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शिवराज का रामराज: छतरपुर में दलित छात्राओं से साफ कराते हैं टॉयलेट, MIDDAY MEAL में फेंककर देते हैं रोटी

नई दिल्ली/छतरपुर, नेशनल जनमत ब्यूरो।

बीजेपी की सरकारों को रामराज के रूप में प्रचारित करने वाले भक्तों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मुकदमा दायर करना चाहिए। जातिवाद से भरे, भ्रष्टाचार से लबरेज और किसानों पर गोलियां बरसाने वाले शासन को रामराज बताने से क्या भक्तों के राम के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचती।

सत्तर साल पहले देश ने आजादी तो हासिल कर ली लेकिन जातिवाद की मानसिकता पीछा छोड़ने को तैयार नहीं। प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षण संस्थाओं में दलित छात्र- छात्राओं के साथ दूसरे दर्जे का व्यवहार बदस्तूर जारी है। ऐसा ही एक शर्मनाक मामला मध्यप्रदेश के छतरपुर से सामने आया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिले के सरकारी स्कूल में दलित छात्राओं से झाड़ू लगवाई जाती है, शौचालय साफ करवाया जाता है। इतना ही नहीं छात्राओं के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता है।

मामला जिले के कदारी गांव के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां अनुसूचित जाति की छात्राओं से केवल झाडू ही नहीं लगवाई जाती बल्कि शौचालय भी साफ करवाया जाता है। यही नहीं मिड डे मील के दौरान रोटियां फेंककर देने जैसा अमानवीय व्यवहार भी किया जाता है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है, मैं तुरंत जांच के आदेश देकर नोटिस जारी करता हूं। हालांकि इस मामले में बीजेपी के प्रदेश महामंत्री दिलीप अहिरवार से बात की गयी, तो उन्होंने मामले को तो गंभीर बताया, लेकिन स्कूल में बच्चियों के साथ ऐसे व्यवहार के सवाल पर बात टाल गए।

सीएम करते हैं सामाजिक समसता की नौटंकी- 

मालूम रहे कि मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान सामाजिक समरसता के नाम पर दलितो के साथ भोजन करने के कई बड़े आयोजन कर चुके हैं। यहां तक कि उज्जैन में आयोजित हुए महाकुंभ में भी उन्होंने समरसता के नाम पर विशेष स्नान का आयोजन करवाया था।

सवाल यह है कि सीएम शिवराज सिंह अपनी प्रशासनिक मशीनरी में मौजूद जातिवाद को अब तक खत्म क्यों नहीं कर पा रहे हैं। गौरतलब हो कि कदारी ग्राम पंचायत जनपद पंचायत छतरपुर के अंतर्गत आती है और यह ग्राम पंचायत छतरपुर से मात्र 13 किमी दूर है।

बहुजन समाज पार्टी के उपाध्यक्ष अब्दुल समीर ने बताया कि पार्टी के लोग जल्द ही स्कूल जाकर बच्चियों से मिलेंगे। जिला प्रशासन अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं करता, तो पार्टी आंदोलन करेगी।

सभ्य कहे जाने वाले समाज में इस प्रकार की घटनाएं सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि भले ही हमने आधुनिकता की ओर अपने कदम बढ़ा लिये हों, पर मानसिक सोच आज भी वही है।

गांव की अधिकांश आबादी ब्राह्मण हैं- 

इस ग्राम में अधिकांशत: आबादी ब्राह्मण समाज की है। सरपंच भी ब्राह्मण समाज से ताल्लुकात रखता है। पूरे गांव में जातिवाद का असर देखा जा सकता है। माध्यान्ह भोजन बांटने के समय में दलित छात्रों को अलग बैठाया जाता है एवं सवर्ण को अलग बैठाया जाता है।

छुआछूत की बीमारी पूरे गांव में फैली हुई है। पूर्व सरपंच पति वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि ग्राम कदारी ने अनुसूचित जनजाति की छात्राएं और छात्रों के साथ शालाओं में भेदभाव वर्षों से चला आ रहा है। इस परंपरा को ग्रामीण क्षैत्र में कोई नहीं मिटा सकता।

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