये में बिकी, सफेदा गैंग का पर्दाफाश हुआ, TET conduct कराने वाला जेल में, बात करते हो काबिलियत की।

इसे भी पढ़ें-जाति के आगे हारी मजदूर की बेटी पीयू चित्रा की योग्यता, विश्व चैंपियनशिप में नहीं हो पाएंगी शामिल

14. विगत TET का रिजल्ट 20% तक पहुंचना मुश्किल हो गया। काबिलियत कहाँ घुस गई।

15. अपने जीवन के कीमती 17 साल इस प्रतिबंध के साथ विभाग को दिए कि इस दौरान कोई और काम या कहीं और नौकरी नहीं करेंगे।

16. 2009 के बाद शिक्षामित्रों की कोई नई नियुक्ति नहीं की गई…आज एकदम से इनको हटाना कहाँ उचित है।

17. बी.एड. योग्यताधारी इतने योग्य हैं तो TGT क्यों नहीं निकाल पाते, शिक्षामित्रों का TET निकालने का प्रतिशत TGT निकालने के प्रतिशत से ज्यादा है।

18. 3500 में योग्य थे 30000 में अयोग्य हो गए।

19. यदि शिक्षामित्रों को न लगाया जाता तो बेसिक शिक्षा का निजीकरण हो गया होता और आज आप बोलने लायक नहीं होते।

इसे भी पढ़ें-BJP अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति में 300 गुना बढ़ोत्तरी की खबर, मीडिया संस्थानों ने NEWS PORTAL से हटाई

उपरोक्त बातें कहने का मतलब केवल इतना है कि परस्पर वैमनस्य पैदा न करके इस विपरीत परिस्थिति में इनका सहयोग करिये।

Related posts

Share
Share