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पद की गरिमा भूलकर श्री श्री रविशंकर के ड्राइवर बने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो। 

देश के लिए एक बड़ी समस्या ये है कि धर्म यहां लोगों की नसों में घुस चुका है जो आदमी के सोचने समझने की क्षमता को भी नष्ट कर देता है। ऐसे में अत्यधिक धार्मिक व्यक्ति अपनी विवेक बुद्धि से नहीं बल्कि आस्था के हिसाब से फैसले लेता है और तर्क वितर्क की जगह कुतर्क करने लगता है। ऐसा ही मामला असम की राजधानी गुवाहाटी में देखने को मिला।

गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति अजीत सिंह पर नियम और प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने लगाया है। आरोप है कि चीफ जस्टिस ने अपनी पद की गरिमा और चीफ जस्टिस का प्रोटोकॉल तोड़ते हुए आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर को ना सिर्फ अपनी कार से एयरपोर्ट तक छोड़ा बल्कि खुद ही ड्राइवर बनकर गाड़ी चलाई।

ऐसा करते हुए उनकी तस्वीर भी सामने आई है। घटना 5 सितंबर की है, लेकिन इसकी तस्वीरें बाद में सामने आई हैं। जब श्री श्री रविशंकर गुवाहाटी में पूर्वोत्तर के मूल निवासियों के जनसमागम में हिस्सा लेने आए थे।

जैसे ही यह खबर कानून जगत में फैली गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लोगों ने आरोप लगाया कि मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट के नियमों की अवहेलना की है।

बार एसोसिएशन के सदस्यों ने फैसला किया है कि एसोसिएशन की अगली आम सभा में इस मुद्दे को उठाएंगे। इसके अलावा बार एसोसिएशन के लोग इसकी शिकायत सुप्रीम के चीफ जस्टिस से भी करने पर विचार कर रहे हैं।

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