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जानिए RSS की उपज शिवकुमार शर्मा को क्यों किसानों का मसीहा बनाने पर तुली है मीडिया

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

1 जून से शुरू हुए किसान आंदोलन में 7 दिन तक शिवकुमार शर्मा का नाम कहीं नहीं दिखा. मामला तूल पकड़ गया, 6 किसानों के मरने की पुष्टि हो गई तो भाजपा-संघ ने अपने पुराने संघी और कथित किसान नेता शिवकुमार शर्मा को झाड़-पोंछकर पूरे आंदोलन का अगुवा बनाकर पेश कर दिया. अब दिल्ली के अखबार, न्यू़ज़पोर्टल और टीवी मीडिया पर शिवकुमार शर्मा किसानों के नायक बनाकर पेश किए जा रहे हैं. हम आपको बताने की कोशिश करते हैं आखिर शर्मा जी को किसान नायक क्यों बनाया जा रहा है.

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शर्मा जी संघ के किसान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष हैं- 

एनडीटीवी, जनसत्ता, एबीपी न्यूज़, बीबीसी, और तमाम बडे़ मीडिया में एक साथ एक ही दिन शिवकुमार शर्मा छा गए हैं. वरिष्ठ पत्रकार महेन्द्र यादव लिखते हैं कि शिवकुमार शर्मा को इसलिए चढ़ाया जा रहा है कि किसानों का आक्रोश किसी गैर भाजपा दल का समर्थन न कर दे, बाकी शर्मा को तो पुराने संबंधों का वास्ता देकर कभी भी साथ में ले लिया जाएगा.

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शिवकुमार शर्मा का विरोध बीजेपी से नहीं शिवराज चौहान से है-

शिवकुमार शर्मा आरएसएस के संगठन भारतीय किसान संघ के म.प्र. में संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं. किसान संघ आरएसएस के निर्देश पर अन्य अनुषंगी संगठनों की तरह कभी-कभी भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करता रहता है, ताकि संघ की जनता के बीच जाने की विश्वसनीयता बची रहे और उस पर ये आरोप भी न लग पाए कि आरएसएस लोगों के मुद्दे नहीं उठाता. वैसे भी शिवकुमार शर्मा को बीजेपी से कोई दिक्कत नहीं उनके निशाने पर तो ओबीसी शिवराज चौहान हैं.

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शिवराज से है पुरानी अदावत- 

कभी बीजपी सरकार बनवाने में प्रमुख भूमिका रखने वाले और शिवराज सिंह चौहान के शुभचिंतकों में गिने जाने वाले शिवकुमार अब उनके सबसे प्रबल विरोधियों में गिने जाते हैं. मई 2012 में म.प्र. के बरेली शहर में किसान आंदोलन शर्मा ने ही कराया था लेकिन शिवकुमार उस पर नियंत्रण नहीं रख पाए. आंदोलन भड़क गया तो पुलिस ने फायरिंग कर दी उसमें भी किसानों की मौत हुई थी. उस समय शिवराज का जलवा था तो उनकी जिद पर शर्मा को संघ से निकाल दिया गया था और जेल भी भेजे गए थे. शिवकुमार शर्मा कहते भी हैं शिवराज सिंह चौहान विवेकहीन और दिशाहीन हैं.

संपन्न परिवार से आते हैं शिवकुमार शर्मा- 

शिवकुमार शर्मा म.प्र. सरकार में विधि सलाहकार रहे हैं. पत्नी मंजुला शर्मा सरकारी कॉलेज की प्रिंसिपल हैं. दो बेटियों में से एक निहारिका स्पोर्ट्स टीचर है, और दूसरी अवंतिका दिल्ली में इंजीनियर है. खेती और किसानी से शर्मा के परिवार का कोई लेना-देना नहीं रहा है, जैसे कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शीर्ष नेताओं में से कोई भी विद्यार्थी नहीं होता उसी तरह से.

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अब भाजपा को एक बार फिर से शिवकुमार शर्मा की ज़रूरत पड़ गई है. किसान नेता के रूप में अपना ही आदमी प्रोजेक्ट हो इससे बढ़िया क्या हो सकता है. इससे आंदोलन किसी और पार्टी, दल या संगठन की तरफ जाने की बजाए अपनी ही मानसिकता के आदमी के पास रहेगा.

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