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आरक्षण पर सुनियोजित हमले के खिलाफ प्रदेश भर के बुद्धिजीवियों को एकजुट कर रहा है ‘जनाधार संगठन’

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

2014 लोकसभा चुनाव से पहले ओबीसी प्रधानमंत्री के नाम पर पिछड़े वर्ग के लोगों को साधने की कवायद बीजेपी द्वारा खूब की गई। मंचों से चीख-चीखकर भाजपाईयों द्वारा पीएम की जाति को ओबीसी बताकर महिमामंडित किया गया।

लेकिन मोदी औऱ योगी सरकार में निकाली जा रही सरकारी भर्तियों के विज्ञापनों से ओबीसी के आरक्षण को सुनियोजित तरीके से खत्म करने की बू आ रही है।

सबसे बड़ा उदाहरण योगी सरकार द्वारा निकाली गईं सचिवालय की सहायक समीक्षा अधिकारी भर्ती में ओबीसी के लिए एक भी सीट आरक्षित न करना है।

अब विपक्षी दलों के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठन भी ओबीसी आरक्षण के पक्ष में लामबंद होते दिख रहे हैं। ऐसा ही एक संगठन हैं जनाधार संगठन। जिसका मुख्यालय लखनऊ है और इसे बुद्दिजीवियों का संगठन माना जाता है।

इस संगठन में वर्तमान व पूर्व ऑफीसर्स अधिकारी, लेखक, पत्रकार, इन्जीनियर, डॉक्टर समेत समाज के विभिन्न तबकों के बुद्धिजीवी जुड़े हैं। पूर्व पीसीएस वीपी सिंह जनाधार संगठन के संयोजक हैं और पूर्व डीआईजी डीके चौधरी समाज को संघर्ष का रास्ता दिखाने के लिए इस संगठन के माध्यम से जगह-जगह जागरूकता का काम करते हैं।

जिले वार आयोजित की जाती हैं बैठकें- 

जनाधार संगठन (JS) की 27 जनवरी को गोविन्द लॉज, सीतापुर में एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें किसानों और कमेरों के अलावा तमाम रिटायर्ड और वर्तमान अधिकारियों ने भाग लिया।

इस दौरान प्रमुख 7 बिंदुओं पर वक्ताओं ने चर्चा की।

1. भारत सरकार तथा उoप्रo सरकार में विज्ञापित भर्तियों में सुनियोजित तरीके से पिछड़े वर्गों का आरक्षण कम किया जा रहा है अथवा कम आरक्षण को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है |

2. जिले के सभी सदस्यों को स्मार्टफोन रखना चाहिए तथा सोशल मीडिया, whatsapp, के माध्यम से समूह बनाकर नेटवर्क विकसित करना चाहिए |

3. सभी सदस्य सप्ताह में कम से कम एक घंटे किसी न किसी रूप में समाज के कार्य में योगदान देना चाहिए अथवा ठोस जानकारी का आदान- प्रदान करना चाहिए |

4. सभी सदस्य सोशल साइट्स पर परस्पर निंदा, आलोचना अथवा Good Morning, एवं कॉपी-पेस्ट सन्देश से खुद को दूर रखें।

5. सभी सदस्य आचार संहिता का अनिवार्य रूप से पालन करेंगे |

6. जिले में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों को वहां के स्थानीय प्रभुत्व सामाजिक लोगों के संपर्क में रहना चाहिए तथा बिना किसी दुष्प्रचार  के शांतपूर्ण ढंग से आपस में सहयोग करना चाहिए जिससे अधिकाधिक लोगों की भलाई में योगदान संभव हो सके |

7. जिले में प्रतिमाह मिलने-जुलने का कार्यक्रम सादगीपूर्ण ढंग से आयोजित करके परस्पर बंधुत्व विकसित करना चाहिए तथा समाज के लोगों के उत्पीड़न अथवा विपत्ति की स्थिति में ग्रुप सन्देश के माध्यम से अधिकाधिक लोगों को सूचित करके सहयोग करना चाहिए।

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