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फसल के सही मूल्य के बदले में शिवराज सरकार से मिली गोलियां, 6 किसानों की मौत

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन में कुछ लोगो को तोड़कर शिवराज सरकार ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी थी. लेकिन हकीकत में किसानों की मांग सुनी ही नहीं गई थी. मंगलवार को अपनी फसल का उचित मूल्य मांग रहे किसानों पर शिवराज सरकार ने गोलियां चलवा दीं. जिससे 6 किसानों की मौत हो गई, दर्जनों घायल हो गए.

मंगलवार को मंदसौर में हुए बवाल के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया. एमपी के होम मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस या सीआरपीएफ की तरफ से कोई फायरिंग नहीं हुई। वहीं, राहुल गांधी ने कहा कि सरकार देश के किसानों के साथ जंग लड़ रही है. बता दें कि किसान कर्ज माफी समेत कई मांगें कर रहे हैं. .

कहां और कैसे भड़कता गया किसानों का गुस्सा-

– मंगलवार को मंदसौर-नीमच रोड पर करीब एक हजार किसानों ने चक्काजाम कर दिया। यहीं से हिंसा भड़की। इसके बाद 8 ट्रकों और 2 बाइकों में आग लगा दी। पुलिस और सीआरपीएफ ने हालात संभालने की कोशिश की। लेकिन, भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद फायरिंग हुई।

– मारे गए लोगों के नाम कन्हैयालाल पाटीदार निवासी चिलोद पिपलिया, बंटी पाटीदार निवासी टकरावद, चैनाराम पाटीदार निवासी नयाखेडा, अभिषेक पाटीदार बरखेडापंथ और सत्यनारायण पाटीदार बरखेडापंथ हैं। मंदसौर में ही घायल आरिफ नाम के शख्स को इंदौर ले जाया जा रहा था। रास्ते में नागदा के पास उसकी मौत हो गई।

– इसके बाद भीड़ ने मंदसौर में गराेठ रोड पर सीतामऊ टोल बूथ पर आग लगा दी। कुल 28 गाड़ियां जलाई जा चुकी हैं।

– मंदसौर में सोमवार से ही इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है। फायरिंग के बाद जिला कलेक्टर ने पहले धारा 144 लगाई और इसके बाद कर्फ्यू लगा दिया।

सीएम ने दिए  न्यायिक जांच के आदेश- 

-मंदसौर की घटना पर शिवराजसिंह चौहान ने ज्युडिशियल इन्क्वॉयरी के ऑर्डर दिए हैं। होम मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ने कहा- छह दिन से आंदोलन को उग्र करने की साजिश हो रही है। पुलिस धैर्य से काम ले रही थी। असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटने के ऑर्डर दिए गए हैं।

किसानों की सरकार से क्या मांगें?

– किसान सेना के संयोजक केदार पटेल और जगदीश रावलिया के मुताबिक- किसानों ने मप्र सरकार को 32 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था। इन पर सोमवार को सीएम से चर्चा हुई थी। पटेल के अनुसार की मुख्य मांगे ये हैं-

1) मप्र सरकार ने एक कानून बनाकर किसानों की जमीन लेने के बदले मुआवजे की धारा 34 को हटा दिया था और किसानों के कोर्ट जाने का अधिकार वापस ले लिया था। इस कानून को हटाना किसानों की पहली मांग है।
2) स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं जिनमें कहा गया है कि किसी फसल पर जितना खर्च आता है, सरकार उसका डेढ़ गुना दाम दिलाए।
3) एक जून से शुरू हुए आंदोलन में जिन किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए। मप्र के किसानों की कर्जमाफी।
4) सरकारी डेयरी द्वारा दूध खरीदी के दाम बढ़ाए जाएं।

 

 

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