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क्या ये बदलाव की आहट है? अब शिवसेना भी बोली, गुजरात चुनाव में मोदी ने खुद को छोटा बना लिया है

मुंबई/नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहयोगियों के लिए डूबता जहाज बन गए हैं। शायद यही वजह है गुजरात चुनाव में पाकिस्तान को घसीटने को लेकर उनके खिलाफ पार्टी के भीतर से लेकर सहयोगी दलों से भी आवाजें उठने लगी हैं।

कांग्रेस से निष्कासित नेता मणि शंकर अय्यर समेत वरिष्ठ कांग्रेसियों पर पाकिस्तान परस्ती का आरोप लगाने वाले पीएम को कटघरे में खड़ा करते हुए लोगों ने पूछा अगर पीएम साहब को सब पता ही है तो मुकदमा दर्ज क्यों नहीं कराते।

शिवसेना ने सोमवार को अपनी सहयोगी पार्टी भाजपा पर गुजरात चुनाव में निचले स्तर तक उतर आने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी भाषणों से विकास का एजेंडा गायब है.

उसने कहा कि मोदी ने यह दावा कर अपने को छोटा बना लिया है कि निलंबित कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के उनके विरुद्ध बयान से गुजरात की अस्मिता अपमानित हुई है.

पीएम राष्ट्रीय नेता कम, क्षेत्रीय ज्यादा बन गए हैं- 

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा, मोदी ने खुद को छोटा बना लिया है. हम मोदी को देश और हिंदुओं का अभिमान समझते हैं लेकिन अब वह गुजरात की अस्मिता की बेड़ियों में बंध गए हैं.

उसने कहा, गुजरात चुनाव में मोदी राष्ट्रीय नेता कम, क्षेत्रीय नेता ज्यादा बन गये हैं. उसने कहा कि भाजपा प्रायोजित चुनाव आयोग में ईवीएम घोटाले की शिकायत करना व्यर्थ है.

उल्लेखनीय है कि शनिवार को गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण में विपक्षी दलों ने इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था लेकिन आयोग ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था.

शिवसेना ने कहा कि गुजरात चुनाव का प्रचार अभियान बहुत चर्चित विकास एजेंडे पर केंद्रित होना चाहिए था लेकिन, गुजरात में प्रधानमंत्री के भाषणों से यह बिंदु गायब है.

बीजेपी चुनाव प्रचार में निचले स्तर पर चली गई- 

उसने कहा कि अपने गृह राज्य में प्रधानमंत्री अपने चुनाव भाषणों में कभी भावुक तो कभी आक्रामक नजर आते हैं. यह वही राज्य है जिसने हमें यह प्रधानमंत्री दिया और जहां भाजपा ने 22 साल शासन किया. भाजपा चुनाव प्रचार अभियान में निचले स्तर तक क्यों चली गई.

शिवसेना ने कहा, जब महाराष्ट्र चुनाव में हमने अफजल खान का उल्लेख किया था तब भाजपा ने एतराज किया था और कहा था कि हम चुनाव प्रचार में नीचे के स्तर तक चले गए. लेकिन मोदी ने खुद ही गुजरात चुनाव प्रचार अभियान में मुगल शासन का जिक्र किया.

वर्ष 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने नेताओं को अफजल खान की औलाद कहने पर शिवसेना से माफी मांगने की मांग की थी.

शिवसेना ने यह भी कहा कि जब ऐसा विश्वास हो चला है कि राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी का प्रमुख बनाए जाने के बाद भाजपा के लिए चुनाव में जीत आसान हो गई है तो फिर शीर्ष भाजपा नेता उनके खिलाफ गुजरात में चुनाव प्रचार क्यों कर रहे हैं?

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