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केस की सुनवाई कर रहे जज पर लालू यादव ने लगाया जातिवाद का आरोप, बोले गवाहों से पूछते हैं जाति

नई दिल्ली/पटना। नेशनल जनमत ब्यूरो 

जस्टिस कर्णन मामले में कोर्ट के एकतरफा रवैये से पनपे आक्रोश के बाद जनमानस में न्यायालय के जातिवादी और भ्रष्ट होने की बात तेजी से उठी और सोसल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी। हालांकि मामला कोर्ट का था तो लोग डरकर ही सही लेकिन अपना विरोध दर्ज कराते रहे। अब न्यायपालिका पर एक बार फिर जातिवादी होने का आरोप लगा है।

इस बार मामला पिछड़े वर्ग से आने वाले नेता लालू यादव से जुड़ा है। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने चारा घोटाले मामले की सुनवाई कर रहे विशेष सीबीआई जज पर उनके गवाह के साथ अभद्रता का आरोप लगाते हुए केस को हस्तानांतरण की मांग की है।

गवाह से जाति पूछकर कागज फाड़ दिए-  

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, लालू प्रसाद यादव के वकील प्रभात कुमार ने आरोप लगाया कि विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने उनके गवाह (जो बिहार पुलिस बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक यानि डीजी रैंक के अधिकारी हैं) से उनकी जाति पूंछी।

लालू के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि जब न्यायधीश को पता चला कि वह दलित जाति से आते हैं तो उन्होंने जिस कागज में उनका बयान रिकॉर्ड कर रहे थे उसे फाड़ दिया। जज ने सुनील कुमार की गवाही रिकॉर्ड करने से मना कर दिया और कहा कि उन्हें 10 अगस्त की निर्धारित तारीख से एक हफ्ते पहले ही बुला लिया गया। प्रभात कुमार ने कहा कि लालू यादव निष्पक्ष मुकदमें के लिए आशंकित हैं।

लालू के वकील प्रभात कुमार ने कहा कि हम मुकदमे को विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत से दूसरे अदालत में स्थानांतरित करने के लिए झारखंड हाईकोर्ट से मांग करेंगे। लालू यादव ने देवघर और दुमका खजाने से 90 लाख और 3.31 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामलों के केसों की सुनवाई के लिए चार सप्ताह के स्थगन की मांग की है।

अटेंडेंट के साथ भी किया दुर्व्यवहार- 

वकील प्रभात कुमार ने न्यायाधीश के व्यवहार को अशिष्ट बताते हुए यहा भी कहा कि न्यायाधीश ने लालू यादव के अटेंडेंट भोला यादव को भी कोर्ट रूम से लज्जित करके निकाल दिया था। वकील ने बताया कि लालू यादव हृदय रोग से ग्रसित हैं और उन्हें नियमित अंतराल पर पानी और दवाइयां लेनी होती हैं जिसकी वजह से उन्होंने भोला यादव को अपने अटेंडेंट के रूप में रखा हुआ है।

आपको बता दें कि शुक्रवार को लालू यादव रांची की विशेष सीबीआई अदालत में चारा घोटालों के चार केसों की सुनवाई के लिए उपस्थित थे। जिसकी सुनवाई अलग-अलग चरणों में हो रही है। इन मामलों के अलावा चाइबासा और रांची के डोरांडा खजाने से क्रमश: 38 करोड़ और 139.39 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में विभिन्न न्यायाधीशों की अध्यक्षता में दो अलग-अलग अदालतों में सुनवाई चल रही है।

30 सितंबर 2013 को रांची की एक अदालत ने उनके खिलाफ चारा घोटालों के छ: मामलों में दोषी ठहराया था, जिसमें उन्हें पांच साल की सजा सुनाई गई थी। इसके तहत उन्हें संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था और उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद उसी साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी।

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