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योगीराज: बीजेपी जिलाध्यक्ष दुबे जी की दबंगई से परेशान दलित अधिकारी ने नौकरी से दिया इस्तीफा

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो 

अखिलेश सरकार को गुंडाराज बताने वाली बीजेपी ने सरकार में आने से पहले दर्जनों वादे किए थे. सुशासन के बड़े-बड़े सपने दिखाए थे. लेकिन बीजेपी के नेताओं ने साबित कर दिया कि सत्ता आती है तो घमंड और रौब आ ही जाती है. पूरे प्रदेश में सत्ता से जुड़े नेताओं और सीएम की जाति से जुड़े लोगों की दबंगई की खबरें आम बात हो गई है. अब इटावा से बीजेपी जिलाध्यक्ष शिवमहेश दुबे की दबंगई से परेशान एक समाज कल्याण अधिकारी के इस्तीफे की बात सामने आ रही है.

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जिलाध्यक्ष के करीबी का किया ट्रांसफर तो शिवकुमार का ही हो गया ट्रांसफर- 

समाज कल्याण अधिकारी के तौर पर तैनात शिवकुमार ने अपने पद और सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया गया है। हलांकि उन्होंने अपने इस्तीफे में किसी पर कोई आरोप न लगाकर इसे व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है। लेकिन खबर ये है कि उन्होंने इस्तीफा बीजेपी के जिलाध्यक्ष शिवमहेश दुबे की धमकी से परेशान होकर दिया है.

शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने 4 मई को सात साल से ताखा ब्लाक में जमे ADO समाज कल्याण प्रशांत तिवारी का तबादला चकरनगर के लिया. थोड़ी देर बाद ही भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष शिव महेश दुबे का फोन उनके पास पहुंचा और बोले प्रशांत तिवारी का तबादला निरस्त कर दो या फिर उसको बसरेहर ब्लाक में कर दो.  इंकार करने पर बीजेपी नेता ने धमकी दी कि नहीं कर दो तो इटावा में रह नहीं पाओगे.

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अधिकारी का इस्तीफा पत्र

जलालत की नौकरी ना करके अब करेंगे रिसर्च- 

शिव कुमार ने बताया कि भाजपा जिलाध्यक्ष की धमकी का असर यह हुआ कि एक जून को उनका तबादला चित्रकूट के लिए कर दिया गया . इस तरह बार-बार तबादलों से मन बड़ा ही कुंठित हो गया, इसलिए तय कर लिया कि अब सरकारी सेवा में नहीं रहेंगे और शोध कार्य करके अपना भरण पोषण करेंगे।

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ईमानदारी से काम करने की सजा, चार साल में हुए पांच ट्रांसफर- 

शिवकुमार की मानें तो उनकी अभी चार साल की सर्विस हुई थी, लेकिन ईमानदारी से काम करने सजा के तौर पर मुरादाबाद के बाद ललितपुर, हमीरपुर, औरैया, इटावा के बाद अब चित्रकूट में ट्रांसफर कर दिया गया. उन्होने आरोप लगाते हुए कहा कि तीन साल तैनाती का शासनादेश है इसके बाद भी मेरा बार-बार ट्रांसफर किया जा रहा है. यह सब सत्तासीन प्रभावी नेताओं के इशारे पर किया जा रहा है मैंने दो सरकारें देख लींं इस माहौल मे काम करने का कोई औचित्य ही नहीं बनता है.

उम्मीद थी योगी सरकार में चीजें बदलेंगी- 

समाज कल्याण अधिकारी शिवकुमार ने कहा कि योगी सरकार से बहुत उम्मीद थी, लगा था चीजें बदलेंगी लेकिन यहां भी शासनादेश की बात को अनसुना कर दिया गया. इसलिए अब फिर सरकारी सेवा मे रहने का कोई मतलब ही नही रह जाता. इसलिए इस्तीफा देना ही बेहतर समझा.

भाजपा ने लगाया बदनाम करने का आरोप- 

मामले को लेकर भाजपा के जिला प्रवक्ता जितेंद्र गौड ने भाजपा जिलाध्यक्ष की ओर से सफाई देते हुए  समाज कल्याण अधिकारी के सभी आरोपों को सिरे से ना करार दिया. उन्होंने बताया कि जिलाध्यक्ष पर लगे आरोप गलत है. समाज कल्याण अधिकारी बदनाम करने के लिए आरोप लगा रहे हैं.

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तबादला नीति का भी उल्लंघन किया है प्रमुख सचिव समाज कल्याण ने- 

प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह के पास डायरेक्टर समाज कल्याण का भी चार्ज है. समाज कल्याण विभाग से जुड़े अधिकारी दबी जुबान स्वीकार करते हैं कि प्रमुख सचिव मनोज सिंह सीएम साहब के स्वजातीय हैं, इसलिए ये डायरेक्टर पद पर किसी अधिकारी की तैनाती ही नहीं हो दे रहे.

खैर बात यहां ट्रांसफर की है तो आपको बता दें कि प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह ने तबादला नीति का खुलकर उल्लंघन किया है. तबादला नीति के अनुसार किसी भी विभाग में एक बार में तीस प्रतिशत से ज्यादा तबादले नहीं हो सकते लेकिन अधिकारियों से पैसे ऐंठने के चक्कर में प्रमुख सचिव व डायरेक्टर समाज कल्याण मनोज सिंह ने 40 प्रतिशत तक ट्रांसफर कर दिए हैं.

 

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